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एक माँ…एक मासूम सवाल… और वहीं से शुरू हुई भूख से लड़ने की एक ख़ामोश लेकिन सच्ची लड़ाई।पश्चिम बंगाल के मगराहाट की रहने वाली अपु मंडल ट्यूशन पढ़ाकर और सिलाई करके रोज़ भूखे लोगों तक खाना पहुँचाती हैं। यह सफ़र तब शुरू हुआ जब उनके 4 साल के बेटे ने एक वीडियो देखकर कहा, “माँ, अगर इन्हें खाना नहीं मिला तो ये मर जाएँगे ना?”अपु ने उसे समझाया कि उनके पास ज़्यादा पैसे नहीं हैं। तो बेटा अपनी छोटी-सी गुल्लक लेकर आया और बोला, “इसी से खिला दो, माँ।” उस पल ने अपु को अंदर तक बदल दिया। 27 साल की अपु ने तय किया कि भले ही ज़िंदगी में कमी रहे, लेकिन किसी का पेट खाली नहीं रहेगा। दिनभर घर और काम की थकान के बाद वह रात की लोकल ट्रेन पकड़ती हैं, और अलग-अलग स्टेशनों पर भूखे लोगों को खाना खिलाती हैं।
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जब हमने उनकी कहानी साझा की, तो लोगों ने भी दिल खोलकर साथ दिया। उन्हें ₹12,000 की मदद मिली, और एक बड़े टीवी शो में अपनी बात रखने का मौका भी।अपु की कहानी याद दिलाती है, दुनिया बदलने के लिए बड़े साधन नहीं चाहिए, बस एक माँ का दिल और एक बच्चे की सच्ची सोच काफ़ी होती है।