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92 वर्षीया ‘अम्मीजी’ के चाय मसाले से शुरू हुआ व्यवसाय, अब बना रहे हैं 40 प्रोडक्ट्स

‘अम्मीजी’ ब्रांड की शुरुआत दिल्ली में रहने वाली अमृता ने अपनी दादी, राजिंदर कौर की मसालों की रेसिपी से की, जो वह पिछले लगभग 72 वर्षों से बना रहीं हैं!

कुछ नया और अलग करने की कोई तय उम्र नहीं होती है। जरूरत होती है तो बस आत्मविश्वास और जज्बे की। अगर आपको खुद पर भरोसा है कि आप कोई काम कर सकते हैं तो एक बार कोशिश ज़रूर करें। आज हम आपको एक ऐसी ही दादी-पोती की कहानी सुनाने जा रहे हैं जिन्होंने अपनी सूझ-बूझ से उद्यम का रास्ता चुना है, यहाँ आपको यह बताना जरूरी है कि दादी की उम्र 92 साल है।

यह प्रेरक कहानी 92 साल की दादी राजिंदर कौर और उनकी पोती अमृता छतवाल की है, जिन्होंने ‘अम्मीजी’ नाम से उद्यम की शुरूआत की है।

दादी-पोती की यह जोड़ी अपने उद्यम के ज़रिए मसाला, पापड़ और अचार जैसे उत्पादों को ग्राहकों तक पहुँचा रही है। दिलचस्प बात यह है कि यहाँ ‘अम्मीजी’ राजिंदर कौर हैं और उनके सभी उत्पाद राजिंदर की रेसिपी से बनते हैं।

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अपनी दादी के बारे में अमृता ने द बेटर इंडिया को बताया, “हमारे व्यापार की नींव दादी ही है। उसके हाथ में जादू है। वह अपनी रेसिपी से किसी का भी दिल जीत सकती है।”

कैसे शुरू हुई मसालों की कहानी

 

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Ammiji
Ammiji’s younger days.

साल 1948 में राजिंदर कौर की शादी अमृतसर में हुई। उस वक्त वह 18 साल की थीं। उन दिनों को याद करते हुए अम्मीजी कहतीं हैं, “मेरी शादी 1948 में हुई। मेरे लिए यह दुनिया साफ अलग थी। ऐसे में एक ही सहारा था चाय। लेकिन उस घर में मुझे चाय भी अच्छी नहीं लगती थी। इसमें चीनी अधिक होती थी और कोई स्वाद नहीं होता था। एक बार मैं बड़ी मुश्किल से अमृतसर के मसाला बाज़ार, मजीठ मंडी गई और वहाँ से अलग-अलग मसाले लेकर आई। मैंने एक हफ्ते तक अलग -अलग मसाले चाय में ट्राई किए।”

कुछ देर रूककर अम्मीजी सोचने लगी मानो वह उस साल में ही पहुँच गई हों और फिर बोली, “मैंने न जाने कितने कप चाय बर्बाद की क्योंकि यह वैसे नहीं बन पा रही थी जैसी मैं बनाना चाहती थी। और एक हफ्ते बाद आखिरकार मेरे मन मुताबिक स्वाद आया। मैं अपनी माँ की रेसिपी ट्राई कर रही थी लेकिन शायद यह भी मुझे नहीं चाहिए थी। इसलिए मैंने रेसिपी से कुछ अलग ट्राई किया और तब जाकर मेरी रेसिपी तैयार हुई। लेकिन इस रेसिपी से मेरी चाय इतनी बढ़िया बन जाती थी मानो सर्दियों की दोपहर में धूप का टुकड़ा और बिल्कुल ऐसा आराम मिलता कि माँ पास हो। मुझे मेरे हौसले को बनाए रखना का ज़रिया मिल गया था।”

अमृता कहतीं हैं कि पिछले 72 सालों से अम्मीजी वही चाय मसाला की रेसिपी इस्तेमाल कर रहीं हैं।

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Grandma-granddaughter duo
Ammiji with Amrita

“वह कहीं ट्रेवल भी करे तो भी उनके सामान में इस चाय मसाले की एक डिब्बी ज़रूर होती है। यही रेसिपी उन्होंने मेरी माँ को सिखाई और अब अब मुझे,” अमृता ने गर्व से बताया। यह वही चाय मसाला है जिसके साथ, उन्होंने अपना ब्रांड अम्मीजी लॉन्च किया था और इसके 100 से भी ज्यादा जार खरीदे जा चुके हैं।

एक उद्यम की शुरुआत

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यह 2015 की बात है जब अमृता ने एक फेसबुक पोस्ट में अम्मीजी के चाय मसाले के बारे में लिखा था। उनके पोस्ट पर बहुत से लोगों ने इसके बारे में पूछा और वहाँ से उन्हें आईडिया आया। अप्रैल 2018 में उन्होंने ‘अम्मीजी’ ब्रांड की शुरुआत की और तब उनके पास सिर्फ एक ही प्रोड्क्ट था उनका चाय मसाला।

अमृता आगे बतातीं हैं, “जब शुरू में इसके बारे में अम्मीजी से बात की तो उत्साह बहुत था। लेकिन वह संदेह में थी कि कैसे यह शुरू होगा और क्या इस तरह के प्रोड्क्ट के लिए कोई मार्किट होगी भी या नहीं।”

 

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Delhi Woman Entrepreneur
Gudnimbu Achar

बिजनेस शुरू होने के दो साल के भीतर ही बहुत से प्रोडक्ट्स जुड़ गए और आज उनके पास लगभग 40 प्रोड्क्ट हैं।

अमृता कहतीं हैं, “बेस्टसेलर प्रोडक्ट की बात करूँ तो चाय मसाला, अचार और पापड़ है। लोगों को पापड़ की वैरायटी पसंद है। पापड़ और वडिया अमृतसर में अम्मीजी के मार्गदर्शन में बनतीं हैं। बाकी सभी प्रोडक्ट्स दिल्ली में हमारे घर पर बनते हैं। अभी मुनाफे के बारे में मैं बात नहीं कर सकती क्योंकि हमने जो इन्वेस्ट किया है वह अभी मिलना शुरू हुआ है।”

कुछ ग्राहकों के फीडबैक के बारे में बात करते हुए अमृता बतातीं हैं, “कुछ कॉल्स जो हमें आतीं हैं उनसे दिल एकदम खुश हो जाता है। एक लड़की ने हमसे गरम मसाला खरीदा और बताया कि वह कैसे इसे अपनी सास से छिपाकर रखती है। खास व्यंजन बनाते समय वह इसका इस्तेमाल करतीं है और परिवार की वाहवाही लुटती है।”

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Delhi Woman Entrepreneur
Handwritten Notes

अमृता कहतीं हैं कि उनके घर से जो भी पैकेट जाता है उस पर वह खुद एक पर्सनल नोट लिखती हैं ताकि ग्राहकों से एक रिश्ता बने।

आगे वह कहतीं हैं, “मैं अपने रेगुलर ग्राहकों पर नजर बनाए रखती हूँ। दरअसल बिज़नेस में यह बहुत ज़रूरी है।”

उनके उत्पाद आज पूरे भारत में जा रहे हैं। ज़्यादातर उन्हें महाराष्ट्र, छतीसगढ़ और ओडिशा से आ रहे हैं और साथ में, असम और नागालैंड से भी उन्हें ऑर्डर मिले हैं। ऑर्डर्स के बारे में अमृता कहतीं हैं कि पहले उन्हें हर दूसरे दिन एक ऑर्डर आता था पर अब सोशल मीडिया मार्केटिंग से यह नंबर बढ़ा है। अब हर दिन उन्हें ऑर्डर्स मिल रहे हैं। आगे की योजना के बारे में वह सिर्फ यही कहतीं हैं कि वह और ज्यादा प्रोडक्ट्स शामिल करेंगे ताकि ग्राहकों को ख़ुशी मिले।

यदि आप इस ब्रांड के बारे में विस्तार से जानना चाहते हैं तो यहाँ क्लिक करें। आप उनके इंस्टाग्राम पेज पर भी जा सकते हैं।

मूल लेख: विद्या राजा

संपादन – जी. एन झा 

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