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जानिये इस साल के राष्ट्रिय शिक्षक भूषण पुरस्कार के विजेता शिक्षकों की प्रेरणादायी कहानियां!

र साल 5 सितंबर को माननीय राष्ट्रपति महोदय के हाथो शिक्षको को, प्रतिष्ठित राष्ट्रिय शिक्षक भूषण पुरस्कार दिया जाता है। यह पुरस्कार प्राथमिक, माध्यमिक तथा उच्च माध्यमिक स्कुलो में पढ़ाने वाले ऐसे शिक्षको को सम्मानित करने के लिए दिया जाता है, जिन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में असाधारण योगदान दिया हो।

पुरस्कार की इस सूची में हर साल ऐसे प्रेरणादायी शिक्षको का नाम शामिल किया जाता है, जो अपने रास्ते में आये मुश्किलो की परवाह न करते हुए अपने छात्रो को उच्च स्तरीय शिक्षा देते रहे।

आईये जानते है इस साल पुरस्कृत किये गए शिक्षको की प्रेरणा भरी कहानियां

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Image for representation only. Source: Flickr

 

निवास सहवाले

मुम्बई के रहनेवाले निवास सहवाले, प्रभादेवी म्युनिसिपल स्कूल में उपाध्यापक है। निवास पिछले 26 साल से शिक्षा के क्षेत्र में है तथा अपने कई छात्रो को सुधरने में मदद कर चुके है। जब उन्हें इस बात का आभास हुआ कि पारंपरिक तरीके से गणित सिखाये जाने की वजह से बच्चे गणित समझ ही नहीं पा रहे है, तब उन्होंने गणित सिखाने का अपना अलग ही एक तरिका ढूंढ निकाला। निवास ने कुछ गणित की किताबे भी लिखी है। इतना ही नहीं वे एक स्वयं सेवी संस्था के साथ मिलकर ठाणे में रहनेवाले गरीब बच्चों को मुफ्त में गणित पढ़ाते है। इसके अलावा वे आदर्श रात्रि विद्यालय के प्रधानाचार्य भी है।

 

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डॉली हेनरी

डॉली हेनरी मुम्बई के वाणी विद्यालय नामक सरकारी स्कूल की प्रधानाचार्या है। डॉली यहाँ पिछले 30 सालो से पढ़ा रही है। यह एक सरकारी स्कूल होते हुए भी, कई कठिनाईयों के बावजूद, डॉली शिक्षको के लिए यहाँ लाभकारी सम्मेलन आयोजित करती है। वे इस स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों के अभिभावको को भी सेमिनार द्वारा जानकारियां देती रहती है। अपने कार्यक्षेत्र की सीमा में न होते हुए भी, वे बच्चों को सेक्स एजुकेशन यानी की यौन शिक्षा में भी उचित मार्गदर्शन करती है।

 

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शांताराम भोपाल जोगले

कर्णाटक के बेलगावी जिले के काब्बुर गाँव में स्थित सरकारी स्कूल, कनाडा मीडियम हाई स्कूल में शांताराम भोपाल जोगले एक व्यायाम प्रशिक्षक के तौर पर कार्यरत है। जब उनका चुनाव इस शिक्षक पुरस्कार के लिए हुआ तो उन्होंने अपने घरवालो के बजाये 5 दिव्यांग बच्चों को साथ ले जाने की इच्छा जाहिर की।

शांताराम एक लंबे समय से गरीब परिवार से आये विकलांग बच्चों की स्थिति सुधासरने में प्रयासरत है। वे इन बच्चों को स्वास्थ्य सेवाएँ, किताबे तथा दूसरे ज़रूरी सामान मुहैया कराने के साथ साथ इस बात का ख़ास ध्यान रखते है कि, उन्हें विकलांगो के लिए बनाये गए, सभी सरकारी योजनाओ का उचित लाभ मिले।

 

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एच. पी देवराजू

एच. पी देवराजू ने 1979 में कर्णाटक के चन्नारायपटना के प्राथमिक विद्यालय में पढ़ाना शुरू किया। अपने कार्यकाल में उन्होंने करीब 50 ऐसे बच्चों को पढाई पूरी करने में मदद की, जो स्कूल तक जाना छोड़ चुके थे। जब पुरस्कार की खबर मिली तो देवराजू के इन्ही छात्रो ने उन्हें मुबारकबाद देने के लिए खुद फोन किया। आज ये सभी छात्र अपनी ज़िंदगी में काफी तरक्की कर चुके है। पर भटके हुए बच्चों को राह दिखाने वाले देवराजु खुद अपनी माँ के गुज़रने के बाद पढाई छोड़ चुके थे। सातवी कक्षा के बाद स्कूल छोड़ चुके देवराजू को भी उनके एक शिक्षक ने दुबारा पढाई पूरी करने के लिए प्रेरित किया था।

 

बलजीत कौर

दक्षिण दिल्ली में स्थित प्रतिभा म्युनिसिपल स्कूल की कार्यकारी प्रधानाचार्य बलजीत कौर को भी शिक्षक दिवस पर पुरस्कृत किया जायेगा। हर साल जहाँ कई बच्चे इस स्कूल से अपना नाम कटा लेते थे, वहीँ बलजीत की लगन और कार्यकुशलता से आज हर बच्चा यहाँ से अपनी पढ़ाई पूरी करके ही निकलता है।

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“मुझे इस स्कूल की देखरेख करने के लिए भेजा गया था पर मेरे लिए ये समाज के लिए कुछ करने का एक मौका था,” उन्होंने टाइम्स ऑफ़ इंडिया से बातचीत के दौरान कहा।

 

आर सी पर्वथम्मा

13 साल पहले जब आर सी पर्वथम्मा बंगलुरु के एक  झुग्गी, काठन नगर में स्थित प्राथमिक सरकारी स्कूल से जुडी, तब यह स्कूल सिर्फ एक छप्पर नुमा ढांचे में चल रहा था। स्कूल में विद्यार्थी भी नाम मात्र ही थे। स्कूल की ऐसी दयनीय दशा देखकर एक बार तो पर्वथाम्मा का वहाँ से भाग जाने का मन किया पर फिर वे वहां के बच्चो की हालत को नज़रंदाज़ नहीं कर पायी। उन्होंने लोगो से मदद मांगी और पैसे इकट्ठे करके इस स्कूल की इमारत बनवाई। इतना ही नहीं धीरे धीरे स्कूल में शौचालय, टेबल, कुर्सियां और यहाँ तक की कंप्यूटर का भी इंतज़ाम किया गया।

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इस सम्मान के साथ साथ विजेता शिक्षको को एक मैडल, सर्टिफिकेट और रु. 50,000 की राशि भी इनाम के तौर पर दी जाती है।

इस शिक्षक दिवस पर समाज के रत्न, इन शिक्षको को प्रणाम !

मूल लेख – गायत्री दानु 


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