मुंबई पुलिस में कार्यरत हवलदार तेजेश सोनावने के लिए 15 फरवरी 2016 का दिन किसी भी आम दिन की तरह ही गुज़र रहा था। अचानक उन्हें पता चला कि पास ही की एक इमारत पर कोई आदमी चढ़ गया है और वहां से कूद कर अपनी जान दे देने की धमकी दे रहा है।

इस बारे में जानकारी मिलते ही तेजेश फुर्ती से एक और पुलिसवाले के साथ उस इमारत की ओर भागे। घटनास्थल पर पहुँचने पर उन्होंने देखा कि 30 वर्षीय बिज्ञान संद पाइपलाइन के ऊपर रेंग रहे है। लोगो के लाख समझाने पर भी बिज्ञान निचे आने को तैयार नहीं हो रहे थे। वो लोगो को ये कहकर धमका रहे थे कि अगर उन्होंने किसी पुलिसवाले को पाइप पर चढ़ते देखा तो वो तुरंत कूद जायेंगे।

खुशकिस्मती से तेजेश उस दिन अपने पुलिस की वर्दी पहने हुए नहीं थे और इसलिए उन्होंने पाइप पर चढ़ना शुरू कर दिया और आखिर बिज्ञान को वहाँ से सही सलामत बचाकर ले आये।

इस कहानी का सुखद अंत तब हुआ जब इस साल गणतंत्र दिवस पर तेजेश को इतनी बहादुरी से बिज्ञान को बचाने के लिए राष्ट्रपति पुरस्कार मिला।

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Image for representation. Source: Facebook

इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए तेजेश ने बताया कि घटनास्थल पर पहुँचने पर उन्होंने बिज्ञान के साथ बहुत एहतियात के साथ बात की। उन्होंने बिज्ञान को समझाते हुए उनसे पूछा कि क्या वो किसीसे बात करना चाहते है? इस पर बिज्ञान ने अपने भाई से बात करने की इच्छा व्यक्त की। पर बिज्ञान के अपने भाई से बात करने का भी कोई फायदा नहीं हुआ क्यूंकि वो उसके बाद भी पाइप पर चढ़ने लगा।

ऐसे में तेजेश ने बिज्ञान के भाई से खुद भी बात की। बिज्ञान के भाई फ़ोन पर इस बात की गुहार लगा रहे थे कि तेजेश किसी भी तरह उनके भाई को बचा ले। दूसरी तरफ मुंबई पुलिस पूरी कोशिश में थी कि वो बिज्ञान तक पहुँच सके। पर वो इस बात से भी डर रहे थे कि कहीं बिज्ञान तैश में आकर कूद न जाये।

आखिर एक समय ऐसा आया जब बिज्ञान ने अपनी जैकेट उतारी और अपनी आँखों पर बाँधने लगा पर जब ऐसा नहीं हो पाया तो उसने जैकेट को हवा में उछाला और फिर अपनी आँखे बंद करके हाथ जोड़कर प्रार्थना करने लगा। यही वो मौका था जब तेजेश ने तुरंत बिज्ञान को खींचा और सुरक्षित स्थान पर ले आये।

अपनी इसी बहादुरी और सूझ बुझ के साथ एक व्यक्ति की जान बचाने के लिए हवलदार तेजेश को इस साल गणतंत्र दिवस के अवसर पर राष्ट्रपति के हाथो से जीवन रक्षा पदक देकर सम्मानित किया गया।

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