झारखंड की राजधानी रांची में २३  जनवरी २०१६ की सुबह, रक्षा मंत्री श्री मनोहर पार्रिकर ने देश का सबसे ऊंचा तिरंगा फहरा कर, इसे जनता को समर्पित किया। रांची के पहाड़ी मंदिर पर स्थित इस देश के सबसे ऊंचे तिरंगे के फ्लैगपोल की ऊचांई २९३ फीट है, वहीं राष्ट्रध्वज ९९ x ६६ फीट का है। भारत में रांची से  पहले सबसे ऊंचा तिरंगा हरियाणा के फरीदाबाद में था।

सुभाष चंद्र बोस की जयंती के अवसर पर, श्री मनोहर पर्रिकर ने देश के सबसे ऊंचे एवं विश्व के पांचवे सबसे ऊंचे राष्ट्रध्वज को फहरा कर पूरे देश को गौरवान्वित किया। हजारों स्कूली बच्चों की उपस्थिती में राष्ट्रध्वज को फहराते हुए रक्षामंत्री मनोहर पर्रिकर, झारखंड के मुख्यमंत्री रघुवर दास एवं राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू सहित हर कोई गौरवान्वित महसूस कर रहा था। झंडोतोलन के समय आसमां से फूलों की बारिश की गई।

भारत के सबसे ऊंचे तिरंगे की जमीन से ऊँचाई करीब ४९३ फीट है, ९९ फीट का राष्ट्रध्वज है तथा इसका वजन ६० किलोग्राम है। यहां २४ घंटे तिरंगा लहराएगा इसके लिए रात में २० सोडियम वेपर लाइट लगाया गया है।

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पहाड़ी मंदिर समिती के लोग पिछले छह महीने से दिन रात काम कर रहे थे, तब जाकर रांची में देश के सबसे ऊंचे झंडे का सपना पूरा हो सका।

झारखंड का पहाड़ी मंदिर देश का इकलौता ऐसा मंदिर है जहां १५ अगस्त और २६ जनवरी को तिरंगा फहराया जाता रहा है, बताया जाता है कि सन १९४७ से रांची के पहाड़ी मंदिर में तिरंगा फहराने की प्रथा है। और अब २४ घंटे देश का सबसे ऊंचा तिरंगा यहां की शान बढ़ाएगा।

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रांची के मोरहाबादी मैदान में हुए उद्घाटन कार्यक्रम में दस हजार से ज्यादा बच्चे शामिल हुए।

टीबीआई से बात करते हुए कस्तूरबा गांधी स्कूल की बालिका रंजू ने बताया –

“आज हमें गर्व महसूस हो रहा है , हमारे रांची में देश का सबसे ऊंचा तिरंगा है, जिसे हम कभी झुकने नहीं देंगे।”

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एनसीसी कैडेट के रूप में सेंट जेवियर कॉलेज के मौजूद एक छात्र कुमार अंकुर ने बताया  –

“अब रांची भी देश के टूरिस्ट मैप पर आ जाएगा, तिरंगा हमारी शान है, हमें कई महीनों से इस दिन का इंतजार था, आज रांची का हर इंसान खुश है और हम सभी गौरवान्वित है और यक्षण ऐतिहासिक था जिसके गवाह हम सब बने।”

रांची के पहाड़ी मंदिर पर जहां ऐसी मान्यता है कि अंग्रेजों के समय में रांची के इस पहाड़ी पर देशभक्तों को फांसी दिया जाता है। उसी पहाड़ी पर अब देश का सबसे ऊंचा तिरंगा लहरा रहा है। प्रोटोकोल के मुताबिक अंधेरे में राष्ट्रध्वज को नहीं रखा जाता है इसलिये 24 घंटे आकाश में करोड़ों धड़कनों की जान के रूप में लहरा रहे इस तिरंगे के लिए विशेष रौशनी की भी व्यवस्था की गई है।
रांची ही नहीं पूरे झारखंड से लोग इसे देखने आ रहे है और देश के इस सबसे ऊंचे राष्ट्रध्वज को सलाम कर रहे है।
तिरंगे के ध्वजारोहण के बाद मानो रांची में गणतंत्र दिवस की खुशबू पहले ही फैल गई है, लोग देशभक्ति के रंग में ओत प्रोत होकर तिरंगे के दर्शन को मानो बेकरार है।

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