Blessed with a talkative nature, Nisha has done her masters with the specialization in Communication Research. Interested in Development Communication and Rural development, she loves to learn new things. She loves to write feature stories and poetry. One can visit https://kahakasha.blogspot.com/ to read her poems.
क्विक बाइट्स (ख़ास खबरों में से चुनी हुई खबरे)

अपना अपार्टमेंट ब्रेन रिसर्च के लिए दान कर, शर्वरी गोखले मृत्यु के बाद भी याद रखी जाएगी!

शर्वरी गोखले —1974 बैच की आईएएस अफसर और मुंबई की पहली महिला कलेक्टर थी। पिछले साल, कैंसर की वजह से उनकी मृत्यु हो गई लेकिन शर्वरी ने मृत्यु – पूर्व ही अपना अपार्टमेंट “सेंटर फॉर ब्रेन रिसर्च” के नाम कर दिया था। ताकि उनकी संपत्ति देश के काम आ सके।

शिक्षा स्वयं सेवी संस्था

इस दंपत्ति के प्रयासों से सड़को पर भीख मांगने वाले बच्चे आज विदेश में पढ़ रहे हैं!

चेन्नई के एक दंपत्ति, उमा एवं मुथूराम, द्वारा संचालित संस्था ‘सुयम चेरीटेबल ट्रस्ट’ एक एनजीओ है जो सड़कों और गलियों में रहने वाले गरीब परिवारों को पुनर्वासित करने में जुटी हुई हैं। इनके प्रयासों से गरीब और भीख माँगने वाले बच्चे भी विदेशों और प्रतिष्ठित संस्थानों में शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं।
चेन्नई के एक दंपत्ति, उमा एवं मुथूराम, द्वारा संचालित संस्था ‘सुयम चेरीटेबल ट्रस्ट’ एक एनजीओ है जो सड़कों और गलियों में रहने वाले गरीब परिवारों को पुनर्वासित करने में जुटी हुई हैं। इनके प्रयासों से गरीब और भीख माँगने वाले बच्चे भी विदेशों और प्रतिष्ठित संस्थानों में शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं।

नायक भारत

एक जांबाज जासूस का रहस्यमयी जीवन : राॅ के प्रसिध्द मुख्य-संस्थापक आर. एन. काव की याद में!

रामेश्वर नाथ काव भारत की खुफिया एजेंसी राॅ के मुख्य-संस्थापक एवं एक महान स्पायमास्टर थे। निजी जीवन में शांत और व्यक्तिगत, काव एक कुटिल रणनीतिज्ञ और मजबूत संपर्क-सूत्र बनाने में कुशल थे। उन्होने भारत को आधुनिक गुप्तचरी सिखाई, लेकिन भारतीयों के लिए अभी तक वे एक लोकप्रिय नाम नहीं है।

नायक पशुओं का संरक्षण

अपने बेटे की मृत्यु के बाद, पुणे की इस महिला ने अपने दिल और घर के दरवाजे जख्मी पशुओं के लिए खोल दिए!

पद्मिनी स्टम्प और डॉ रवींद्र कासबेकर—पुणे के रहने वाले ये दोनों पशु-प्रेमी मानवता के सर्वश्रेष्ठ उदाहरण है। इनकी पहल, “मिशन पॉसिबल” एक ट्रस्ट हैं जो बेघर जानवरों को बचाता है और उनका इलाज और देखरेख भी करता है। उनका लक्ष्य है कि विदेशी पालतुओं की बजाय इन आवारा पशुओं पर ज्यादा ध्यान दिया जायें और उन्हें एक प्यारा घर मिले।

केरल खेती पर्यावरण

शहर के थकान भरे अस्त-व्यस्त जीवन को छोड़ इस परिवार ने केरल में रखी प्रदूषण मुक्त गाँव की नींव!

ग्लोबल वार्मिंग और प्रदूषण के बढ़ते कहर के बारे में जहाँ एक तरफ हम सिर्फ चिंता कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर केरल के कुछ परिवार जुटे हैं एक जैविक गाँव बनाने में। मोहन चावड़ा के मार्गदर्शन में बन रहा यह गाँव एक प्रेरणा हैं आने वाली पीढ़ियों को एक खूबसूरत दुनिया सौंपने का और बेहतर भारत बनाने का।