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60 की उम्र में आविष्कार! बेटी की पुरानी साइकिल को सोलर से चलने वाली EV में किया तब्दील

पेशे से रजिस्ट्री कार्यालय में कॉपी राइटर का काम करनेवाले नदिया (पश्चिम बंगाल) के चंदन विस्वास पहले रेडियो मैकेनिक का काम करते थे। विज्ञान के प्रति अपने लगाव के कारण उन्होंने हाल ही में खुद से अपने लिए एक EV बनाई है, जो सोलर पैनल की मदद से बिना किसी खर्च के चलती है।

पेट्रोल-डीज़ल के दाम आसमान छू रहे हैं,  ऐसे में इलेक्ट्रिक वाहन खरीदना सबके लिए अच्छा विकल्प बन गया है। लेकिन एक आम इंसान के लिए इलेक्ट्रिक वाहन को अपनाना थोड़ा चुनौती भरा काम है। इसके महंगे दाम से लेकर चार्जिंग जैसी कई समस्याएं, अभी भी लोगों को EV अपनाने से रोक रही हैं। ऐसे में पश्चिम बंगाल के नदिया जिले के एक छोटे से गांव में रहनेवाले 60 वर्षीय चन्दन विस्वास ने अपने ऑफिस आने जाने की समस्या का समाधान खुद ही निकाल लिया है और अपने गांव में अपनी बनाई सोलर साइकिल के कारण काफी मशहूर भी हो गए हैं। 

द बेटर इंडिया से बात करते हुए चन्दन कहते हैं, “मैं कहीं भी साइकिल लेकर निकलता हूँ, तो लोग रोककर इसके बारे में पूछते हैं। गांव में कई लोगों को ऐसी साइकिल लेने का मन करता है, जिसे मुफ्त में आसानी से चलाया जा सके। लेकिन इसकी कीमत के कारण हर कोई इसे नहीं खरीद सकता।”

चन्दन, अपने घर से ऑफिस और ऑफिस से घर तक 24 किमी के सफर को खुद की बनाई सोलर साइकिल से ही तय करते हैं। 

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कैसे आया सोलर साइकिल बनाने का ख्याल ?

Chandan Viswas With His Solar Cycle
Chandan Viswas With His Solar Cycle

चंदन का ऑफिस उनके घर से करीब 10 किमी दूर, करीमपुर में है। करीबन तीन साल पहले चन्दन अपने घर से एक किमी दूर बस स्टैंड जाते थे, फिर वहां से बस से ऑफिस जाया करते थे। लेकिन उनके मन में हमेशा ऐसा ख्याल आता था कि क्यों न एक स्कूटर खरीद लूँ? 

लेकिन बढ़ते पेट्रोल के दाम देखकर उन्हें बस से जाना ही सही लगता था। अब से तीन साल पहले जब हर जगह इलेक्ट्रिक वाहन के बारे में बातें होनी शुरू हुईं, तो चन्दन को इलेक्ट्रिक वाहन, एक अच्छा यातायात का साधन लगा।  

अब इसे कहां से लें, कैसे चार्ज करें? जैसे कई सवाल उनके मन में आने लगे। फिर उन्होंने घर पर ही कुछ प्रयोग करना शुरू किया और अपनी बेटी की पुरानी साइकिल को इलेक्ट्रिक साइकिल में बदलने का फैसला किया। उन्होंने एक मोटर और लिथियम आयरन बैटरी की मदद से उस साइकिल को इलेक्ट्रिक वाहन में बदल दिया।

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यह साइकिल चार्ज बैटरी की मदद से आराम से चलती थी। लेकिन कभी लम्बी दूरी तय करनी हो, तो  बैटरी चार्ज करना मुश्किल हो जाता था। चन्दन कहते हैं, “मेरी इलेक्ट्रिक साइकिल में लम्बी दूरी पर कभी-कभी चार्ज ख़त्म होने का डर रहता था। इसलिए मैंने सोचा कि क्यों न इसमें सोलर पैनल लगाया जाए!”

इस सोलर साइकिल को बनाने में कितना आया खर्च?

चंदन ने अपनी साइकिल में 24/165W का सोलर पैनल लगवाया। उन्होंने सोलर पैनल पांच हजार में खरीदा और बैटरी करीबन नौ हजार में। साथ ही उन्होंने इसमें एक किट भी रखी है। सोलर पैनल को उन्होंने इतने बेहतरीन ढंग से अपनी साइकिल में फिट करवाया है कि यह उन्हें धूप से भी बचाने का काम करता है। 

इस पैनल से उनकी साइकिल का लुक ही बदल गया। एक पतली सी लेडीज़ साइकिल को जब वह बिना पैडल मारे चालाते हैं, तो देखने वाले उन्हें और उनकी साइकिल को देखते ही रह जाते हैं। चन्दन कहते हैं कि इस साइकिल को बनाने में उन्हें कुल 19 हजार का खर्च आया, जबकि बाजार में यह साइकिल इससे दोगुने दाम में भी नहीं मिलती।  

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कभी गरीबी के कारण छोड़नी पड़ी थी विज्ञान की पढ़ाई 

solar cycle invented by chandan viswas converted daughters cycle into e cycle
Chandan going office

दरअसल, चन्दन एक बेहद ही गरीब परिवार से ताल्लुक रखते हैं। उनके पिता घर चलाने के लिए कीर्तन करने का काम करते थे। बचपन में चन्दन को विज्ञान विषय में काफी रुचि थी। लेकिन बारहवीं तक विज्ञान पढ़ने के बाद, उन्हें आर्थिक समस्या के कारण आर्ट से ग्रेजुएशन करना पड़ा। हालांकि उनका दिमाग हमेशा से ही कुछ बनाने या फिर मशीनों में ही उलझा रहता था। 

उन्होंने कुछ समय तक अपनी रुचि के करण रेडियो और टीवी मैकेनिक का काम भी किया। लेकिन कॉपी राइटर की नौकरी मिलने के बाद, उन्होंने यह काम छोड़ दिया था। 

चन्दन कहते हैं, “मुझे मशीनों में रुचि है और इस तरह का काम करना मुझे पसंद है। इलेक्ट्रिक सोलर साइकिल बनाते समय भी मैं हर दिन ऑफिस से घर आकर काम करता था। इस तरह मैंने दो महीने में इसे बनाकर तैयार किया था।”

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चन्दन अभी एक आविष्कार करके रुके नहीं हैं, आने वाले समय में वह हवा में मौजूद तरंगों के वोल्टेज को इस्तेमाल करके भी कुछ बनाने के बारे में सोच रहे हैं। चन्दन ने अपने जीवन को आसान बनाने के लिए, जिस तरह से अपने हुनर का इस्तेमाल किया है, वह कमाल ही है। 

संपादन-अर्चना दुबे

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