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शहर में आरामदायक जीवन और अच्छी नौकरी छोड़कर आदिवासी क्षेत्रों में लोगों को रोजगार दे रहे हैं पंकज घाटगे और अमृता शिंदे!
पंकज पहले मुंबई में एक एडवरटाइजिंग कंपनी के लिए काम करते थे, और अमृता भी एक टीचर थीं। एक बार जब वे नासिक के एक गांव में घूमने गए तो उन्होंने देखा कि इस आदिवासी गांव में लोगों के पास कोई स्थायी काम नहीं था।
गांव वालों को काम देने के इरादे से पंकज और अमृता ने 3 एकड़ ज़मीन खरीदी और स्थानीय लोगों से यहाँ साबुन, शहद और मिट्टी के बर्तन जैसी चीज़ें बनवाकर उन्हें रोज़गार देना शुरू किया। लेकिन इससे कुछ ख़ास बदलाव नहीं आया!
इसलिए 2018 में पंकज ने अपनी नौकरी छोड़कर इन्हीं लोकल लोगों की मदद से यहाँ एक फार्म स्टे बनाने का फैसला किया।
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इसे बनाने के लिए उन्होंने केवल आस-पास मिलने वाली नेचुरल चीज़ों का इस्तेमाल किया।
कोरोना के दौरान अमृता भी अपनी नौकरी छोड़ गांव में जा बसीं और इस पारंपरिक तुमदार घर को सजाने में उन्होंने मदद की।
वादियों और तालाब से घिरे इस खूबसूरत होम स्टे में आज मुंबई और पुणे जैसे आस-पास के शहरों से बहुत से लोग प्रकृति के करीब रहने का अनुभव लेने आते हैं, जो शहर में नहीं मिल पाता है।
पंकज और अमृता के इस फार्म स्टे की वजह से अब कई गांव वालों को भी एक नियमित रोज़गार मिल रहा है। गांव के कई परिवारों के लोग आज Awata फार्म स्टे में काम करते हैं।
आरामदायक शहरी ज़िंदगी छोड़ गांव के लोगों के बारे में सोचना और उनके लिए नए अवसर पैदा करने का पंकज और अमृता का यह प्रयास वाकई सराहनीय है!
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