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Kerala family with environment friendly house

जिप्सम और मिट्टी ने दी घर को ठंडक, पौधों और लताओं ने खूबसूरती

लेटराइट ईंटों, कोटा, जैसलमेर पत्थर, सीमेंट, जिप्सम आदि का इस्तेमाल कर बनाया Environment Friendly घर। हर कोने में बिखरी है हरियाली।

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इन दिनों घर निर्माण में ढेर सारे प्रयोग हो रहे हैं। प्रकृति के अनुकूल घर बनाने का चलन अब बढ़ने लगा है। वैसे यह भी सच है कि हमारे देश में अभी भी ‘सस्टेनेबल’ घरों को लेकर ज्यादा जागरूकता नहीं है। इसलिए अगर कोई इको-फ्रेंडली तरीके से घर बनवाना भी चाहे तो उनका परिवार इसके लिए तैयार नहीं होता है। लेकिन इसके बावजूद कई ऐसे लोग हैं जो आधुनिक शैली से बनाए घर में भी मिट्टी आदि का अधिक इस्तेमाल कर उसे Environment Friendly बनाने का प्रयास करते हैं, जैसा कि केरल में कोझिकोड के रहने वाले प्रसनजीत ने किया है। 

प्रसनजीत पेशे से फोटोग्राफर हैं और लगभग साढ़े तीन साल पहले उन्होंने अपना घर बनवाने का फैसला किया। प्रसनजीत चाहते थे कि वह एक ‘मड हाउस‘ बनवाएं। लेकिन उनका परिवार इस बात के लिए तैयार नहीं था। इसलिए उन्हें सामान्य तरीकों से ही अपने घर का निर्माण करवाना पड़ा। फिर भी प्रसनजीत ने घर को इको फ्रेंडली बनाने की कोशिश की है। 

द बेटर इंडिया से बात करते हुए उन्होंने बताया, “मैं कॉलेज के समय से ही पर्यावरण संरक्षण की गतिविधियों से जुड़ा रहा हूं। पिछले 18 सालों से अपने कुछ दोस्तों के साथ नियमित तौर पर सार्वजनिक जगहों और सड़क के किनारे पौधरोपण कर रहा हूं। हम इन पौधों की देखभाल भी करते हैं। इसलिए घर बनवाते समय मेरा बहुत मन था कि प्रकृति के अनुकूल मिट्टी का घर बनवाएं लेकिन इसके लिए परिवार में सबकी सहमति जरुरी थी।” 

Environment Friendly House in kerala
Outer view of the house

प्रसनजीत ने 2000 वर्गफीट जगह में अपना घर बनाया है। उन्होंने बताया कि घर निर्माण और फर्निशिंग में लगभग 50 लाख रुपए तक का खर्च आया था। बाहर से देखने में उनका घर किसी ‘जंगल हाउस’ से कम नहीं लगता है और इसका कारण है घर के बाहर-भीतर और ऊपर फैली हरियाली। उनका कहना है कि घर के निर्माण में कुछ इको-फ्रेंडली तरीके अपनाये गए हैं, जिस कारण उनके घर के अंदर का तापमान संतुलित रहता है। 

लेटराइट ईंट और प्राकृतिक पत्थरों का इस्तेमाल 

प्रसनजीत ने बताया कि उनके घर में लिविंग रूम, कॉमन रूम, ड्राइंग रूम, रसोई के अलावा कुल चार बेडरूम (जिनमें अटैच बाथरूम हैं) हैं। उन्होंने घर के निर्माण में लेटराइट ईंट, कोटा और जैसलमेर पत्थर, सीमेंट और जिप्सम आदि का इस्तेमाल किया है। घर की सभी दीवारें लेटराइट ईंट से बनाई गयी हैं। ये ईंटें, लेटराइट मिट्टी, रेत और सीमेंट का इस्तेमाल करके बनाई जाती हैं और काफी हद तक पर्यावरण के अनुकूल होती हैं। 

लेटराइट ईंट पानी और आग की भी प्रतिरोधी होती हैं। साथ ही, इनमें थर्मल इंसुलेशन का गुण भी रहता है। घर के अंदर की हवा में नमी को संतुलित रखने में मदद करती हैं। इसके अलावा, फर्श के निर्माण के लिए उन्होंने कोटा और जैसलमेर पत्थर का इस्तेमाल किया है। ये दोनों ही प्राकृतिक पत्थर हैं। उन्होंने बताया कि इन पत्थरों को लगभग सभी तरह की जलवायु में इस्तेमाल किया जा सकता है। साथ ही, ये काफी मजबूत होते हैं सालों-साल चलते हैं। इसलिए उन्होंने फर्श के लिए इन दोनों पत्थरों को चुना। 

Used Kota stone for flooring
Interior of the house

प्रसनजीत ने बताया, “इन पत्थरों की एक अच्छी बात यह है कि इन पर कभी भी पॉलिश करके इन्हें नया जैसा किया जा सकता है। हालांकि, छत के निर्माण के लिए मैंने सामान्य आरसीसी तकनीक का ही प्रयोग किया है।” उन्होंने बताया कि सबसे अधिक खर्च बाथरूम की फर्निशिंग पर आया है। “हमने सभी महंगी बाथरूम फिटिंग्स और टाइल्स का प्रयोग कराया है। घर में बाथरूम सबसे ज्यादा नमी वाली जगह होती है और इसलिए मैंने अच्छी से अच्छी गुणवत्ता वाले टाइल्स का इस्तेमाल किया ताकि भविष्य में परेशानी न हो”, उन्होंने कहा।

घर के अंदर कराया है मिट्टी और जिप्सम का प्लास्टर 

प्रसनजीत ने आगे बताया कि उन्होंने घर के अंदर, दीवारों पर प्लास्टर के लिए सीमेंट की बजाय जिप्सम और मिट्टी का इस्तेमाल किया है। उनके घर के एक बेडरूम में मिट्टी से प्लास्टर किया गया है। उन्होंने कहा, “मेरी बहुत इच्छा थी कि घर के निर्माण में ज्यादा से ज्यादा मिट्टी का इस्तेमाल हो। लेकिन ऐसा हो नहीं पाया। इसलिए मैंने घरवालों को मनाया और एक कमरे की दीवारों पर मिट्टी का प्लास्टर कराया है। हमें मिट्टी बाहर से नहीं लानी पड़ी बल्कि हमारी अपनी जमीन से जो मिट्टी निकली, उसी का इस्तेमाल हमने किया है।” 

प्रसनजीत का दावा है कि यह कमरा बिना एसी चलाये भी एकदम ठंडा रहता है। साथ ही, इस कमरे में हल्की-हल्की मिट्टी की सौंधी खुशबु आती रहती है। इसलिए यह उनका मनपसंद बेडरूम है। घर में बाकी सभी जगह ‘जिप्सम प्लास्टरिंग’ इस्तेमाल हुई है। “जिप्सम की प्लास्टरिंग घर में अंदर की दीवारों के लिए अच्छी रहती है। इससे आपको दीवारों पर अलग से पुट्टी कराने की जरूरत नहीं पड़ती है। हालांकि, इसे ऐसी जगह पर इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है जहां नमी रहती हो। इसलिए बाथरूम में हमने टाइल्स लगाए हैं,” उन्होंने कहा। 

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Mud Plaster in Bedroom
The house is comfortable to live

सबसे अच्छी बात है कि जिप्सम पर्यावरण के अनुकूल है और इसे तैयार करने में कम समय और कम पानी का इस्तेमाल होता है। साथ ही, जिप्सम प्लास्टर में किसी तरह की कोई दरार नहीं आती है। इसलिए बिना पुट्टी का इस्तेमाल किए, इस पर सीधा पेंट किया जा सकता है। इसकी थर्मल कंडक्टिविटी (उष्मा चालकता) सीमेंट से कम होती है। हालांकि, घर के बाहर के हिस्से पर उन्होंने सीमेंट से ही प्लास्टर कराया है क्योंकि जिप्सम प्लास्टर घर के बाहरी हिस्सों के लिए सही नहीं है। 

हर कोने में फैली है हरियाली 

घर को प्रकृति के करीब रखने के लिए प्रसनजीत ने एक और अहम कदम उठाया और वह है पेड़-पौधे लगाने का। उन्होंने कहा कि घर में शिफ्ट होते ही उन्होंने घर में तरह-तरह के पेड़-पौधे और लताएं लगाना शुरू कर दिया था। उन्होंने सामान्य फूलों या सब्जियों के पौधे नहीं लगाए। बल्कि ऐसे पौधे और लताएं लगाई जो घर की प्राकृतिक सुंदरता को बढ़ा रहे हैं। उनके घर में कई किस्म के बांस के पेड़ हैं। जिनकी वह समय-समय पर कटाई-छंटाई करते रहते हैं। उन्होंने पक्षियों के लिए घोसले भी लगाए हुए हैं और उनके दाना-पानी का इंतजाम भी करते हैं। 

इसके अलावा, उन्होंने अपने घर की बालकनी में कई तरह की लताएं लगाई हुई हैं। जिनमें कैट्स पॉ और मांडेविला जैसी लताएं शामिल हैं। ये लताएं न सिर्फ घनी फैलती हैं बल्कि जिस भी जगह हो, उस जगह को खूबसूरती से भर देती हैं।

Vines and creepers in house
Every corner is green

“जब हमने घर में इतने पेड़-पौधे लगाए तो बहुत से लोगों का कहना था कि घर में सांप, मेढ़क जैसे जानवर आएंगे। जब ये पेड़-पौधे फैलेंगे तो परेशानी होगी। लेकिन सच कहें तो आज हमारे घर की खूबसूरती इन्हीं पेड़-पौधों और लताओं से है। घर को हवादार रखने और हमारी आँखों के सुकून के लिए भी ये मददगार हैं,” उन्होंने कहा। 

घर को प्रकृति के करीब रखने के साथ-साथ प्रसनजीत और उनका परिवार अपने जीवन को भी स्वस्थ बनाने में जुटा हुआ है। हर दिन सुबह के समय वह लगभग 30 किमी साइकिल चलाते हैं और इसमें उनका परिवार भी उनका साथ देता है। वह कहते हैं कि जो भी उनके घर के पास से गुजरता है, दो पल ठहरकर उनके घर को निहारता जरूर है। 

संपादन- जी एन झा

तस्वीर साभार: प्रसनजीत

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