आवारा पशुओं की जिंदगियाँ बचा रहा है मैजिक कॉलर !

अँधेरे से भी एक अलग जंग होती है। कई बार गलती हमारी नहीं होती बल्कि अँधेरे की गिरफ्त में आकर अनजाने में ही हम किसी की जान ले लेते हैं। अनजाने में की गयी इन गलतियों का अफ़सोस हमें ज़िंदगी भर कचोटता है। ऐसा आपके साथ भी कई बार हुआ होगा कि रात में सडक पर लेटे या अचानक से सामने आये जानवर से टक्कर में उसकी जान चली गयी हो। और गलती न होते हुए भी आपको नुकसान भुगतना पड़ा हो।

अँधेरे से भी एक अलग जंग होती है। कई बार गलती हमारी नहीं होती बल्कि अँधेरे की गिरफ्त में आकर अनजाने में ही हम किसी की जान ले लेते हैं। अनजाने में की गयी इन गलतियों का अफ़सोस हमें ज़िंदगी भर कचोटता है। ऐसा आपके साथ भी कई बार हुआ होगा कि रात में सडक पर लेटे या अचानक से सामने आये जानवर से टक्कर में उसकी जान चली गयी हो। और गलती न होते हुए भी आपको नुकसान भुगतना पड़ा हो।

भारत में तकरीबन पांच लाख जानवर ऐसे हैं जो दिन-रात यूँ ही खुले में घूमते रहते हैं। इन्ही में से कई जानवर रात के अँधेरे में तेज चलते वाहनों की चपेट में आ जाते हैं और ऐसे हादसों का शिकार हो जाते हैं जिसमे उन्हें अपनी जान तक गवानी पड़ती है।

रात में सडक पर अचानक से गाड़ी के सामने आकर जानवर बेमौत मर जाते हैं। इन हादसों के शिकार जानवर ही नहीं बल्कि खुद गाडी में बैठे लोग भी हो जाते हैं। ये हादसे इतने अचानक होते हैं कि अक्सर ड्राइवर की भी कोई गलती नहीं होती। अचानक ही करीब दो चार सेकेण्ड में गाडी के सामने आ जाने से अनियंत्रित टक्कर हो जाने से इन जानवरों की जान चली जाती है और गाडी चलानेवाले को अफ़सोस भर रह जाता है कि काश थोड़ा पहले से पता होता तो ये ज़िंदगी बचाई जा सकती थी।

इसी काश को उम्मीद में बदला है चेन्नई की एक गैर सरकारी संस्था ‘पीपल फॉर कैटल इन इंडिया’ ने।

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इस संस्था ने एक सर्वे कराया जिसमें पता लगा कि नब्बे फीसदी गाडी चलाने वाले इन जानवरों को देख ही नहीं पाते और अचानक से सामने आये पशुओं पर गाड़ी चढ जाती हैं। न देख पाना एक बड़ी समस्या है और अगर सडक पर जानवर समय रहते दिख जाएँ तो उन्हें बचाया जा सकता है।

कहते हैं कि एक छोटी सी पहल कई जिंदगियां बचा सकती है। इस समस्या का समाधान इतना साधारण और सस्ता है कि आप भी इसे अपना कर इन बेजुबानों के साथ-साथ लोगों की भी जान बचा सकते हैं।

एनजीओ. पीपल फॉर कैटल इन इंडिया (PFCI) ने इन मासूम जानवरों को बचाने के लिए इस समस्या का समाधान ढूंढ निकाला है जो ना सिर्फ़ सस्ता है बल्कि कारगर भी है। इस एनजीओ ने ऐसे जानवरों के गले में ‘रिफ्लेक्टिव कॉलर’ लगाये हैं जो सडक पर दूर से गाडी की लाइट पड़ते ही चमक जाते है। इस से ड्राइवर को पता चल जाता है कि सडक पर कोई जानवर है और उन्हें सँभलने का वक़्त मिल जाता है।

ऐसे हादसे दुपहिया वाहनों के चालको लिए भी जानलेवा साबित होते हैं।

“ये हादसे मोटर साईकिल चालकों के लिए बेहद खतरनाक है क्योंकि जानवरों से टकराने के बाद मोटर बाइक सवार गिर पड़ते हैं या जानवरों को बचाने की कोशिश में फिसल कर किनारे की खाइयों में गिर जाते हैं”, PFCI के संस्थापक अरुण प्रसन्ना ने टाइम्स ऑफ़ इंडिया को बताया।

संस्था ने हाल ही में ३०० ‘रिफ्लेक्टिव कॉलर’ कुत्तों और गायों को लगाए है। ये कॉलर रिफ्लेक्टिव कपड़ों और सुरक्षित नायलोन टेप से बने है। 

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अरुण प्रसन्ना कहते हैं कि, “हमने इन कॉलरों को जमशेदपुर, पुणे और बेंगलोर में कुत्तों के गले में प्रयोग किया है और इस प्रयोग से उनकी जान बचाने में हमें बड़ी सफलता मिली है इसीलिए अब हम इसे अन्य पशुओं के लिए भी प्रयोग करने वाले हैं। ”

इस पहल को पशु प्रेमियों का समर्थन ही नहीं आर्थिक सहयोग भी मिल रहा है।

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ये पहल न सिर्फ़ मासूम जानवरों की जिंदगियां बचा सकती है, बल्कि हमारे लिए भी रात में सड़कों को सुरक्षित बना रही है। आप भी इस पहल से जुड़े और अपने शहर को रात में अँधेरे में भी सुरक्षित बनाए।

मैजिक कालर के बारे में अधिक जानकारी के लिए आप 098840 71136 पर संपर्क कर सकते है।

Featured image for representaiton only. Source: Hindustan Times, Mid-Day

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