राजस्थान के उदयपुर के रहने वाले गमेर सिंह राणावत और नीलेश जांगिड़ सोलर एनर्जी के विषय में यूट्यूब वीडियो बनाने का काम करते हैं, लेकिन कुछ दिन पहले उन्हें कुरियर द्वारा गलती से पाँच लैपटॉप मिले, जिसकी कीमत 7.5 लाख रुपए थी, लेकिन उन्होंने अपनी ईमानदारी का परिचय देते हुए इसे तुरंत लौटाने का फैसला किया।
झारखंड के देवघर में रहने वाले कृष्ण कुमार कन्हैया ने अपने 20 वर्षों के पत्रकारिता कैरियर ने दौरान, अन्न दाता, समय चौपाल जैसे कई लोकप्रिय कृषि आधारित कार्यक्रमों को चलाया है। लेकिन, जब उन्हें लगा कि किसानों की बेहतरी के लिए उन्हें कुछ अलग पहल करनी चाहिए, उन्होंने अपनी नौकरी छोड़ी और लग गए किसानों को नई राह दिखाने में।
संपत, पिछले 6 वर्षों से बेंगलुरू के जक्कुर इलाके में रहते हैं, लेकिन यहाँ जल आपूर्ति की सुविधा नहीं थी। ऐसी स्थिति में, उन्होंने बोरबेल या टैंकर से पानी उपलब्ध करने के बजाय, इंटरनेट से जानकारी हासिल कर DIY विधि से रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम को विकसित करने का फैसला किया।
आज उत्तराखंड में खेती-किसानी के क्षेत्र में दिव्या का एक जाना-माना नाम है। लोग उन्हें ‘मशरूम गर्ल’ के नाम से जानते हैं। खेती कार्यों में उनके उल्लेखनीय योगदानों के लिए साल 2016 में उन्हें भारत के तत्कालीन राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी द्वारा नारी शक्ति पुरस्कार से भी सम्मानित किया जा चुका है।
समाज में माहवारी को लेकर हमेशा ही एक दकियानूसी सोच रही है, लेकिन उत्तर प्रदेश के रहने वाले महेश खंडेलवाल ने देश के गरीब महिलाओं के लिए न सिर्फ सस्ता और पर्यावरण के अनुकूल सेनिटरी नैपकिन बनाने का जिम्मा उठाया, बल्कि आर्थिक सबलता प्रदान करने के लिए उन्हें तकनीकी रूप से सक्षम भी बना रहे हैं।