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green building in India made by Lucknow Architect

लखनऊ: मिट्टी से बनाया ऑफिस, बिजली बिल आता है मात्र 350 रुपये

लखनऊ के युवा आर्किटेक्ट अनंत कृष्णा ने मिट्टी की पुताई और लकड़ी की गुंबददार छत से 300 स्क्वायर फ़ीट के ऑफिस को पारम्परिक और ईको-फ्रेंडली लुक दिया है।

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शहर तो शहर, गांव में भी आजकल लोग आधुनिकता के नाम पर कंक्रीट के जंगल बनाते जा रहे हैं। लेकिन इस तरह की इमारतें हमारे पर्यावरण के साथ-साथ, स्वास्थ्य के लिए भी अनुकूल नहीं हैं। जिस तरह हम अपने भोजन में ऑर्गेनिक फल-सब्जियों के इस्तेमाल पर जोर दे रहे हैं, उसी तरह घर बनाने के लिए पर्यावरण अनुकूल वस्तुओं का चयन क्यों नहीं कर रहे हैं? कुछ ऐसे ही सवालों का जवाब दे रहे हैं, उत्तर प्रदेश के एक युवा आर्किटेक्ट अनंत कृष्णा।

लखनऊ के अनंत कृष्णा, लोगों को घर बनाने में प्राकृतिक वस्तुओं का महत्त्व समझाने के लिए एक बेहतर तरीका आजमाया है। उन्होंने इसकी शुरुआत अपने ऑफिस से की है। दरअसल, उन्होंने लखनऊ के गोमती नगर स्थित 300 स्क्वायर फ़ीट के कंक्रीट से बने अपने ऑफिस को मिट्टी और स्थानीय नक्काशी वाली लकड़ियों का इस्तेमाल करके एक नया लुक दिया है। 

अनंत ने द बेटर इंडिया को बताया, “मैं जिस पेशे में हूं, उसमें हमें अपने क्लाइंट की जरूरत के अनुसार ही काम करना पड़ता है। लेकिन मैं चाहता हूं कि मेरे ऑफिस को देखकर लोग मुझसे मिट्टी और गुंबददार छत के बारे में सवाल पूछे और मैं उन्हें इससे होने वाले फायदे के बारे में बताऊं। मेरा मानना है कि लोग आपकी बातों को सुनकर नहीं, बल्कि आपके काम को देखकर जल्दी प्रेरित होते हैं।”

कंक्रीट की ऑफिस को बनाया मिट्टी से ठंडा 

लखनऊ से ताल्लुक रखने वाले अनंत ने, अमृतसर गुरु नानकदेव यूनिवर्सिटी से आर्किटेक्चर की पढ़ाई की है। इसके बाद, उन्होंने दिल्ली में कुछ महीने काम किया। फिर वह लखनऊ लौट आए और यहां स्काइलाइन आर्किटेक्चर नाम के एक फर्म से जुड़ गए। लेकिन लॉकडाउन के दौरान, उन्होंने खुद का काम शुरू करने का फैसला किया और Advance Group of Architects नाम से कंपनी की शुरुआत कर दी।

अनंत, अपनी माँ को अपनी प्रेरणा मानते हैं। उनकी माँ पेशे से सिविल इंजीनियर हैं और उनकी कंपनी में पार्टनर भी हैं। 

 Architect Anant Krishna In His Office made as a green building in India
Architect Anant Krishna In His Office

सस्टेनेबल बिल्डिंग के बारे में बात करते हुए वह कहते हैं, “आर्किटेक्चर की पढ़ाई के पहले ही साल हमें बताया गया था कि सालों पहले जब बिजली की सुविधाएं नहीं थी, तब इमारतों को सूरज की रौशनी और हवा की दिशा को ध्यान में रखकर बनाया जाता था। इसलिए मेरे हिसाब से एक स्टेनेबल बिल्डिंग वह है, जिसमें कम से कम कृत्रिम ऊर्जा का उपयोग किया जाए और ज्यादा से ज्यादा से स्थानीय वस्तुओं का इस्तेमाल हो। लेकिन आमतौर पर हर क्लाइंट सिर्फ मॉर्डन लुक को पसंद करता है और उसे अन्य चीजों से मतलब नहीं होता है।”

अनंत अपने काम से लोगों को विश्वास दिलाना चाहते थे कि पारम्परिक तकनीक के साथ भी मॉर्डन घर तैयार हो सकता है। इसलिए उन्होंने अपने ऑफिस को एक उदाहरण बनाने के बारे में सोचा। 

उन्होंने जब इस ऑफिस को किराए पर लिया, तब यह काफी जर्जर अवस्था में था। लेकिन आज यह आस-पास की सभी दुकानों के बीच, एक अलग ही रूप में चमक रहा है। अनंत कहते हैं, “यहां से जो भी गुजरता है, एक बार रुककर जरूर इसे देखता है। क्योंकि हमने इसे खास लखनऊ के स्टाइल में बनाया है।”

लखनऊ अपनी गुंबदकार छतों के लिए जाना जाता था, लेकिन हाल में मॉर्डन बिल्डिंग के बनने के बाद इस तकनीक को लोग भूलते जा रहे हैं। इसलिए अनंत ने लोकल आर्किटेक्चर को ध्यान में रखा। उन्होंने, छत की फॉल्स सीलिंग कराने के बजाय, स्थानीय लकड़ी से वाल्ट रूफ बनवाया, ताकि लोगों को इसमें प्राचीन इमारतों की छवि नजर आए। 

Vaulted roof made by local woods
Traditional Vaulted Roof

घर निर्माण में मिट्टी के इस्तेमाल के बारे में अनंत बताते हैं, “चूंकि उत्तर प्रदेश एक कृषि प्रधान राज्य है, यहां अलग-अलग विविधता की मिट्टी पाई जाती है। मैंने सोचा कि क्यों न कंक्रीट की दीवारों को, मिट्टी से पुताई करके राज्य की असल पहचान से जोड़ा जाए।”

उन्होंने अपने ऑफिस में लखनऊ के पास के गांव में उपलब्ध ग्रे और पीली मिट्टी का उपयोग किया है। ग्रे रंग की मिट्टी का उपयोग आमतौर पर मूर्ति बनाने के लिए होता है। जबकि, पीली मिट्टी गांव में घरों की लिपाई के काम आती है। मिट्टी के इस्तेमाल से ऑफिस के अंदर का तापमान बाहर से चार-पांच डिग्री कम रहता है। वहीं, वाल्ट रूफ से छोटी-सी जगह होने के बावजूद भी, यहां खुला-खुला महसूस होता है। उन्होंने बताया कि इस काम में उन्हें तक़रीबन सात लाख रूपये का खर्च आया। वहीं दीवारों पर मिट्टी की पुताई उन्हें हर पांच साल में करनी होगी।

पंखे की नहीं पड़ती जरूरत 

अनंत का पूरा ऑफिस पांच भागों में बंटा है। सबसे पहले लॉबी का भाग है,  जिसमें वाल्ट रूफ और मिट्टी की दीवार के साथ, उन्होंने कुछ इंडोर प्लांट्स भी रखे हैं। जिससे अंदर आते ही, आपको प्रकृति से जुड़ाव महसूस होगा। वहीं उन्होंने अपने केबिन और स्टूडियो में पार्टीशन के लिए कांच का इस्तेमाल किया है और उसे सफ़ेद रंग से पेंट कर दिया है, जिस वजह से यह व्हाइटबोर्ड का काम भी करता है। बाकि के दो भाग बाथरूम और पेनेट्री है। 

इस पूरी जगह में दिन के समय अच्छी सूरज की रौशनी आती है। वहीं मिट्टी की वजह से भीतर का तापमान सामान्य रहता है। 

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अनंत कहते हैं, “हमारे स्टूडियों में पंखा नहीं लगा है। इसके बावजूद यहां गर्मी नहीं लगती है। वहीं हमने लखनऊ की गर्मी को ध्यान में रखकर ऑफिस के लिए एक एसी लगवाया है। जिसकी जरूरत काफी कम पड़ती है। आपको यह जानकर ताज्जुब होगा कि मार्च में हमारे ऑफिस का बिजली का बिल 350 रुपये आया था। गर्मियों में एसी के कारण बिल थोड़ा बढ़ता है जोकि 600 से ज्यादा नहीं होता।”

मिट्टी की पुताई का काम रहा चुनौतियों से भरा

अनंत कंक्रीट की दीवारों पर मिट्टी की पुताई करना चाहते थे। हालांकि, यह काम इतना आसान नहीं था। उन्होंने लखनऊ में कई लोगों से पूछा, लेकिन सबने इस काम को करने से मना कर दिया। जिसके बाद, उन्होंने आसपास के गांव जाकर लोगों से इसके बारे में जानकारी ली। वह कहते हैं, “गांव में हर किसी को मिट्टी का घर बनाना आता है। तब मैंने कुछ गांव के लोगों मदद के लिए बुलाया।”

use of eco-friendly and local materials for construction
Using Mud On Walls

उन्होंने सबसे पहले दीवार पर चिकन मेश का जाल लगाया। इसके बाद ग्रे रंग की मिट्टी और भूसे का मिश्रण लगाया। फिर इसपर गोबर और पीली मिट्टी का लेप लगाया और सबसे आखिर में पीली मिट्टी में फेविकॉल मिलाकर लिपाई का काम किया गया। 

हालांकि, जब पहली बार उन्होंने इसे लगाया तब कुछ दिनों में ही पूरी मिट्टी निकल गई। बाद में, उन्हें गांववालों से ही पता चला कि गोबर और मिट्टी की हर परत को सूखने में समय लगता है और एक परत सूखने के बाद ही, दूसरी परत लगानी चाहिए। आखिरकार उन्हें सफलता मिली। 

कई लोगों को आकर्षित करता है, उनका यह ऑफिस 

अनंत का कहना है कि पहले लोग मिट्टी की दीवार को वॉल पेपर समझते थे। लेकिन जब वे इसे छूते हैं तब उन्हें ख्याल आता है कि यह मिट्टी की दीवार है। कई लोग उनके ऑफिस पहुंचकर, घर को प्राकृतिक तरीके से बनाने को लेकर कई सवाल पूछते हैं। 

modern office using mud
Outside And Inside View Of Office

बेंगलुरू के एक आईटी कंपनी में काम करने वाले अभिषेक श्रीवास्तव, उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिला स्थित अपने पुश्तैनी गांव में ईको-फ्रेंडली फार्म हाउस बनाने के सिलसिले में अनंत से मिले थे। अभिषेक कहते हैं, “मैं अपने गांव में ईको-फ्रेंडली फार्म हाउस बनाने के लिए आर्किटेक्ट की खोज में था। तभी मुझे अनंत कृष्णा के बारे में पता चला और मैं उनसे मिलने गया। मैं जैसे ही उनके ऑफिस में दाखिल हुआ तो लगा कि यहां तो सबकुछ प्राकृतिक है। उन्होंने अपने ऑफिस को भी पर्यावरण अनुकूल बनाया है। मैंने तभी सोच लिया कि यही मेरे आर्किटेक्ट होंगे।”

अभिषेक कंक्रीट का उपयोग किए बिना मिट्टी और चूने से अपना फार्महाउस बनाना चाहते थे। लेकिन उन्हें अपने फार्महाउस को मॉर्डन लुक भी देना था। अनंत के ऑफिस से वह इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने तुरंत ही काम उन्हें सौंप दिया। आने वाले कुछ महीनों में, उनके फार्म हाउस का काम शुरू हो जाएगा। 

अनंत कृष्णा की सोच और प्रयोग के कारण, कई लोग अब उनके संपर्क में हैं। यदि आप अनंत के फर्म के बारे में ज्यादा जानकारी चाहते हैं, तो यहां (https://www.advancegrouparchitects.com/) क्लिक करें। आप उनसे 9872948722 पर भी संपर्क कर सकते हैं।

संपादन- जी एन झा

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