जिस दिन किसी घर के आँगन में कोई नन्ही सी कली खिलती है, उसी दिन से पिता उसकी शादी के लिए धन पाई-पाई जोड़ना शुरू कर देता है। पर अहमदाबाद में एक ऑटोरिक्शा ड्राईवर पिता ने इस सोच को बदल दिया है। उन्होंने बेटी की शादी से ज़्यादा उसके सपनों को सच करना ज़रूरी समझा।

अहमदाबाद के एक ऑटोरिक्शा ड्राईवर, मनीलाल गोहिल ने अपनी बेटी मित्तल के निशानेबाज़ी के जूनून को पूरा करने के लिए, उसकी शादी के लिए जमा किये धन से उसके लिए 5 लाख की राइफल खरीद दी।

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जब वो बन्दूक का लाइसेंस बनवाने स्थानीय कमिश्नर के ऑफिस गए तो वहां मौजूद पुलिस वाले उनके इस कदम से बहुत ही आश्चर्यचकित और प्रसन्न हुए और मनीराम की सराहना की और लाइसेंस के लिए ज़रूरी मंजूरी दिलाने में मदद की।

 
मित्तल जो अपने माता पिता और भाई के साथ अहमदाबाद में गोमतीपुर चॉल में रहती हैं, एक राष्ट्रीय स्तर की निशानेबाज़ हैं। निशानेबाज़ी से उनका जुड़ाव 4 साल पहले हुआ जब वो शहर के ही राइफल क्लब में गयी और वहाँ उन्होंने कुछ निशानेबाज़ों को निशाना लगाते देखा।

 
सबसे बड़ी बात तो ये कि इतनी गरीबी और सीमित संसाधनों के बावजूद मनीराम ने उसके इस ख़र्चीले शौक को सीखने की इच्छा का आदर किया। मनीराम एक ऐसे इंसान हैं, जो अपने परिवार का पेट पालने के लिए बहुत मेहनत करते हैं।

 
मनीराम ने अपनी बेटी को निशानेबाज़ी सीखने के लिये क्लब में भर्ती करा दिया, जहाँ वो एक किराये की रायफल से अभ्यास करती थी। ट्रेनिंग के शुरुवात में ही उसने राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में कांस्य पदक जीता, तभी उसके खेल के प्रति सहज रुझान का पता चल गया था।

 
मित्तल के लिए अगली चुनौती थी अपनी खुद की रायफल खरीदना जिससे कि उनकी ट्रेनिंग सुचारू रूप से चलती रहे और वो अंतर्राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में भाग ले सकें।
उसके गरीब स्नेहिल पिता और भाई के लिए 50 मीटर मारक क्षमता वाली जर्मन रायफल खरीदने के लिए धन जुटाना मुश्किल काम था।

 
ऐसे समय में मनीराम ने फैसला किया कि अपनी बेटी की शादी के लिये पैसे बचाने से ज़्यादा ज़रूरी है उसके सपनों को पूरा करना। मनीराम ने मित्तल की शादी के लिए बचाये धन से उसके लिये एक रायफल खरीद दी।

 
6 महीने की कड़ी मेहनत और परिवार के लोगों द्वारा बचाये गए धन से, आज मित्तल के पास अपनी खुद की एक नयी जर्मन रायफल है। इसकी 1 बुलेट (गोली) 31 रूपये की आती है और अगर मित्तल किसी टूर्नामेंट में भाग लेती हैं तो कम से कम 1000 राउंड गोलियों की ज़रुरत पड़ेगी। मित्तल टूर्नामेंट में भाग लेना चाहती हैं। उसकी यात्रा में भी खासी लागत लगेगी , इसलिए परिवार का संघर्ष अभी ख़त्म नहीं हुआ हैं।

मित्तल ने टाइम्स ऑफ़ इंडिया को बताया कि, “मेरे पिता और मेरे परिवार ने मेरे महंगे शौक को पूरा करने के लिए बहुत से त्याग किये हैं। अब इस राइफल के मिलने के बाद मैं अंतर्राष्ट्रीय स्तर में भाग लेने और अपने देश का प्रतिनिधित्व करने के लिए कड़ी मेहनत करूंगी।“

 

मूल लेख – निशि मल्होत्रा


 

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