Search Icon
Nav Arrow
उबर कैब ड्राईवर किशन अपनी गाड़ी के साथ (साभार: चंदन पांडेय)

ईमानदारी और इंसानियत की मिसाल पेश करता एक कैब ड्राईवर, पढ़िए ये पोस्ट!

हाल ही में, बंगलुरु निवासी चंदन पांडेय नाम के एक फेसबुक यूजर ने एक पोस्ट लोगों के साथ साँझा की है। इस पोस्ट को पढ़कर आप एक बार फिर सच्चाई और इंसानियत में विश्वास करने लगेंगे। चंदन ने अपनी पोस्ट में बताया है कि कैसे दिल्ली में उनके साथ हुए एक वाकया ने उनका नज़रिया लोगों की अच्छाई के प्रति और भी मजबूत कर दिया है।

आप उनकी पोस्ट पढ़ सकते हैं,

“आज कोई बात हो गई।

Advertisement

सुबह जब टैक्सी से उतरा तो लैपटॉप बैग लिए उतर गया। देर हो रही थी। मीटिंग हॉल में पहुँचना और सेटल हो जाना एक काम होता है। उस पर जिस दिन आपका प्रेजेंटेशन हो तो, दस वर्ष की नौकरी के बाद भी, अजीब सी उत्कंठा बनी रहती है। चिंता से थोड़ी कम। बेचैनी से थोड़ी ज्यादा।

जब शाम हो गई, मीटिंग लगभग समाप्त होने वाली थी और औपचारिकताओं का दौर चलने लगा तब फोन देखा। एक अनजान नम्बर से अनगिनत मिस्ड कॉल थे। उसे देखने से या मीटिंग के बाद मिली राहत से, पता नहीं कैसे अचानक मुझे याद आया कि सुबह जब मैं टैक्सी से उतरा था तो लैपटॉप बैग लिए जरूर उतरा था लेकिन ट्रॉली उसी गाड़ी में छूट गई थी। इस ख्याल भर से मेरी ऊपर की सांसें ऊपर और नीचे की सांसें नीचे रह गईं।

गहरी निराशा हुई। इतनी निराशा कि सोचा, जाने देते हैं, जो होगा देखा जाएगा। इससे पहले दो बार ऐसा हुआ और दोनों ही मर्तबा बड़े प्रयासों के बावजूद सामान वापस नहीं मिला। फिर ख्याल आया कि बैग छोड़ देने का निर्णय कुछ ज्यादा ही हो जाएगा और स्वेटर कपड़े सब उसी में है और बैग गुम होने के गुस्से में सर्दी मार डालेगी।

Advertisement

इत्तफाकन उबर ड्राइवर का नंबर मेरे डायल लिस्ट में था। सौ में से नब्बे दफा मैं उबर ड्राइवर्स को कॉल नहीं करता, उन्हें लोकेशन पर आने देता हूँ या उनके कॉल का इंतजार करता हूँ। आज लेकिन गलती से ही सही डायल कर रखा था।

कॉल किया। भाई ने क्या गजब रेस्पॉन्स दिया। सर, सुबह आपके उतरने के दस मिनट बाद ही होटल आया था। आपके नाम की कोई बुकिंग नहीं थी। कोई आपका सामान लेने के लिए तैयार नहीं हो रहा था। आपको अनेक फोन किए।

मैं कहता भी तो क्या?

Advertisement

पूछा, अभी कहाँ हो? किशन ने कहा, झंडेवालान मंदिर के पास। फिर किसी से पूछ कर बताया, वीडियोकॉन टॉवर के पास। फिर उसने कहा कि मैं अपने घर जाने का लोकेशन डालता हूँ, आप झंडेवालान से मयूर विहार फेज वन की बुकिंग डालो। तीन बार कोशिश करने पर और कैंसल करने के बाद चौथी बार में उसी गाड़ी की बुकिंग मिली। फिर उसी ने कहा कि दो मिनट बाद वो ट्रिप स्टार्ट करेगा और उसके कुछ मिनट बाद मैं डेस्टिनेशन बदल कर द्वारका कर दूँ।

मैंने वही वही किया।

बंदा चाहता तो सिरे से मना कर देता। एक बार उसने कहा भी कि नजदीक पुलिस स्टेशन में सामान जमा करा देता हूँ लेकिन मेरी चुप्पी सुनकर समझ गया कि मेरे पास समय कम है और यहाँ आने के लिए तैयार हो गया। मैं कहने को था कि कुछ अधिक पैसे ले लेना लेकिन सामान आकर दे जाओ, पर नहीं कहा। जो मदद कर रहा हो उसके आत्म सम्मान पर चोट करना कितना बड़ा अपराध होता।

Advertisement

किशन भाई का अनगिनत शुक्रिया।

खुद को जाँचना चाहता हूँ कि किशन की जगह मैं होता तो क्या करता लेकिन अभी ट्रेन पकड़ने निजामुद्दीन निकलना है इसलिए बाद में ख्याल किया जाएगा।

अभी तो किशन का शुक्रिया।

Advertisement

यह शहर मुझे बेहद प्रिय है। अब इस नई वजह से तो पसंदगी बढ़ जाएगी।

तस्वीर में किशन और उनकी गाड़ी। कोई उबर वालों तक इनकी अच्छाई पहुँचा दे। ट्रेन विलंब से है तो मैं इनके लिए उबर पर प्रेम से लिखूँगा ही।”

Advertisement

यदि आपको इस कहानी से प्रेरणा मिली है या आप अपने किसी अनुभव को हमारे साथ बांटना चाहते हो तो हमें hindi@thebetterindia.com पर लिखे, या Facebook और Twitter पर संपर्क करे। आप हमें किसी भी प्रेरणात्मक ख़बर का वीडियो 7337854222 पर भेज सकते हैं।

close-icon
_tbi-social-media__share-icon