अक्सर सुनने में आता है कि मुसलमानों के जुलूस में हिन्दू बस्ती में तनाव यही या फिर हिन्दुओं की शिव बारात में मुस्लिम बस्ती उबल रही है। लेकिन विश्व के सबसे बड़े धार्मिक समारोह में डूबे उज्जैन की फ़िज़ा में कुछ और ही गूँज रहा है। जहां विश्व इकठ्ठा हो रहा है वहां हर धर्म अपने हाथ उठाये हर संभव सहयोग के लिए खड़ा नजर आ रहा है।
ज्जैन में हिन्दुओं के सबसे बड़े मेले सिंहस्थ कुम्भ में आये दिन आंधी बारिश से होने वाली आस्था में परेशानी से उज्जैन की मस्जिदें श्रृद्धालुओं को ठिकाना दे रही हैं। कुम्भनगरी में उमड़ी भीड़ के लिए  मस्जिदों ने अपने दरवाजे खोल दिए हैं। लाखों की संख्या में जुटे देश विदेश के भक्तों के लिए शहर की कई मस्जिदें धर्मशाला बन गई हैं। जहां न सिर्फ ठहरने की व्यवस्था है बल्कि खाने पीने का प्रसाद भी मिल रहा है।
आपने हिन्दू मुश्लिम भाईचारे के अनगिनत उदाहरण देखे और सुने होंगे। त्योहारों पर एक दूसरे से गले मिलने से लेकर मुसीबत में एक दूसरे की सहायता तक। लेकिन ये कहानी हमें धर्म शब्द के वास्तविक अर्थ तक ले जाती है। धार्मिक सद्भावना का ये अनूठा उदहारण है।
पिछले हफ्ते कुम्भ के मेले में लगातार आंधी और भरी बारिश में कुछ जानें चली गईं और कई तम्बू तहस नहस हो गए जिससे भारी संख्या में जुटे लोगों के ठहरने की समस्या कड़ी हो गई।

ऑल इंडिया मुस्लिम तेहवार कमेटी के मुखिया डॉ औसफ शाहमीरी खुर्रम ने मुस्लिम समुदाय के लोगों से मस्जिदों के दरवाजे हिन्दू श्रृद्धालुओं के लिए खोलने के लिए पूछा और मुस्लिम समुदाय इस काम में खुद उनके साथ खड़ा हो गया।

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शिप्रा नदी के घाटों के किनारे भी कुछ मुस्लिम युवक हर वक़्त तैनात रहते हैं जो लोगों को बारिश के बाद फिसलन वाले घाटों पर नहाने को लेकर सतर्कता बरतने की चेतावनी देते रहते हैं। इतना ही नहीं उन्होंने कई श्रृद्धालुओं को डूबने से भी बचाया है। इस नयी पीढ़ी की इस सोच को हम सलाम करते हैं। इन्हें देखकर ही लगता है की भविष्य में धर्म फिर से मानव जीवन की उन्नति के लिए अपनी पवित्रता बचाए रखने में सफल रहेगा।

महिलाओं और बच्चों समेत सैकड़ों श्रृद्धालु तोपखाना क्षेत्र की हरी मस्जिद में ठहरे हुए हैं।

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यही नज़ारा उज्जैन की जमातखाना और सोडगिरन मस्जिदों में देखने को मिल जायेगा। जहां हिन्दू श्रृद्धालुओं की हरसंभव सहायता में मुस्लिम लोग हंसी-ख़ुशी लगे हुए हैं। माहौल इतना खुशनुमा है जैसे अल्लाह और ईश्वर बड़े दिनों बाद तसल्ली से बैठे गप्पें लड़ा रहे हों।
 इसे देखकर यकीन होता है कि हर धर्म का एक ही उद्देश्य है मानव-सेवा। मानव जीवन को मुश्किलों से उबारकर सर्वशक्तिमान की ओर ले जाना। हर धर्म में स्पष्ट और कई रूपों में लिखा है कि जरूरत के वक़्त एक दूसरे के काम आना ही धर्म का पहला सन्देश होता है.

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