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मृत्यु : आख़िरकार है क्या?

अपनी हानि पर शोक ठीक है लेकिन जो गया उसके लिए तो एक नया अध्याय आरम्भ हुआ है. हम उसे जाने दें.. अच्छे से विदा करें ताकि नए अध्याय में वह आसानी से रम सके.

Death must be so beautiful. To lie in the soft brown earth, with the grasses waving above one’s head, and listen to silence. To have no yesterday, and no to-morrow. To forget time, to forget life, to be at peace.”

—Oscar Wilde, The Canterville Ghost

बुझा
एक चमकता तारा
अनंत आकाश में
कई आकाश गंगाएँ
पैदा हुईं हैं अभी.

मैं तुम्हारे दुःख से
सिहर सिहर जाता हूँ
अल्लाह मुझे पहले उठाये
तुम्हारा जाना मुझसे देखा न जाएगा

इंसान जब पहली मृत्यु देखता है तो बहुत कुछ हमेशा के लिए बदल जाता है उसके जीवन में. पहली मृत्यु से मेरा मतलब है आपके परिवार में किसी की मृत्यु. जाना आसान है. पीछे छूटे हुओं का जीवन मुश्किल हो जाता है. प्रायः लोग अपने माता-पिता को जाता देखते हैं अपनी उम्र के तीसरे या चौथे दशक में. जो ज़्यादा बदक़िस्मत हैं उनके बच्चे, अथवा भाई-बहन का प्रयाण एक कभी न भरने वाली खला बन जाता है मन के अंदरूनी कोनों में.

पीछे छूटे हुए परिवार के लोग एक खालीपन से सहम जाते हैं, कितनी ही ग्लानियाँ उबर आती हैं सतह पर, वैराग्य घेर लेता है.. अपने होने के कोई कारण समझ आने बंद हो जाते हैं कुछ नहीं अच्छा लगता. किसी के समझाए कुछ नहीं होता है. ऐसे वक़्त में किसी ग़मज़दा के साथ खड़े होने की असहायता भी होती है आप कुछ भी करें उनका ग़म ग़लत नहीं होने का.

लेकिन यही देश है जहाँ मृत्यु के अवसर पर शादी में गाये जाने वाले विदाई के गीत गाये जाते हैं क्योंकि यह तो आत्मा का परमात्मा से मिलन हुआ है. भारतीय दर्शन के हिसाब से अब दो ही सूरतें हैं कि या तो पुनर्जन्म होगा, या फिर मुक्ति. इन दोनों सूरतों में ही क्या दुःख मनाना. हाँ अपनी हानि पर शोक ठीक है लेकिन जो गया उसके लिए तो एक नया अध्याय आरम्भ हुआ है. हम उसे जाने दें.. अच्छे से विदा करें ताकि नए अध्याय में वह आसानी से रम सके.

नंदकिशोर आचार्य हिंदी के एक प्रबुद्ध लेखक हैं. उनका यह वीडियो हमारे प्रोजेक्ट का एक हीरा है. शान्ति से देखें इसे. मृत्यु को अपनाएँ – आपका जीवन आसान हो जाएगा. हबड़-तबड़, घबराहट कम हो जायेगी. आपके पास, आपके साथ आनंद के प्रचुर साधन उपलब्ध हैं आप उनका पान करने लगेंगे. समझे बात को?


लेखक –  मनीष गुप्ता

फिल्म निर्माता निर्देशक मनीष गुप्ता कई साल विदेश में रहने के बाद भारत केवल हिंदी साहित्य का प्रचार प्रसार करने हेतु लौट आये! आप ने अपने यूट्यूब चैनल ‘हिंदी कविता’ के ज़रिये हिंदी साहित्य को एक नयी पहचान प्रदान की हैं!


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