जिस तरह शबरी के बेर खाकर भगवान् श्री राम ने बरसो पुरानी रुढ़िवादी परंपरा को मिटाया था, ठीक उसी तरह बिहार के एक मजिस्ट्रेट ने अंधविश्वास मिटाने के लिए एक विधवा के हाथो का बना खाना खाया और लोगो के सामने एक मिसाल खड़ी की।

सुनीता कंवर उन छः रसोईयों में से एक है, जो कल्यानपुर, बिहार के सरकारी स्कूल में ७०० बच्चो के लिए मिड-डे-मील पकाती है। पर पिछले २१ महीनो से अपनी नौकरी बचाए रखने के लिए उन्हें कडा संघर्ष करना पड़ रहा है। कारण – क्यूंकि वे एक विधवा है।

“हम एक विधवा के हाथो अपने बच्चो का खाना नहीं बनवा सकते। ये अपशगुन होता है।“ – The Telegraph के मुताबिक कल्यानपुर के एक  गांववाले  का ये कहना था

सुनीता के खिलाफ गांववालों के इस विरोध के बारे में सबसे पहले डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट (डीएम्) राहुल कुमार ने ट्वीट किया। 

इसके बाद एक दिन, इस बेतुके अंधविश्वास को मिटाने के लिए राहुल कुमार स्वयं सरकारी स्कूल गए और वहां के बच्चो के साथ सुनीता देवी के हाथो से बनाया हुआ खाना खाया।

विवाह के तीन वर्ष के भीतर ही सुनीता देवी के पति की मृत्यु हो गयी थी। कम उम्र में ही विधवा होने की वजह से उन्हें तरह तरह की मुश्किलों का सामना करना पडा था। ऐसे में डीएम से मिली मदद से उन्हें अब जीने की नयी राह मिली है।

dm widow cook

सुनीता देवी को भविष्य में भी किसी मुश्किल का सामना न करना पड़े इसके लिए डीएम् राहुल कुमार ने ये सुचना भी जारी की, कि सुनीता देवी को धमकाने या डराने वालो के खिलाफ सख्त कानूनी कार्यवाही की जायेगी क्यूंकि इस तरह के भेदभाव की हमारे संविधान में कोई जगह नहीं है।

इस घटना से पहले परेशान सुनीता देवी ने, पंचायत, सरकारी स्कूल के प्रिंसिपल तथा ब्लाक मिड डे मील के संस्थापक से भी मदद की गुहार लगाई थी। पर गाँव वालो के विरोध के आगे उन सभी ने अपने हाथ खड़े कर दिए थे। जब कोई और रास्ता नहीं बचा तब सुनीता देवी ने डीएम राहुल कुमार से मदद मांगी जो उन्हें मिली भी।

“हम आज बहुत खुश हैं” – मुस्कुराते हुए सुनीता देवी ने कहा !

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