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एक मामूली कदम ने मेरी जान बचायी, सही समय पर डायग्नोस हुआ घातक कैंसर

Regular Health Check Up Saved Life, Cancer Diagnosed At Right Time

आमतौर पर कैंसर का पता गंभीर लक्षणों के उभरकर आने या फिर जानलेवा बन जाने के बाद ही चलता है। लेकिन मेहर की कहानी शरीर में साधारण से बदलाव से शुरू हुई थी। 33 साल के मेहर रॉय अपनी फिटनेस को लेकर काफी सजग रहते हैं। नियमित रूप से साल में एक बार अपने शरीर की जांच करवाना उनकी आदतों में शुमार है और उनकी यही आदत उनके लिए एक वरदान साबित हुई।

साल 2021 की शुरुआत में उन्होंने साधारण सा ब्लड टेस्ट CBC (कम्पलीट ब्लड काउंट) करवाया था, जिससे पता चला कि उन्हें एक्यूट लिम्फोसाइटिक ल्यूकोमिया (ALL) बीमारी है। यह एक तरह का ब्लड और बोन मेरो (अस्थि मज्जा) कैंसर है, जो शरीर में बड़ी तेजी से फैलता है।

मेहर ने द बेटर इंडिया को बताया, “CBC एक साधारण सा ब्लड टेस्ट है। लेकिन इसमें ज़रा सी भी गड़बड़ी पाए जाने पर, ब्लड की माइक्रोस्कोप के जरिए जांच की जाती है। मेरे मामले में भी यही हुआ था।”

सेहत को लेकर हमेशा हे जागरूक

मेहर के पिता, साल में एक बार शरीर की नियमित जांच जरूर करवाते थे और आगे चलकर मेहर के लिए भी यह एक आदत बन गई। वह कहते हैं, “मुझे नहीं पता कि मेरे पिता ऐसा क्यों करते थे। शायद, मेरी मां की वजह से। एक समय में वह काफी बीमार रहा करती थीं। इसलिए टीन ऐज से मेरे भी दिल, किडनी और रक्त आदि की जांच होना शुरू हो गई थी।”

मेहर गुजरात के गांधीनगर में जन्मे और पले-बढ़े हैं, लेकिन पिछले 11 सालों से इटली, जर्मनी और अमेरिका जैसे देशों में रह रहे थे। फिर उन्होंने कुछ लोगों के साथ मिलकर एक कंपनी की सह-स्थापना की, जिसका नाम है कोरस वन। इसके बाद, साल 2021 में वह स्विट्जरलैंड चले गए। मेहर दुनिया के किसी भी कोने में क्यों न रहे हों, लेकिन अपने रूटीन चेकअप के लिए वह हर साल भारत आते रहे हैं।

उनके अनुसार भारत की मेडिकल सर्विस बाकी देशों की तुलना में बेहतरीन और सस्ती है। चूंकि वह नियमित तौर पर जांच कराते रहते थे, तो उन्हें अपने शरीर के बारे में अच्छे से पता था। उनके पास एक डाटा इकट्ठा हो गया था जिससे वह अपने शरीर के बारे में काफी बेहतर तरीके से जान गए थे। उन्हें पता था कि उनके शरीर के लिए क्या नॉर्मल है और क्या नहीं।

कैसे डिटेक्ट हुआ कैंसर?

मेहर ने बताया कि साल 2021 की शुरुआत में यानी 6 जनवरी को उन्होंने अपना रूटीन चेकअप करवाया था। उसके कुछ दिनों बाद उन्हें कोविड हो गया। वह कहते हैं, “ठीक होने के बाद, 15 फरवरी को मैंने एक बार फिर से अपना चेकअप करवाया था। कोविड के बाद मुझे काफी कमजोरी महसूस होने लगी थी। मुझे बार-बार नाक में इन्फेक्शन भी हो रहा था। लेकिन सबसे अजीब था मेरे हार्ट रेट (हृदय गति) का बढ़ जाना। ये 55 से 90 बीट प्रति मिनट तक पहुंच रही थी।”

आमतौर पर जब आप शरीर में आने वाले इस तरह के बदलावों के बारे में किसी से कुछ कहते हैं, तो वायरस को इसका जिम्मेदार बताकर नज़रअन्दाज़ कर दिया जाता है। लेकिन मेहर को यह सब ठीक नहीं लग रहा था। उन्होंने एक बार फिर से अपनी जांच कराने का फैसला किया। दरअसल, जो व्यक्ति सालों से अपने हॉर्ट रेट पर नजर बनाए हुए था, उसे पता था कि ऐसा होना बेवजह नहीं हो सकता। कुछ न कुछ गड़बड़ तो जरूर है।

मेहर ने कहा, “मैं उस समय स्विट्जरलैंड में था। 13 अप्रैल को मैंने CBC कराया। 14 अप्रैल को मुझसे अपने परिवार के किसी सदस्य के साथ आने के लिए कहा गया।” अस्पताल की यह भागदौड़ उनके 33वें जन्मदिन से ठीक एक दिन पहले की थी। जांच से पता चल गया था कि मेहर को ब्लड कैंसर है और वह उनके नर्वस सिस्टम तक पहुंच गया है। उनके लगभग छह किलो रक्त में से 2.5 किलो कैंसर से प्रभावित हो चुका था। लेकिन उम्मीद पूरी तरह टूटी नहीं थी, क्योंकि कैंसर अभी प्रारंभिक स्टेज में था।

शुरुआत में ही कैंसर का पता चल गया 

वह बताते हैं, “कुछ कैंसर बड़ी धीमी गति से बढ़ते हैं। इसके लक्षण सामने आने में ही 10 साल लग जाते हैं। लेकिन मेरे मामले में 30 से 40 प्रतिशत रक्त कोशिकाओं को कैंसर होने में सिर्फ दो महीने लगे थे। अगर मैं जांच कराने में दो या तीन हफ्ते की देर कर देता तो मेरा बच पाना मुश्किल था।”

उन्होंने बताया, “बीमारी आक्रामक थी, तो इलाज को आक्रामक होना ही था। मेरा इलाज लगभग ढाई साल तक चलते रहने की उम्मीद है। वैसे इस साल मैं, पहले ही 100 दिन अस्पताल में गुजार चुका हूं।” कैंसर के मरीज की चुनौतियां लंबे समय तक बनी रहती हैं। सफल इलाज के बावजूद, मरीज़ काफी समय तक सामान्य महसूस नहीं कर पाता। दवाईयां काफी स्ट्रांग होती हैं, जो शरीर को तोड़कर रख देती हैं।

कीमोथेरेपी से भले ही लक्षणों में सुधार हो जाए, लेकिन उसके साइड इफेक्ट बने रहते हैं। वह आगे कहते हैं, “अपने इस सफर में मैंने स्विटजरलैंड को काफी नजदीक से जाना है। डॉक्टर, नर्स, बीमा एजेंसियां और बाकी लोगों से मैंने जो भी कहा, उन्होंने उसे समझा और माना। इससे मेरा यह डरावना सफर आसान हो गया। इसके लिए मैं उनका आभारी हूं।”

एक सबक जिसने बचाई जान

मेहर रॉय

मेहर साफ तौर पर कहते हैं, “जरूरत से ज्यादा जांच आपको वहम में डाल सकती है या फिर आप अपनी सेहत को लेकर बेवजह परेशान भी हो सकते हैं।” लेकिन वह सुझाव देते हैं, “हर व्यक्ति को अपने शरीर में होने वाले मामूली से मामूली बदलाव का भी ध्यान रखना चाहिए। शरीर कैसे काम कर रहा है, उसकी सरल ट्रैकिंग जरूरी है।”

उन्होंने बताया, “आपको पता होना चाहिए कि शरीर सामान्य तौर पर कैसा काम कर रहा है। इस पर अपनी नजर हमेशा बनाए रखें। थोड़ा सा भी कुछ असामान्य नजर आए, तो उसे बिल्कुल भी नजरअंदाज न करें। इन दिनों तो स्मार्टवॉच से शरीर की निगरानी आराम से की जा सकती। इससे हृद्य गति और रक्तचाप के आंकड़ों को ट्रैक किया जा सकता है।”

वह सलाह देते हुए कहते हैं, “शरीर में बदलाव नजर आने पर एक बार डॉक्टर से सलाह जरूर लें। अगर ये कैंसर जैसी खतरनाक बीमारी है, तो एक गलत कदम (मसलन गलत इलाज में बिताया गया समय) जानलेवा साबित हो सकता है।”

किस तरह की और कौन सी जांच करवानी चाहिए?

डॉ प्रीति चौधरी जयपुर गोल्डन अस्पताल के रेडियोलॉजी विभाग में सीनियर कंसल्टेंट हैं। उनके अनुसार, कैंसर का अगर शुरुआत में पता चल जाए तो इलाज आसान हो जाता है। वह DR- 70 के बारे में जानकारी देते हुए कहती हैं, यह एक ब्लड टेस्ट है, जिससे 13 प्रकार के कैंसर का पता लगाया जा सकता है।

इसके अलावा कैंसर के लिए और भी कई तरह की जांच की जाती है। जैसे- ब्रेस्ट कैंसर के लिए मैमोग्राम, कोलन कैंसर का पता लगाने के लिए कोलोनोस्कॉपी आदि।

किसी भी बीमारी के लक्षण नजर आने का इंतजार न करें। सेहत संबंधी अन्य समस्याओं का पता लगाने के लिए समय-समय पर मेडिकल परीक्षण करवाते रहें। साथ ही खुद भी अपने शरीर पर ध्यान रखें। 

मेहर की कहानी हम सबके लिए एक सबक है कि कैसे अपने शरीर में होने वाले बदलावों पर नजर रखकर, हम कुछ गलत होने या बीमारी को बढ़ने से रोक सकते हैं।

मूल लेख: रिया गुप्ता

संपादनः अर्चना दुबे

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