बीजापुर जिल्हे के २८ वर्षीय गिरीश बद्रगोंड २००६ जब बंगलुरु आये, तब उनके साथ एक लैपटॉप, वायरलेस राऊटर और जेब में कुछ पैसे थे। आज ६ साल के बाद वो Santepp Systems कंपनी में पार्टनर है जो कृषी तकनीक उत्पादन क्षेत्र में नामांकित कंपनी है।

बद्रगोंड कहते है-

“बचपन से ही मुझे मशीनो में दिलचस्पी थी। एक दिन अपने चचेरे भाई की घडी मैंने पूरी तरह खोल दी और वापस जोड़ दी जिससे मुझे मशिनो से लगाव हुआ।”

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हम जब गिरीश के ऑफिस में गये तब लाइट्स आटोमेटिक ऑन हुये और बाहर निकलते ही ऑफ हो गये। अपने ऑफिस में लगाये हुये सेंसर के बारे बताते हुये उनकी आँखे चमक रही थी। उन्होंने कहा “आटोमेटिक लाइट्स से ६०% तक बिजली की बचत होती है।”

जब वो बंगलुरु आये तब उनके पास पैसे नहीं थे। कुछ दिन वो अपने दोस्त के साथ रहे और उसके बाद रूम शेयर करके रहने लगे। पुराने DTH ऐन्टेना की मदत से उन्होंने राऊटर को विकसित करके १० किमी तक की बैंडविड्थ बेचना शुरू किया और कुछ पैसा कमाया।

SSLC उत्तीर्ण हुये गिरीश आगे की पढाई ना कर सके, पर इसकी वजह से उनके सपने नहीं टूटे। वो जब हाईस्कूल में थे तबसे वो इन्वेर्टर, पॉवर सप्लाई जैसी इलेक्ट्रॉनिक चीजो पर प्रोजेक्ट्स करने लगे।

NABARD और NIF की मदत से Santepp Systems कंपनी कृषि उत्पादन क्षेत्र में प्रगति कर रहे है और किसानो के समस्याओ का निवारण कर रहे है।

ऐसे ही कुछ अविष्कारो के बारे आइये थोडा जानते है।

 बोरवेल स्कैनर

भूमिगत पानी का सर्वेक्षण करना आसान नहीं है। बोरवेल स्कैनर में एक कैमरा होता है जिसमे फ्लेश होता और जो १८० डिग्री में घूम सकता है। ये कैमरा फोटो खिंच सकता है और पानी के आने जाने का मार्ग भी बता सकता है।

बद्रगोंड कहते है-

“इस स्कैनर से पानी की स्थिरता का भी पता चलता है। अगर पानी स्थिर हो और अन्तर्वाह(इनफ्लो) नहीं है तो बोरवेल का काम नहीं करना चाहिये।”

बोरवेल स्कैनर की मदत से लीकेज और होल्स का भी पता चलता है।

एडवांस्ड मोड माइक्रो इरीगेशन सिस्टम (Advanced Mode Micro irrigation system)

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इस सिंचाई नियंत्रक से दूर रखे हुये पम्पस और वाल्वस नियंत्रित कर सकते है। इस मशीन से पानी का प्रवाह भी नियंत्रित कर सकते है और खेत में, पौधों को जरुरत के हिसाब से पानी दे सकते है। इस तरह से पानी की बचत होती है।

गिरीश कहते है-

“ज्यादा सिंचाई से कभी कभी फसल को ज्यादा पानी मिलता है जिससे फसल ख़राब भी हो सकती है पर ये मशीन सिंचाई नियंत्रित करके पानी की बचत करता है।“

सोलर सेंसर जमींन में स्थापित कर दिये जाते है जो नियंत्रक यूनिट को सिग्नल्स भेजते है जिससे ये यूनिट आटोमेटिक मोटर को पानी की जरुरत के हिसाब से ऑन और ऑफ़ करता है।

ये मशीन १० एकर तक सिंचाई में मदत करती है और जिसका खर्च सिर्फ १.५ लाख है। मशीन का बेसिक वर्जन भी है जो २००००-२५००० रुपये में मिलता है और २-३ एकर तक काम करता है।

बद्रगोंड जी ने इस सिस्टम का एंड्राइड ऐप भी तयार किया है। 

बर्ड रिपेलर (Bird Repeller)

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इस उपकरण में आठ स्पीकर्स है जिससे ये अलग अलग आवाज निर्माण करके पक्षियों को भगाते है। खेती बाड़ी गाव से दूर होते है इसलिये इस मशीन से निकली हुयी आवाजे लोगो को परेशान नहीं करती है। इसका यूनिट इलेक्ट्रिक पॉइंट के पास रहता है और बैटरी पर ३ दिन तक चलता है। 

अर्बन टेरेस गार्डनिंग (Urban Terrace Gardening)

अगर आप छुट्टियों में घर से बाहर जा रहे है इस उपकरण का इस्तेमाल कर सकते है। ये मशीन आपके गार्डन के पौधों को रोज नियमित समय पर पानी देता है। इसका मूल्य सिर्फ ५००० रुपये है।

हमने यहाँ पर गिरीश बद्रगोंड के बनाये हुये कुछ ही आविष्कार के बारे में जानने की कोशिश की है। अगर आप उनके आविष्कारो के बारे में अधिक जानना चाहते है तो उन्हें +९१ ९९०२१३३९९६ संपर्क कर सकते है या [email protected] पर ईमेल कर सकते है।


मूल लेख- श्रेया पारीक द्वारा लिखित।

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