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अनमोल इंडियंस

Inspiring Indians Stories To Motivate From India. \ भारत के उन प्रेरक नायक नायिकाओं की कहानियां, जो अपने काम से भारत को बेहतर से बेहतरीन बनाने में जुटे हैं!

30 सालों तक लगाते रहे पौधे और जीवित कर दिया गाँव का सूखा झरना

By निशा डागर

उत्तराखंड के बागेश्वर जिले में सिरकोट गाँव के रहने वाले 55 वर्षीय जगदीश चंद्र कुनियाल ने पिछले 30 सालों में लगभग 15000 पेड़-पौधे लगाकर, गाँव के पुराने झरने को एक बार फिर से जीवित कर दिया है।

मुंबई: मुफ्त 'डिजिटल हियरिंग एड' प्रदान कर, संवारा 1300 से ज्यादा दिव्यांग बच्चों का जीवन

By निशा डागर

मुंबई की रहने वाली ऑडियोलॉजिस्ट और स्पीच थेरेपिस्ट, देवांगी दलाल ने साल 2004 में, ईएनटी सर्जन, डॉ. जयंत गाँधी के साथ मिलकर 'जोश फाउंडेशन' की शुरुआत की। जिसके जरिए, वे 1300 से ज्यादा जरूरतमंद बच्चों को मुफ्त में 'डिजिटल हियरिंग एड' उपलब्ध करा चुके हैं।

कैंसर से छूटा अपनों का साथ, पर नहीं मानी हार, अब किसानों को जोड़ रहे जैविक खेती से

By निशा डागर

अमृतसर, पंजाब के रहने वाले 60 वर्षीय गुणबीर सिंह ने किसानों को जैविक खेती से जोड़ने और उनकी मदद करने के लिए ‘दिलबीर फाउंडेशन' की शुरुआत की।

ओडिशा की मधुमिता अग्रवाल बनीं, भारतीय EV मैन्युफैक्चरिंग कंपनी की पहली महिला को-फाउंडर

By पूजा दास

करोड़ों का राजस्व अर्जित करने वाली टेक्नोलॉजी और इनोवेशन कंसल्टिंग फर्म ‘IPexcel’ की स्थापना के बाद, ओडिशा की मधुमिता अग्रवाल अब अपने पति दिनकर अग्रवाल के साथ, एक इलेक्ट्रिक वाहन कंपनी ‘OBEN’ का नेतृत्व कर रही हैं।

E-Waste to Eco-Art: बेकार पड़े गैजेट्स से बना दी पेंटिंग, ज्वेलरी, घड़ी जैसी चीजें

By निशा डागर

बेंगलुरु में रहने वाले 58 वर्षीय विश्वनाथ मल्लाबादी एक इको-आर्टिस्ट हैं, जो पिछले आठ सालों से इलेक्ट्रॉनिक कचरे को अपसायकल करके ज्वेलरी, पेंटिंग, मिनी बिल्डिंग, डमी रोबोट आदि बना रहे हैं।

नेकी की मिसाल: गरीब छात्रों की शिक्षा के लिए, यह बस कंडक्टर देता है हजारों का योगदान

By निशा डागर

आंध्र प्रदेश के कदिरी में, आरटीसी बस डिपो के एक बस कंडक्टर थोटा श्रीधर, हर साल गणतंत्र दिवस के मौके पर ‘जिला परिषद हाई स्कूल’ में गरीब छात्रों की मदद के लिए, 20 से 25 हजार रुपये का आर्थिक योगदान करते हैं।

जानिये कैसे इस ग्रीन वॉरियर ने कचरे से भरी झील को किया साफ, लगाए 8000+ पेड़-पौधे

By निशा डागर

मुंबई में रहने वाले धर्मेंद्र कर, एक पर्यावरण संरक्षक हैं। उन्होंने ओडिशा और मुंबई में, अब तक 8000 से ज्यादा पेड़-पौधे लगवाए हैं और मुंबई की खारघर झील को साफ करके संरक्षित किया है। इसके लिए, उन्हें 'वाटर हीरो 2020' पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया है।

महिला IAS ऑफिसर की पहल, असम में पुरानी और बेकार 8000 प्लास्टिक की बोतलों से बनाया शौचालय

By निशा डागर

IAS डॉ. लक्ष्मी प्रिया एम एस के निर्देशन में असम के बोंगाईगांव जिले में, पर्यावरण के अनुकूल कई योजनाओं पर काम किया जा रहा है, जैसे- सौर स्ट्रीट लाइट लगाना, कचरे का प्रबंधन आदि। इसके साथ ही, उन्होंने 8000 बेकार प्लास्टिक की बोतलों से, एक सार्वजनिक शौचालय का निर्माण भी कराया है।

मेरठ के छात्रों का जुगाड़, अब भगवान् शिव पर चढ़ने वाले दूध से भर रहा है ज़रूरतमंदों का पेट

By प्रीति महावर

मेरठ के एक 24 वर्षीय छात्र, करण गोयल ने, अपने पांच दोस्तों के साथ मिलकर, सिर्फ 2500 रूपये में एक ऐसा उपकरण तैयार किया है, जो लगभग 150 लीटर दूध बचाने में मदद करता है।

होम स्टे के ज़रिये बचाया विलुप्त हो रहे हिम तेंदुओं को, दो लद्दाखियों की अद्भुत कहानी

By द बेटर इंडिया

दो लद्दाखी वन्य जीव संरक्षकों की बदौलत आज हिम तेंदुओं का अस्तित्व है। उन्होंने हिम तेंदुओं को होम स्टे के ज़रिये कैसे बचाया, यह उसकी रोचक कहानी है।