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- आप सबने मिलकर ₹1,05,000 की मदद की, आज मिठू के पास अपनी ई-रिक्शा है।
मिठू पंडित- एक माँ, एक मेहनतकश महिला, और सड़कों पर चलती उम्मीद का नाम।शुक्रिया! आपकी मदद ने उस माँ की ज़िंदगी थोड़ी आसान बना दी है।कोलकाता की सड़कों पर पिछले 9 सालों से मिठू रिक्शा चला रही हैं। बचपन से ही उन्होंने अभाव देखा—पिता वैन चलाकर तीन बेटियों का पालन-पोषण करते थे। उन्हें लगा था कि शादी के बाद जीवन आसान होगा, लेकिन शादी के बाद ज़िंदगी और भी मुश्किल हो गई। शराब के नशे में पति की मारपीट और हिंसा उनकी ज़िंदगी का सच बन गई। फिर भी मिठू ने हार नहीं मानी। उन्होंने अपने पति को किराए पर रिक्शा दिलाया, ताकि वह कुछ काम कर सके। लेकिन जब उसने रिक्शा चलाने से मना कर दिया, तो मिठू ने खुद घर की ज़िम्मेदारियाँ अपने कंधों पर उठा लीं। बच्चों का खर्च और रिक्शे का किराया, सब संभालने के लिए वे खुद उसी रिक्शे को लेकर सड़क पर उतर आईं। उन्हें विरोध का सामना करना पड़ा, अपनी जगह खुद बनानी पड़ी, लेकिन मिठू रुकी नहीं। मुश्किल तब और बढ़ गई, जब डॉक्टरों ने बताया कि उनके घुटनों की हालत ठीक नहीं है और वे ज़्यादा दिन पैडल रिक्शा नहीं चला पाएंगी।हमारे वीडियो के ज़रिए उन्होंने बस इतनी अपील की, अगर एक ई-रिक्शा मिल जाए, तो वह काम जारी रख सकें।
.....और आप सबने मिलकर ₹1,05,000 की मदद की, आज मिठू के पास अपनी ई-रिक्शा है।उनकी ज़िंदगी की रफ्तार फिर से लौट आई है। यह कहानी सिर्फ़ एक रिक्शा की नहीं है। यह हौसले, भरोसे और साथ आने की कहानी है।
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