भारतीय इतिहास की वे काबिल महिलाएं, जिनके बिना संविधान न बनता!
भारतीय इतिहास की वे काबिल महिलाएं, जिनके बिना संविधान न बनता!
राजकुमारी अमृत कौर
यह संविधान सभा का अभिन्न हिस्सा थीं, जो भारत की पहली स्वास्थ्य मंत्री भी बनीं थी। ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस यानी एम्स की स्थापना का श्रेय भी इन्हीं को जाता है।
सरोजिनी नायडू
आज़ादी के बाद, इन्हें उत्तर प्रदेश का राज्यपाल बनाया गया, यानी देश की पहली महिला गवर्नर। सरोजिनी कांग्रेस की पहली महिला अध्यक्ष भी रहीं। यह कवियित्री भी थीं, इन्हें भारत की कोकिला कहा जाता है।
विजयलक्ष्मी पंडित
यह पहली ऐसी महिला थीं, जिन्हें भारत में कैबिनेट मंत्री बनाया गया था। विजयलक्ष्मी, भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू की बहन थीं, आज़ादी से पहले भी वह कैबिनेट मंत्री रह चुकी थीं।
लीला रॉय
संविधान सभा में बंगाल राज्य से इकलौती महिला लीला, 1920 के दशक में बंगाली महिलाओं को बम बनाना सिखाती थीं, लेकिन बाद में उन्होंने इस रास्ते को छोड़ 1939 में कांग्रेस जॉइन कर लिया। यह सुभाष चंद्र बोस की आज़ाद हिन्द फौज की सदस्या भी रहीं।
कमला चौधरी
एक प्रसिद्ध लेखिका होने के साथ यह महात्मा गांधी के साथ जुड़ी हुई थीं, अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की सदस्या थीं और लोकसभा की सदस्या भी चुनी गई थीं।
हंसा मेहता
हंसा मेहता, पत्रकारिता के क्षेत्र से जुड़ी थीं और 1945-46 में अखिल भारतीय महिला सम्मेलन की अध्यक्षा बनीं। बाद में उन्हें संविधान सभा का सदस्य बनाया गया।
रेणुका रे
रेणुका रे पश्चिम बंगाल विधानसभा की सदस्या और मंत्री रहीं। उन्होंने ही बंगाल में अखिल बंगाल महिला संघ और महिला समन्वयक परिषद का गठन किया था।
दुर्गाबाई देशमुख
यह 12 साल की उम्र में ही असहयोग आंदोलन से जुड़ गई थीं। दुर्गाबाई ने महिलाओं की आवाज़ को बल देने के लिए आंध्र महिला सभा की स्थापना की थी। साथ ही ब्लाइंड रिलीफ एसोसिेएशन की भी शुरुआत की थी।
अम्मू स्वामीनाथन
इन्होंने 1917 में मद्रास में महिला भारत संघ का गठन किया। 1942 में भारत छोड़ो आंदोलन में सक्रिय भागीदार होने की वजह से एक साल के लिए वेल्लोर जेल में रहीं और 1946 में मद्रास निर्वाचन क्षेत्र से संविधान सभा का हिस्सा बनीं।
यह संविधान सभा के सदस्यों में अनुसूचित जातिवर्ग से आने वाली एकमात्र महिला सदस्या थीं। इसके अलावा, दकश्यानी विज्ञान में ग्रेजुएशन करने वाली भारत की पहली दलित महिला थीं और 1946 से 1952 तक प्रोविजनल पार्लियामेंट की मेंबर रहीं।
दकश्यानी वेलयुद्ध
पूर्णिमा बनर्जी
पूर्णिमा इलाहाबाद में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस कमेटी की सचिव थीं और सत्याग्रह और भारत छोड़ो आंदोलन से जुड़ी थीं। यह उप्र में आज़ादी की लड़ाई के लिए बने महिलाओं के समूह की सदस्या भी थीं।
एनी केरल से चुनी जाने वाली पहली महिला सांसद थीं और त्रावणकोर राज्य में चल रहे स्वतंत्रता संग्राम में भी शामिल थीं।
एनी मसकैरिनी
बेगम एजाज़ रसूल
संविधान सभा के सदस्यों में यह एकमात्र मुस्लिम महिला थीं। बेगम एजाज़ उत्तर प्रदेश विधानसभा और राज्यसभा की सदस्या भी रहीं।
मालती चौधरी
मालती ने 16 साल की उम्र में शांति निकेतन जाकर रवींद्रनाथ टैगोर से मार्गदर्शन लिया था और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस में शामिल होने के बाद कांग्रेस समाजवादी कर्म संघ की स्थापना की थी।