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नॉन-स्टिक की जगह लोहे या मिट्टी के बर्तनों में पकाएं खाना, पोषण भी मिलेगा और सेहत भी!

वैसे तो नॉन-स्टिक बर्तनों पर ‘पीएफए’ फ्री होने का लेबल लगाया जाता है। पर चिंताजनक यह है कि भारत में इसे लेकर अभी तक भी कोई रेगुलेशन नहीं है और इसलिए हम सिर्फ लेबल को देखकर निश्चिन्त नहीं हो सकते!

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हरी घरों में, खासकर कि बैचलर्स के किचन में नॉन-स्टिक तवा, कढ़ाई, पैन आदि होना बहुत ही आम बात है। साथ ही, हम समझ सकते हैं कि नॉन-स्टिक बर्तन इतने पॉपुलर क्यों हैं?

क्योंकि, इनमें कुछ भी बनाओ, तो चिपकता नहीं है, कम तेल की ज़रूरत पड़ती है और इन्हें साफ़ करना बहुत ही आसान है।

तो हैं ना बढ़िया विकल्प किसी भी किचन के लिए?

पर विशेषज्ञों की मानें, तो दुर्भाग्यवश यह बढ़िया नहीं गलत विकल्प है!

नॉन-स्टिक बर्तन किचन में रखे हुए किचन की खूबसूरती भले ही बढ़ाएं पर हमारी सेहत के लिए अच्छे-खासे नुकसानदायक हो सकते हैं। सबसे पहले तो नॉन-स्टिक परत के लिए इस्तेमाल हुआ पॉलीटेट्राफ्लूरोएथिलीन बहुत ही हानिकारक है।

इसलिए यह सुनिश्चित करें कि आप सुरक्षित रूप से खाना पकाएं जिससे आपका खाना सभी तरह के सिंथेटिक से बचा रहे। इसके लिए आपको लोहे, मिट्टी या फिर सोपस्टोन के बने बर्तनों का इस्तेमाल करना चाहिए। यदि आपके घर में पहले से ही ये बर्तन मौजूद हैं तो बहुत अच्छा है।

और यदि नहीं तो आप ऑनलाइन लोहे, मिट्टी और सोपस्टोन से बने बर्तन देख व खरीद सकते हैं!

आखिर क्यों है नॉन-स्टिक बर्तन हानिकारक?

किसी भी बर्तन चाहे वह पैन, कढ़ाई या फिर तवा हो, उसे नॉन-स्टिक बनाने के लिए पॉलीटेट्राफ्लूरोएथिलीन (PTFE) केमिकल  का इस्तेमाल होता है, जो एक सिंथेटिक फ्लुरोपॉलीमर है। क्योंकि इसका सरफेस चिकना और मेल्टिंग पॉइंट बहुत ही ज्यादा होता है।

टेफ़लोन ब्रांड नाम से जाने जानेवाले फ्लुरोपॉलीमर में मानवनिर्मित केमिकल, पेर और पॉलीफ्लुरोअल्काइल होते हैं। ये केमिकल्स पर्यावरण में या मानव शरीर में जाकर टूटते नहीं है। और इसलिए ये पाचन क्रिया का हिस्सा न बनते हुए, हमारे शरीर में इकठ्ठा होते रहते हैं। इसका हमारे स्वास्थ्य पर हानिकारक प्रभाव पड़ता है।

एक अच्छी बात यह है कि नॉन-स्टिक बर्तनों पर ‘पीएफए’ फ्री होने का लेबल लगाया जाता है। पर वहीं चिंताजनक यह है कि भारत में इसे लेकर अभी तक भी कोई रेगुलेशन नहीं है और इसलिए हम सिर्फ लेबल को देखकर निश्चिन्त नहीं हो सकते।

इसलिए सबसे अच्छा यही है कि आप ऐसे बर्तन खरीदें जो कि सुरक्षित हों और जिनमें खाना पकाने पर खाने का स्वाद और पोषण, दोनों ही बढ़ जाएँ।

आज हम द बेटर इंडिया पर आपको तीन तरह के बर्तनों के बारे में बता रहे हैं, जिनमें खाना पकाना बिल्कुल सुरक्षित है-

1. लोहे के बर्तन:

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इन बर्तनों में खाना पकाने के दो फायदे हैं- पहला आप ज्यादा तापमान पर भी खाना पका सकते हैं, यह आपके खाने में कोई हानिकारक तत्व नहीं मिलाता। और दूसरा, जब आप लोहे के बर्तनों में खाना बनाते हैं तो इसमें आयरन का पोषण आ जाता है जो कि हमारे शरीर के लिए आवश्यक है।

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लोहे के बर्तन आजकल बर्तन वालों की दूकान पर शायद ही आपको देखने को मिले, इसलिए आप आज ही ऑनलाइन अपने किचन के लिए यह बर्तन खरीद सकते हैं!

2. मिट्टी के बर्तन:

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मिट्टी के बर्तनों में खाना बनाना भारतीय संस्कृति और सभ्यता का हिस्सा रहा है। हालांकि, वक़्त के साथ मिट्टी के बर्तनों का चलन कम होता जा रहा है। पर आज के समय में बढ़ रही स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों को देखते हुए, सलाह यही है कि हम अपने लाइफस्टाइल में बदलाव करें। इसकी शुरूआत हमें अपने ही रसोईघर से करनी होगी।

सिर्फ हमारा खाना प्राकृतिक होने से बात नहीं बनेगी, बल्कि वह खाना किस तरह के बर्तन में पक रहा है यह भी हमें देखना होगा। इसलिए नॉन-स्टिक बर्तनों की बजाय हमें प्राकृतिक बर्तन यानी कि मिट्टी के बने हुए बर्तन इस्तेमाल करने चाहियें। इनमें किसी भी तरह का केमिकल या फिर अन्य कोई हानिकारक तत्व नहीं होता।

और तो और इनकी प्रकृति एल्कलाइन होती है और इससे ये खाने का पीएच बैलेंस करने में मददगार होते हैं। साथ ही, ये इको-फ्रेंडली और बायोडिग्रेडेबल भी हैं।

3. सोपस्टोन के बर्तन:

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सोपस्टोन एक प्राकृतिक पत्थर है, जिसमें मैगनिसियम खनिज की काफी मात्रा होती है। यह वैसे तो चट्टान की तरह घना और ठोस होता है पर अपने सरफेस से इतना सॉफ्ट होता है कि आप इसे अपने नाख़ून से खुरच सकते हैं। सोपस्टोन पुराने जमाने से हमारी किचन में अपनी जगह बनाये हुए है।

इसकी सबसे बड़ी वजह है कि यह इको-फ्रेंडली है और इसमें खाना काफी देर तक गर्म रहता है। बाकी यह खाने का पोषण भी ज्यों का त्यों बरक़रार रखता है।

नॉन-स्टिक बर्तनों की जगह, लोहे, मिट्टी या फिर सोपस्टोन के बर्तन खरीदकर आप न सिर्फ अपने परिवार को एक स्वस्थ ज़िन्दगी की तरफ ले जायेंगे, बल्कि आपकी यह एक कोशिश उन कारीगरों के घर भी रौशन करेगी जो दिन-रात मेहनत करके इन बर्तनों को बना रहे हैं।

इसलिए आज ही यह नेक कदम उठाएं!

मूल लेख: तन्वी पटेल

संपादन – मानबी कटोच 

Summary: It’s not too hard to understand why non-stick cookware is popular these days. They distribute heat evenly, need very little oil to cook dishes, and are super easy to clean. So, it’s a no-brainer to use them every day, right? Wrong. To begin with, the polytetrafluoroethylene coating that is prone to flake might prove dangerous. But how do you ensure your cooking is safe and devoid of synthetics? Well, choose from iron, clay or soapstone instead!


यदि आपको इस कहानी से प्रेरणा मिली है, या आप अपने किसी अनुभव को हमारे साथ साझा करना चाहते हो, तो हमें hindi@thebetterindia.com पर लिखें, या Facebook और Twitter पर संपर्क करें।
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