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फल-सब्जियों और फूल-पत्तियों से बनाती हैं प्राकृतिक रंग, 3000+ लोगों को सिखाया

फल-सब्जियों और फूल-पत्तियों से बनाती हैं प्राकृतिक रंग, 3000+ लोगों को सिखाया

हैदराबाद की रहने वाली 29 वर्षीया मान्या चेराबुद्दी, एक नेचुरल कलर आर्टिस्ट और डिज़ाइनर हैं, जो प्राकृतिक चीजों का इस्तेमाल करके, Natural colors बनाती हैं।

क्या आपको पता है कि आपके घर की रसोई या गार्डन में मौजूद चीजों से, आप खाने, कपड़े और दूसरे कामों के लिए प्राकृतिक रंग और डाई बना सकते हैं? जी हां, बिल्कुल बना सकते हैं। दरअसल, आप चुकंदर, पालक, लाल पत्ता गोभी, टमाटर, हल्दी, कॉफी आदि से अलग-अलग प्राकृतिक रंग बना सकते हैं। इन रंगों से, आप न सिर्फ अपने कपड़ों पर डाई या प्रिंट कर सकते हैं, बल्कि इन्हें खाने में फूड-कलर के तौर पर भी इस्तेमाल में ले सकते हैं। आज हम हैदराबाद की एक ऐसी युवती से आपकी मुलाकात करवाने जा रहे हैं, जो प्राकृतिक रंग (natural colors) बनाने और लोगों को यह कला सिखाने का भी काम करती हैं। 

29 वर्षीया मान्या चेराबुद्दी एक Natural Color Artist हैं। वह प्राकृतिक चीजों का इस्तेमाल करके, इको फ्रेंडली रंग बनाती हैं। मान्या इन रंगों (natural colors) का इस्तेमाल अलग-अलग चीजों को रंगने के लिए करती हैं, जैसे- फूड आइटम, कागज, कपड़े आदि। द बेटर इंडिया के साथ बात करते हुए, उन्होंने अपने इस सफर के बारे में बताया। 

खुद एक्सपेरिमेंट करके सीखी कला 

मान्या बताती हैं, “मैंने अमेरिका से बिज़नेस और आर्ट में ग्रैजुएशन किया है। पढ़ाई पूरी करने के बाद, मैं एक डिज़ाइनिंग कंपनी के साथ काम करने लगी। लेकिन, मेरी दिलचस्पी हमेशा से ही प्रकृति में रही है। इसलिए, मैं हमेशा कोशिश करती थी कि प्रकृति में मौजूद चीजों से ही, रोजाना इस्तेमाल होने वाली चीजें बनाऊं। इस दौरान, मुझे पता चला कि हम प्राकृतिक चीजों से डाई भी बना सकते हैं। ये रंग इको फ्रेंडली होने के साथ-साथ, हमारी त्वचा के लिए भी अच्छे होते हैं। क्योंकि, मैंने देखा है कि बहुत से लोगों को, केमिकल डाई में रंगे कपड़ों से त्वचा से जुड़ी परेशानियां होने लगती हैं। इसी तरह, कई लोगों को खाने में इस्तेमाल होने वाले, सिंथेटिक फूड कलर से भी एलर्जी हो जाती है।” 

Natural Colors and Dye
Dyeing Fabric with Natural Colors

लगभग चार-पाँच महीनों तक रिसर्च और एक्सपेरिमेंट करने के बाद, 2019 में, उन्होंने अपनी नौकरी छोड़कर, एक पेशेवर के तौर पर प्राकृतिक रंग (natural colors) बनाना शुरू किया। मान्या कहती हैं, “प्राकृतिक रंग बनाना बहुत ही आसान है। जरूरत है तो बस, सही ढंग से यह कला सीखने की। हालांकि, आपको एक ही बार में सफलता नहीं मिल जाएगी, इसके लिए आपको लगातार प्रयास करना होगा। शुरुआत में मुझे भी असफलता मिली, लेकिन मैंने हार नहीं मानी। मैंने सबसे पहले अपने कपड़ों पर एक्सपेरिमेंट किया और जब सफलता मिलने लगी, तो इसी काम में आगे बढ़ने का फैसला किया।” 

मान्या कहती हैं कि प्राकृतिक रंग (natural colors) बनाने के लिए, वह फल, सब्जियां, फूल, मसाले, पत्ते, कॉफ़ी, चायपत्ती, जैसे तरह-तरह के प्राकृतिक उत्पादों का इस्तेमाल करती हैं। उनकी हमेशा यही कोशिश रहती है कि वह फल-सब्जियों के छिलकों, पूजा के लिए चढ़े फूलों और पेड़ से गिरे हुए पत्तों आदि को ही इस्तेमाल में लें। उन्होंने कहा, “प्राकृतिक रंग बनाना या डाई करना सिर्फ एक कला नहीं है। अगर बड़े स्तर पर काम किया जाए, तो इस प्रक्रिया से, सिंथेटिक डाई के इस्तेमाल को बहुत हद तक कम किया जा सकता है। रसायनयुक्त रंगों का यह एक बेहतरीन विकल्प है।” 

मान्या का कहना है कि अगर सिंथेटिक डाई की जगह, प्राकृतिक डाई का इस्तेमाल किया जाए, तो इससे लोगों का स्वास्थ्य बेहतर होगा। साथ ही, पर्यावरण संरक्षण के लिए भी यह एक अच्छा कदम साबित होगा। क्योंकि सिंथेटिक डाई बनाने के लिए, प्रकृति को काफी नुकसान पहुँचाया जा रहा है। 

Natural Colors and Dye
Fabric died with Marigold and Cookies made with natural food color

सिखा रही हैं दूसरों को भी:

लगभग डेढ़ साल पहले, मान्या ने अपने ब्रांड, ‘ट्रीहाउस‘ की शुरुआत की। जिसके जरिए, वह लोगों को प्राकृतिक रंग (natural colors) बनाना सिखा रही हैं। उन्होंने बताया कि वह अब तक, 80 से ज्यादा ऑनलाइन वर्कशॉप और ट्रेनिंग सेशन कर चुकी हैं। उन्होंने अब तक, तीन हजार से ज्यादा लोगों को प्राकृतिक रंग (natural colors) बनाना सिखाया है। उनके छात्रों में बच्चों से लेकर बड़े तक शामिल हैं। उन्होंने स्कूल-कॉलेज के छात्रों, फैशन डिजाइनिंग के छात्रों, पेशेवर डिज़ाइनर्स, कारीगरों और प्राकृतिक रंगों में दिलचस्पी रखने वाले लोगों को भी यह कला सिखाई है। 

मान्या कहती हैं कि फिलहाल, वह हर महीने लगभग 200 लोगों को प्राकृतिक रंग (natural colors) बनाना सिखा रही हैं। उनके वर्कशॉप में हिस्सा लेने वाली मुस्कान अग्रवाल कहती हैं, “मैं हमेशा से ही, फैशन के बारे में सजग रही हूँ। हमें रोजाना, फैशन ट्रेंड में बदलाव देखने को मिलते रहते हैं। इसलिए, हर दिन कुछ नया करने की रेस में, लोग गुणवत्ता से समझौता करते हुए, ज्यादातर सिंथेटिक चीजों का इस्तेमाल करते हैं। ऐसे में मैंने प्राकृतिक चीजों में ही, विकल्प ढूँढना शुरू किया। मैं हमेशा से प्राकृतिक डाई का इस्तेमाल करना चाहती थी और मान्या के वर्कशॉप में हिस्सा लेने के बाद, मैंने बहुत कुछ नया सीखा। साथ ही, मैं अब इस क्षेत्र में आगे बढ़ रही हूँ।” मुस्कान अपना एक लाइफस्टाइल ब्रांड चलाती हैं, जिसके जरिए वह इको फ्रेंडली उत्पाद जैसे- कपड़े तथा ज्वेलरी आदि ग्राहकों तक पहुंचा रही हैं। 

Natural Colors and Dye
Teaching Others as well

वहीं, बेकिंग में दिलचस्पी रखने वाले एमी जरीवाला कहते हैं कि मान्या के वर्कशॉप में हिस्सा लेने के बाद, वह प्राकृतिक फूड कलर बना रहे हैं, जिसका इस्तेमाल वह केक, ब्रेड और पेस्ट्री आदि बनाने में करते हैं। मान्या बताती हैं कि वह अलग-अलग विषय पर वर्कशॉप करती रहती हैं, जिनमें कपड़ों पर डाई करना, पेंटिंग के लिए रंग बनाना, फूड कलर बनाना, होली के लिए प्राकृतिक रंग (natural colors) बनाना आदि शामिल है। 

किसी विषय के आधार पर ही, वह अपने वर्कशॉप की फीस तय करती हैं। उनके वर्कशॉप की फीस, 299 रुपए से लेकर 4500 रुपए तक हो सकती है। अगर आप इस बारे में अधिक जानकारी चाहते हैं या प्राकृतिक रंग (natural colors) बनाना सीखना चाहते हैं, तो उन्हें c.manya@gmail.com पर ईमेल कर सकते हैं। आप उन्हें इंस्टाग्राम पर भी फॉलो कर सकते हैं। 

संपादन- जी एन झा

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