लता मंगेशकर के शब्दों में: स्वर कोकिला को जीवन में इन ख़ास लोगों से मिली थी प्रेरणा

पिता पंडित दीनानाथ मंगेशकर "मैं गायिका बन पाई, वो उन्हीं की वजह से। उन्होंने मुझे संगीत सिखाया। वह माँ से कहा करते थे कि एक दिन लता बहुत ऊँचे मुक़ाम तक पहुंचेगी, कोई उसकी बराबरी नहीं कर सकेगा।"

के.एल सहगल “उनको मैंने फिल्मों में देखा था। 1945 में जब मैं मुंबई आई तब उन्होंने शहर छोड़ दिया। कभी उनसे मिलने का मौक़ा नहीं मिला, लेकिन बचपन से सहगल साहब मेरे आदर्श थे।"

ग़ुलाम हैदर "बहुत बातें होती हैं कि मुझे इंडस्ट्री में कौन लेकर आया और पहला ब्रेक किसने दिया; आज मैं आपको बताती हूँ कि इसका श्रेय मास्टर ग़ुलाम हैदर को जाता है।"

मदन मोहन "मेरे मदन भईया! मैं सिर्फ़ उनके ही नहीं, उनके पूरे परिवार के बहुत करीब थी।"

पंडित नरेंद्र शर्मा "मैं उनको 'पापा' कहकर बुलाती थी। दिल की बातें, सारी परेशानियां उनको बताती थी। वह मुझे बेटी मानते थे लेकिन हमेशा 'लता जी' कहते थे; मना करने पर भी नहीं मानते।"

किशोर कुमार “हर रक्षा बंधन पर वह मुझसे मिलने आया करते थे। आकर ज़मीन पर बैठ जाते और फिर राखी बंधवाते।”

एस.डी बर्मन और आर.डी बर्मन “बर्मन दादा के साथ मेरा रिश्ता बहुत गहरा था। सबको मालूम था कि जब भी वह खीर बनाते किसी को नहीं बुलाते थे, बस मुझे बुलाकर खिलाते थे। दोनों ही मुझे बहुत मानते थे।"