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एक्सपर्ट सलाह: 100+ परिवारों वाली सोसाइटी कैसे बना सकती है कचरे से कई किलो खाद!

खाद बनाने के लिए बेस्ट हैं ये तीन तरीके, न बदबू आएगी, न कीड़े लगेंगे और न ही खर्च होंगे ज्यादा पैसे!

कुछ समय पहले हमें पश्चिम बंगाल में सिलीगुड़ी की क्लब टाउन वेलफेयर सोसाइटी के निवासी, जगदीश चंगिया का ईमेल मिला। उनकी सोसाइटी में लगभग 100 परिवार रहते हैं और वह जानना चाहते हैं कि सोसाइटी के कचरे को इकट्ठा करके वह कैसे वर्मीकम्पोस्ट बना सकते हैं।

उनकी समस्या का समाधान करने के लिए हमने सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट राउंड टेबल, बंगलुरु की मुख्य सदस्य और एक पत्रकार, सविता हिरेमठ से बात की।

उन्होंने हमें बताया कि सोसाइटी के लिए वर्मीकम्पोस्टिंग सबसे अच्छा समाधान नहीं है। वह बताती हैं कि लोगों के लिए किचन से निकलने वाले कचरे को बड़े स्तर पर अलग-अलग करना मुश्किल है, क्योंकि लोग कचरे के डिब्बें में पका हुआ खाना और कच्चा खाना दोनों डालते है। इसके लिए आपको दो अलग-अलग तरीकों से काम करना होता है- एक बचे हुए खाने के लिए और दूसरा, कच्चे कचरे के लिए जैसे कि छिलके आदि। सविता कहती हैं कि सबसे अच्छा यही है कि आप एक ही सिस्टम से काम करें। इससे आपका समय, जगह, मेहनत और लागत, सब कम लगेगा।

कचरे को अलग-अलग करना बहुत ही ज़रूरी है और यह व्यक्तिगत तौर पर होना चाहिए। केंचुओं की मदद से खाद बनाने के लिए आपको कच्चा कचरा जैसे कि फल-सब्ज़ियों के छिलके आदि चाहिए होते हैं। सविता के मुताबिक, परिवारों का व्यक्तिगत तौर पर वर्मीकम्पोस्टिंग करना सही है। सोसाइटी स्तर पर आपको और बेहतर और आसान तरीकों से काम करना होगा।

उन्होंने सोसाइटी के लिए कुछ तरीके बताएं हैं जो कि बेस्ट हैं:

1. रेनबो ड्राइव मेथड:

“यह बहुत ही आसान-सा #DIY मेथड है जिसे कोई भी सोसाइटी बिना किसी बाहरी मदद के और बिना किसी खास मशीन के कर सकती है। इसमें लागत भी कम लगती है और आउटपुट भी काफी अच्छा मिलता,” उन्होंने बताया। इसके लिए इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करना बहुत ही आसान है:

  • सोसाइटी की किसी खाली जगह में कुछ सीमेंट की स्लैब्स रखें।
  • इस पर एक जाली वाली स्टील की प्लेट रखें।
  • इसके ऊपर स्टील की जाली वाला फ्रेम रखें, जिसकी लंबाई 2. 5 फ़ीट हो और चौड़ाई में यह 3 फ़ीट होना चाहिए।
  • इस फ्रेम के ऊपर एक बोरी का कपड़ा चढ़ा दें, जैसे तस्वीर में दिखाया गया है।
  • इसके बाद इसमें सूखे पत्ते भरकर 8 इंच की एक परत बनाएं। इस परत के ऊपर किचन का कचरा डालें और फिर से इसे सूखे पत्तों से ढक दें।

इस तरीके से खाद बनाने में किसी तरह की बदबू भी नहीं आती और न ही किसी तरह के मक्खी-मच्छर इसमें उत्पन्न होते हैं। सविता बताती हैं कि पांच सप्ताह बाद इस मिश्रण को इन फ्रेम से निकालकर खुले मैदान में फैला देना चाहिए। इसके कुछ हफ्ते बाद आपकी खाद बिल्कुल तैयार हो जाएगी।

2. सीमेंट टैंक सिस्टम:

यह भी एक कम लागत वाला समाधान है, जिसमें आपको सोसाइटी के अंदर एक खाली जगह पर सीमेंट के परमानेंट टैंक बनवाने पड़ेंगे। इस तरीके से खाद बनाने में आपको अच्छे से हवा का संचारण मिलता है। हालांकि, इसके लिए आपको थोड़ी जगह की ज़रूरत पड़ती है।

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वह बताती हैं कि इस तरीके से आप काफी ज़्यादा कचरे (लगभग 250 किलो) से खाद बना सकते हैं और यह सोसाइटी के स्तर पर एक अच्छा समाधान है।

क्या करना है,

  • सबसे पहले सीमेंट के टैंक बनने के बाद, इसमें कचरा डालें और फिर इस पर सूखे पत्ते आदि डालें।
  • हर दो-तीन दिन में इस मिश्रण को पलटते रहें ताकि बदबू न आए।
  • और मात्र 30 दिनों में आपकी खाद तैयार हो जाएगी।

3. स्टेनलेस/जंगरोधक स्टील के बिन में

इस तरीके से खाद बनाने के लिए आपको इस तरह के स्टील बिन के दो सेट चाहियें। 100 परिवारों के लिए, उनके मुताबिक हर एक सेट में 7 बिन होनी चाहिए।

यह कैसे काम करता है:

  • एक बार किचन का कचरा अलग-अलग करने के बाद इसे श्रेडेर मशीन से छोटे-छोटे हिस्सों में तोड़ें।
  • इसके बाद इसमें लकड़ी का बुरादा मिलाएं ताकि ये नमी को सोख ले।
  • इस मिश्रण को एक हफ्ते के लिए स्टील बिन्स के पहले सेट में रखें।
  • दूसरे हफ्ते में, इस मिश्रण को स्टील बिन्स के दूसरे सेट में ट्रांसफर कर दें।

सविता, आगे समझाती हैं कि 15 दिन के बाद, इस खाद को बाहर निकाल किसी छांव वाली जगह पर सूखा दें ताकि इसमें कोई नमी न रहे। कुछ दिनों बाद, खाद को छान लें। सबसे ज्यादा महीन खाद को लॉन के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है तो बाकी खाद को पेड़-पौधों के लिए।

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आज ही अपने दोस्तों और सोसाइटी के लोगों को इन तरीकों के बारे में बताएं। इनमें से कोई भी विधि चुनकर आप तुरंत अपने यहां खाद बनाना शुरू कर सकते हैं!

मूल लेख: चारू चौधरी

संपादन – अर्चना गुप्ता


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Written by निशा डागर

बातें करने और लिखने की शौक़ीन निशा डागर हरियाणा से ताल्लुक रखती हैं. निशा ने दिल्ली विश्वविद्यालय से अपनी ग्रेजुएशन और हैदराबाद विश्वविद्यालय से मास्टर्स की है. लेखन के अलावा निशा को 'डेवलपमेंट कम्युनिकेशन' और रिसर्च के क्षेत्र में दिलचस्पी है.

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