न कोई अनुभव, न प्लान! 2 सहेलियों ने कर डाले तीन इनोवेशन, खेती और मछली पालन का काम हुआ आसान

Friends Invented Solar Devices, Farming And Fisheries Became Easier

बचपन की दोस्त मिनुश्री और अमृता ने सौर ऊर्जा से चलने वाले तीन इनोवेटिव उपकरण बनाए हैं। इससे न केवल किसानों का काम आसान होगा, बल्कि उन्हें अपनी आमदनी बढ़ाने में भी मदद मिलेगी।

जिंदगी का कौन सा मोड़ आपको किस राह पर ले जाएगा, कहा नहीं जा सकता। ओडिशा के कालाहांडी में रहनेवाली मिनुश्री मधुमिता और अमृता जगतदेव के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ। ये दोनों बचपन की दोस्त हैं, साथ खेली और बड़ी हुईं। एक साथ स्कूल करने के बाद अलग-अलग रास्तों पर चलने लगीं। मिनुश्री ने केमिस्ट्री की राह पकड़ी और इसी विषय में आगे बढ़ीं।

वहीं, अमृता फायनेंस की पढ़ाई कर इलेक्ट्रिकल इंजीनियर बन गईं। अच्छी कंपनियों में काम करते हुए, दोनों अपने करियर की ऊंचाइयों पर लगातार आगे बढ़ रही थीं। लेकिन कुछ था जिसने उनके बढ़ते कदमों को एक पल ठिठककर रुकने के लिए मजबूर कर दिया। ये दोनों समाज के लिए कुछ करना चाहती थीं। 

इसके लिए उन्होंने साल 2008 में, ओडिशा के सरकारी स्कूलों में कंप्यूटर साक्षरता लाने के लिए एक गैर सरकारी संगठन, ‘बिहांग’ की शुरुआत की। लेकिन उन्हें नहीं पता था कि उनका यह छोटा सा प्रयास उन्हें अपने बचपन की दोस्त के साथ ऊर्जा तकनीक स्टार्टअप शुरू करने के लिए प्रेरित कर देगा। आज ये दोनों अपने हुनर से गांव के किसानों की मदद करने के लिए इनोवेटिव डिवाइस (Solar Devices) बना रही हैं।

ओडिशा के गांव में सौर ऊर्जा को बढ़ावा

मिनुश्री ने साल 2000 के अंत में, अपने संगठन के जरिए सरकारी स्कूलों में बच्चों को पढ़ाने के लिए कंप्यूटर लैब बनाने की शुरुआत की थी। लेकिन यह इतना आसान नहीं था। दूर-दराज के इलाकों में बिजली का आना-जाना लगा रहता है। स्कूल में बच्चे कंप्यूटर लैब का फायदा नहीं उठा पा रहे थे। घर पर उनके पास कंप्यूटर था नहीं और कैफे जाकर कंप्यूटर चलाना उनके लिए संभव नहीं था।

Rooftop solar installed by Thinkraw solutions
Rooftop solar installed by Thinkraw solutions Pvt. Ltd.

इन परेशानियों को देखते हुए मिनुश्री ने सौर ऊर्जा से चलने वाले (Solar Devices) कंप्यूटर लैब शुरू करने के बारे में सोचना शुरू किया। उनके इस काम में एशियन पेंट्स ने सहयोग किया। उन्होंने कहा, “कंपनी ने पहले इस क्षेत्र में निवेश करने की बात की थी। उनकी इस पहल से कंप्यूटर लैब में बिना किसी रुकावट के बिजली आने लगी और खर्च भी कम होने लगा।”

इस पहल की शुरुआत उत्तर प्रदेश के गौतमबुद्धनगर जिले के दनकौर ब्लॉक के ‘बीडीआरडी सरस्वती विद्यामंदिर इंटर कॉलेज’ से हुई। इसके बाद, इसे चार अन्य स्कूलों में भी शुरु किया गया। मिनुश्री ने बताया कि पहले एक साल तक तो जरूरी बुनियादी ढांचा बनाने, स्कूल के शिक्षकों को ट्रेन्ड करने और प्रबंधन संभालने का काम किया गया। जब एक बार स्टाफ को ये समझ में आ गया कि इसे कैसे संभालना है, तो उन्होंने बुनियादी ढांचे की जिम्मेदारी उन्हें सौंप दी।

खराब पैनल ने दिखाई Solar Devices के इनोवेशन की राह

उनका यह अभियान सफल रहा। मिनुश्री उस समय दिल्ली में आईटी क्षेत्र में काम कर रहीं थी। उन्होंने अपने एनजीओ पर पूरी तरह से ध्यान देने के लिए साल 2013 में  नौकरी छोड़ दी। तब तक मिनुश्री ने अपनी दोस्त अमृता को भी अपने साथ जोड़ लिया था। उन्होंने अमृता को अपने एनजीओ के सलाहकार के रूप में नियुक्त किया। 

लेकिन यहां तक आने की राह आसान नहीं थी। मिनुश्री और अमृता को जल्द ही एक समस्या दिखाई दी। अमृता बताती हैं, “पैनल की क्वालिटी अच्छी नहीं थी। जिसकी वजह से छह महीने बाद ही उनके रख-रखाव पर काम करना पड़ा। निचले दर्जे के उपकरण देकर कंपनी ने हमें धोखा दिया था।”

इस समस्या से उनका ध्यान खुद से उपकरण (Solar Devices) बनाने की तरफ गया। उन्हें लगा कि यह समस्या तो गाहे-बगाहे उनके सामने आती रहेगी। किसी अच्छे विक्रेता की तलाश करने से बेहतर है कि भविष्य में खुद इसका निर्माण किया जाए।

रखी थिंक रॉ प्राइवेट लिमिटेड स्टार्टअप की नींव

अमृता को इलेक्ट्रॉनिक्स की अच्छी-खासी जानकारी थी। उन्होंने खुद के उत्पाद तैयार करने का फैसला कर लिया। साल 2015 में अमृता ने भी अपनी नौकरी छोड़ दी। अब वह भी मिनुश्री की तरह अपना पूरा समय इस काम में लगाने लगीं। 

साल 2016 में उन्होंने अपने स्टार्टअप, ‘थिंक रॉ प्राइवेट लिमिटेड’ की स्थापना की। स्टार्टअप को सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क्स ऑफ इंडिया एसडीपीआई, भुवनेश्वर के साथ काफी विचार-विमर्श और श्री श्री यूनिवर्सिटी के मार्गदर्शन में शुरू किया गया था। वह कहती हैं, “हम बच्चों के अलावा, गांव के मछुआरे और किसानों की भी मदद करना चाहते थे। हमने काला हांडी में रहने वाले किसानों को कड़ी मेहनत करते हुए देखा है। बस यहीं से हमें उनके लिए कुछ करने का विचार आया।”

उन्होंने कहा, ”शहर के मुकाबले गांव में काम करने वाले किसानों के लिए समस्याएं ज्यादा हैं। उनके बीच काफी अंतर है। उन्हें कड़ी मेहनत करनी पड़ती है। जिंदगी को आसान बनाने वाली तकनीकों के बारे में न तो उन्हें कोई जानकारी है और न ही उसकी समझ। इससे उनकी फसल की गुणवत्ता और पैदावार पर भी काफी असर पड़ रहा था।”

तीन Solar Devices को किया इनोवेट

अमृता बताती हैं कि खेती के लिए सौर उर्जा से चलने वाले उपकरण (Solar Devices) बनाते समय हमें शहरी और ग्रामीण जीवन के अंतर को जानने का मौका मिला। इस अंतर को पाटने और किसानों की मदद करने के लिए इन दोनों के दिमाग में कृषि धनु, धिवरा मित्र और मत्स्य बंधु को बनाने का विचार आया। 

Dhivara Mitra by Thinkraw solutions
Dhivara Mitra built by Thinkraw solutions Pvt. Ltd.

उनका सबसे पहला इनोवेशन है- कृषि धनु। यह सौर ऊर्जा से चलने वाला एक उर्वरक और कीटनाशक उपकरण है। महिलाओं के लिए इसे खास बताते हुए अमृता कहती हैं, “महिलाओं के सिर पर टोकरियों में भरा उर्वरक और हाथों से खेतों में उसे डालती महिलाएं। इन इलाकों में यह दृश्य काफी आम है। उर्वरक महिलाओं के हाथों को खराब कर देता है। उन्हें एलर्जी से लेकर कई अन्य तरीके की त्वचा की बीमारियों से जूझना पड़ रहा था। इस तरह से खेतों में खाद डालने का यह तरीका सही भी नहीं है। इससे फसल में कहीं खाद ज्यादा गिरती, तो कहीं कम।”

क्या है Solar Device धिवरा मित्र?

इन सभी समस्याओं से एक साथ निपटने के लिए उनके स्टार्टअप ने एक इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IOT) डिवाइस विकसित की। इसमें सौर ऊर्जा से चलने वाली बैटरी लगी होती है और यह खेतों में खाद डालने का काम करता है। हालांकि मार्केट में इस तरह के उपकरण पहले से मौजूद हैं, लेकिन वे सिर्फ लिक्विड खाद पर काम करते हैं। वहीं इसके उलट इस डिवाइस के साथ ठोस उर्वरक पर भी काम किया जा सकता है। उन्होंने बताया, “इसे गर्भवती महिलाएं भी चला सकती है। इससे कोई खतरा नहीं है।”

उनके दूसरे इनोवेशन धिवरा मित्र डिवाइस (Solar Devices) को सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ फ्रेशवाटर एक्वाकल्चर (CIFA) के सहयोग से बनाया गया है। मिनुश्री ने कहा, “मछली पालन से जुड़े लोगों के सामने ज्यादा खर्च की समस्या के साथ-साथ और भी बहुत सारी चुनौतियां रहती हैं।

बिजली की कमी के चलते पानी में इस्तेमाल होने वाले उपकरणों को चलाने के लिए डीजल का इस्तेमाल करना पड़ता है। इससे उनकी लागत तो बढ़ती ही है साथ ही अगर उपकरण, पानी के सही पीएच स्तर को नहीं बनाए रखते तो मछलियों के मरने या फिर बीमार होने का खतरा भी बढ़ जाता है।”

कैसे करता है काम?

उन्होंने एक ऐसी फ्लोटिंग डिवाइस (Solar Devices) बनाई है, जो पानी के पीएच स्तर को मापता है और जरूरत पड़ने पर एरिएशन प्रॉसेसर को गति देता है। इस काम के लिए इसमें सेंसर लगाया गया है। उन्होंने बताया, “यह फ्लोटिंग डिवाइस 1.5 kW क्षमता वाले सोलर पैनल से चलती है। यह पानी में चारों ओर घूमती है। इसे मछलियों के लिए सबसे उपयुक्त मापदंडों को बनाए रखने के लिए प्रोग्राम किया गया है।”

उनके इस प्रोजेक्ट की मार्च 2022 तक मार्केट में आने की उम्मीद है।

मछली पालन के लिए मत्स्य बंधु

मिनुश्री के अनुसार, उनका तीसरा इनोवेशन मत्स्य बंधु, एक बीज और मछली फ़ीड उपकरण है। यह भी सौर ऊर्जा से ही चलता है। इसे आप धिवर मित्र का मॉडिफाइड रूप कह सकते हैं। वह कहतीं हैं, “पारंपरिक तरीके से बीज या चारे से भरी बोरी को बांस की सहायता से पानी में लटकाया जाता है। बोरी में नीचे की तरफ कुछ छेद बना दिए जाते हैं ताकि बीज या चारा पानी में धीरे-धीरे जाता रहे।”

इस तरीके से पानी में कई बार ज्यादा मात्रा में बीज या चारा चला जाता है और यह पानी को दूषित कर देता है। वह बताती हैं, “इससे कई बार फायदे की बजाय नुकसान हो जाता है। हमारे इस इनोवेशन को खासतौर पर इस समस्या को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है, इसमें सेंसर लगे हैं। इस डिवाइस में 30 किलो तक फीड रखा जा सकता है, जो पानी में तैरते हुए समान रूप से बीज या चारे को पानी में गिराता है।”

क्या हैं इसके फायदे?

मिनुश्री का कहना है कि यह डिवाइस पानी के पीएच स्तर की निगरानी भी करता है और निर्धारित मात्रा के अनुसार ही बुनियादी और अमली लवणों को पानी में छोड़ता है। ताकि पानी का पीएच स्तर सामान्य बना रहे।

यह उपकरण स्वचालित है। इसे चलाने या फिर इसकी निगरानी के लिए किसी मजदूर की जरूरत नहीं होती। व्यावसायिक स्तर पर इसका इस्तेमाल करने से नुकसान कम होगा और पैदावार भी 30 प्रतिशत तक बढ़ जाएगी।”

इन दोनों सहेलियों का कहना है कि उनका प्रोटोटाइप तैयार है और जल्द ही इसे मार्केट में उतार दिया जाएगा। उन्हें उम्मीद है कि उनका ये प्रोडक्ट्स, मछुआरों और किसानों की मुश्किलों को कम करने में मदद करेंगे और उनकी उत्पादकता को बढ़ा देंगे।

मूल लेखः हिमांशु नित्नावरे 

संपादन- जी एन झा

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