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दो भारतीय महिलाओं का कमाल, ऑस्ट्रेलिया के लोगों को खिला रही हैं ‘दाल’

ऑस्ट्रेलिया के कैनबेरा में रहने वाली मंजुला मिश्रा और अमृता बर्मन साथ में मिलकर ‘Simply Lentils’ के नाम से अपना स्टार्टअप चला रही हैं, जिसके जरिए वे ऑस्ट्रेलिया के लोगों के खान-पान में अलग-अलग तरह की दालों (different types of lentils) को शामिल करा रही हैं।

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भारतीय घरों में प्रोटीन का सबसे अच्छा साधन दाल को माना जाता है। किसी के लिए मूंग, मसूर, तूर, उड़द, तो किसी के लिए लाल, पीली, हरी और काली दाल। हमारे यहां दाल के व्यंजन खाना आम बात है। लेकिन अगर कोई विदेशी आपको सुबह-सुबह दाल के पैनकेक (चीला) खाता दिखे तो? और वह भी भारत में नहीं, बल्कि ऑस्ट्रेलिया में! तो आप क्या समझेंगे? जी हाँ, आजकल ऑस्ट्रेलिया में भी बहुत से लोग दाल (different types of lentils ) के बने व्यंजन को अपने खान-पान में शामिल कर रहे हैं। यह कमाल किया है ऑस्ट्रेलिया में रहनेवाली दो भारतीय बेटियों ने। 

ऑस्ट्रेलिया के कैनबेरा में रहनेवाली मंजुला मिश्रा (Manjula Mishra) और अमृता बर्मन (Amruta Burman) साथ में मिलकर, ‘Simply Lentils ‘ के नाम से अपना स्टार्टअप चला रही हैं। इसके जरिए, वे ऑस्ट्रेलिया के लोगों के खान-पान में अलग-अलग तरह के दालों (different types of lentils) को शामिल कर रही हैं। मंजुला और अमृता, भारत के अलग-अलग हिस्सों से हैं। मंजुला रांची से, तो अमृता इंदौर से हैं। इनका परिवेश, परिवार और शिक्षा सबकुछ अलग है। लेकिन ऑस्ट्रेलिया में, ये दोनों एक-दूसरे से सिर्फ भारतीय होकर मिलीं और एक-दूसरे की अच्छी दोस्त बन गयीं। देखते ही देखते, उनकी दोस्ती व्यवसायिक साझेदारी में बदल गयी। 

अमृता ने फाइनेंस में MBA की डिग्री की है और ऑस्ट्रेलिया में एक कंपनी के साथ काम करती हैं। वहीं, मंजुला MBA होने के साथ-साथ शेफ और न्यूट्रिशनिस्ट भी हैं। मंजुला ने द बेटर इंडिया को बताया, “यह अमृता का आईडिया था कि अलग-अलग दालों (different types of lentils) को कैसे विदेशी लोगों के बीच मशहूर किया जाए। जब मैं ऑस्ट्रेलिया आई, तो मैंने कई जगह नौकरी तलाशने की कोशिश की। लेकिन बिना अनुभव के मुझे कोई नौकरी नहीं मिली। ऐसे में, मैंने बिज़नेस में अपना हाथ आजमाया और अमृता के साथ मिलकर, उनके आईडिया पर काम करना शुरू किया।” 

different types of lentils called simply lentils by manjula mishra nad amruta burman in australia
मंजुला मिश्रा और अमृता बर्मन

दाल विद अ ट्विस्ट 

अमृता कहती हैं, “बहुत से भारतीय घरों में दाल एक समय जरूर बनती है। लेकिन ऑस्ट्रेलिया में दाल को लेकर बहुत सी धारणाएं हैं। जैसे कि इसे सिर्फ सूप की तरह खाया जा सकता है, इसमें कोई स्वाद नहीं होता और यह बोरिंग खाना है। बहुत से लोगों को लगता है कि दाल, गरीबों का खाना है। हमने इस धारणा को बदलने का फैसला किया। क्योंकि दाल सदियों से भारतीय खान-पान और संस्कृति का हिस्सा है। हमारे देश में अलग-अलग दालों (different types of lentils) के सैकड़ों व्यंजन बनते हैं। साथ ही, यह पोषण से भरपूर होती है। लेकिन ऑस्ट्रेलिया में लोग ज्यादातर मीट पर निर्भर करते हैं। इसलिए हम उन्हें ऐसा विकल्प देना चाहते थे, जो स्वादिष्ट हो और पोषण (healthiest lentils) में अच्छा हो।” 

अमृता और मंजुला ने साल 2020 में, दाल की अलग-अलग रेसिपीस पर काम करना शुरू किया। उन्होंने इस बात पर ख़ास ध्यान दिया कि ऑस्ट्रेलिया में ज्यादातर लोग कामकाजी हैं। लेकिन दाल से कोई भी व्यंजन बनाने में काफी समय लगता है। इसलिए बीच की प्रक्रिया को कम करके, वे ‘रेडी टू कुक’ उत्पाद बनाना चाहती थीं। मंजुला ने अलग-अलग प्रयोग करके दाल के तीन ‘मिक्स’ तैयार किए- LenBites, LENcakes और The Yogi Bowl! ये तीनों ही उत्पाद प्री-मिक्स हैं, जिन्हें अलग-अलग चीजें जैसे नगेट्स, बर्गर पैटीज़, पैनकेक, और खिचड़ी बनाने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। 

अमृता कहतीं हैं, “हमने रेसिपी तैयार करने के साथ-साथ इन उत्पादों के पोषण का भी पूरा ध्यान रखा। दिसंबर 2020 में हमने मंजुला की किचन से अपना स्टार्टअप लॉन्च किया। और पहले दिन से ही हमें ग्राहकों की काफी अच्छी प्रतिक्रिया मिली। पिछले छह-सात महीनों में हमारे ग्राहक और ऑर्डर्स की संख्या काफी बढ़ी है।” 

फेसबुक लाइव में लॉन्च किए प्रोडक्ट्स

simply lentils products offer different types of lentils
लगाती हैं स्टॉल भी (साभार)

मंजुला और अमृता बताती हैं कि दाल (different types of legumes) के प्रति ऑस्ट्रेलियाई लोगों की धारणा को बदलना चुनौती भरा काम था। लेकिन इसके साथ ही, उन्हें न सिर्फ लोगों से, बल्कि सरकार से भी सहयोग मिला। उन्होंने कहा, “हमें कैनबेरा इनोवेशन नेटवर्क के एक प्रोग्राम में भाग लेने का मौका मिला। इसकी कोई फीस नहीं थी और इसमें हमने स्टार्टअप से संबंधित बहुत सी चीजें सीखीं। इसके अलावा, लॉकडाउन के दौरान भी सरकार ने बहुत सारे फ्री वेबिनार कराए, ताकि इस दौरान लोग कुछ सीखें। जैसे सोशल मीडिया, डिजिटल मार्केटिंग आदि। इस तरह, हमें बहुत कुछ नया सीखने का भी मौका मिला और वह भी निःशुल्क।”

उन्होंने एक फेसबुक लाइव के जरिए अपने प्रोडक्ट्स लॉन्च किए। अमृता और मंजुला ने लगभग 10 लोगों को सैंपल के तौर पर अपने प्रोडक्ट्स दिए थे। इसके बाद फेसबुक लाइव में मंजुला ने उन सबको इन उत्पादों से अलग-अलग चीजें बनाना सिखाया। “हमारा यह फेसबुक लाइव हिट रहा। मंजुला उन्हें सिखा रही थीं और लोग अपने किचन में इसे पका रहे थे। साथ ही, हमारे प्रोडक्ट्स का फीडबैक दे रहे थे। लाइव ख़त्म होने से पहले ही, हमें ऑर्डर मिलने शुरू हो गए थे,” उन्होंने बताया। ऑनलाइन सेल के अलावा, वे शहर के चार स्टोर्स और दो कैफ़ेज़ को भी अपने प्रोडट्स सप्लाई कर रही हैं। 

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इसके अलावा, वे हर रविवार मार्किट में भी अपना स्टॉल लगाती हैं। यहाँ पर कोई भी आकर अलग-अलग दालों (different types of lentils) से बने प्री-मिक्स से बने व्यंजन चख सकता है और प्रीमिक्स खरीद सकते हैं। मंजुला कहती हैं कि अब तक उन्हें अपने प्रोडक्ट्स का कोई नेगेटिव फीडबैक नहीं मिला है। बल्कि, लोगों को खाने के बाद यकीन ही नहीं होता कि वे दाल के नगेट्स या बर्गर पैटी खा रहे हैं। 

ग्राहकों से मिल रही है अच्छी प्रतिक्रिया 

daal and patties made of lentils
हेल्दी फ़ूड (साभार)

उन्होंने आगे बताया कि पूरे ऑस्ट्रेलिया में उनके उत्पाद जा रहे हैं। हर महीने, उन्हें लगभग 200 ऑनलाइन ऑर्डर मिलते हैं। इसके अलावा, मार्किट में स्टॉल से और स्टोर्स के माध्यम से भी अच्छी बिक्री होती है। अपने बच्चों के खाने-पीने को लेकर सजग रहनेवाली क्रिस राइट कहती हैं, “मेरे बच्चों को ब्रेकफास्ट, डिनर सब में पैनकेक खाना होता है। उनके लिए मैंने LENBites और LENCake ट्राई किया और यह बहुत ही स्वादिष्ट, पोषण से भरपूर (healthiest lentils) और बनाने में आसान है। अब मैं हर किसी को यह ट्राई करने के लिए कहती हूँ। क्योंकि ये प्रोटीन का अच्छा साधन हैं।” 

वहीं, हाल ही में माँ बनीं, रोसन्ना वाल्टर बताती हैं कि उनके लिए अपने बच्चे को संभालते हुए कुकिंग करना आसान नहीं था। लेकिन इन ‘प्रीमिक्स’ की डिशेज़ बनाना बहुत ही आसान है और साथ ही, ये पोषण से भरपूर (health benefits of pulses) हैं। “मुझे कोई परेशानी होती है, तो मैं Simply Lentil की टीम से पूछती हूँ और वे तुरंत जवाब देते हैं। यहां तक कि मीट पसंद करनेवाले मेरे पति भी, ये शौक से खाते हैं,” उन्होंने आगे कहा। 

मंजुला कहती हैं कि बढ़ते ऑर्डर्स को देखकर, उन्हें लगता है कि इस साल के अंत तक उन्हें एक अलग जगह पर अपनी यूनिट सेटअप करनी होगी। फिलहाल, हर सप्ताह वे 2000 से 4000 डॉलर तक कमाती हैं और धीरे-धीरे उनका टर्नओवर बढ़ रहा है। “अगर सबकुछ इसी तरह अच्छे से चलता रहा, तो आने वाले साल में हम ऑस्ट्रेलिया के अलावा न्यूजीलैंड में भी अपने प्रोडक्ट्स सप्लाई करना चाहेंगे। क्योंकि यह ऑस्ट्रेलिया के पास है और हमें लगता है कि वहां के लोगों को हमारे उत्पाद पसंद आएंगे। फिलहाल, ख़ुशी इसी बात की है कि हम दाल को ऑस्ट्रेलिया के लोगों की प्लेट तक पहुंचा पा रहे हैं,” उन्होंने अंत में कहा। 

अमृता और मंजुला हम सभी के लिए एक प्रेरणा हैं, जो एक अलग देश और अलग संस्कृति में अपनी पहचान बना रही हैं। अगर आप उनके उत्पाद देखना चाहते हैं तो यहां क्लिक करें। 

संपादन- जी एन झा

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