भारतीय खाने का स्वाद बढ़ाने वाले मसालों का दिलचस्प इतिहास

लाल मिर्च 

साल 1498 में वाक्सो डी गामा इसे अमेरिका से भारत लेकर आए; सबसे पहले उन्होंने मिर्च का स्वाद गोवा का चखाया, इसके बाद पूरा देश मिर्च को जानने लगा। 

फिर भारत ने इसे अपना रूप दिया और आज हमारा देश  मिर्च पैदावार के मामले में काफी आगे और काफी बड़ा निर्यातक है।

धनिया 

जड़ी और मसाले, दोनों ही श्रेणियों में आने वाला धनिया का उपयोग करीब ईसा पूर्व 5000 से हो रहा है। इतिहास कहता है कि हरा धनिया सबसे पहले इटली में पैदा हुआ। 

ईसा पूर्व सातवीं-आठवीं शताब्दी में लिखे गए प्राचीन भारतीय आयुर्वेदिक ग्रंथ ‘चरकसंहिता’ में हरा धनिया (धान्यकम्) का वर्णन है और इसे शरीर और स्वाद में रुचिकर, सुगंधि देने वाला और कफ-वात नाशक बताया गया है।

जीरा 

जीरे का इतिहास रोमन सभ्यता में बड़े पैमाने पर मिलता है। ईरान और मेडिटेरेनियन क्षेत्र से इसने धीरे-धीरे भारत की ओर अपना रास्ता बनाया। बाइबिल में भी इस मसाले का ज़िक्र मिलता है।

लौंग 

चीन से लौंग का उपयोग ईसा से तीन शताब्दी पूर्व से होता चला आ रहा है; वहीं यूरोपीय देशों को इसकी जानकारी 16वीं शताब्दी में तब हुई जब पुर्तगाली लोगों ने मलैका द्वीप में इसे खोज निकाला। 

कहा जाता है कि ईस्ट इंडिया कंपनी ने जब भारत में कारोबार शुरू किया तो उन्होंने दक्षिण भारत में लौंग को उगाया और उसका उत्पादन किया।

हींग 

कुछ लोगों का कहना है कि हींग मुग़ल काल के दौरान भारत आया था क्योंकि यह ईरान और अफ़ग़ानिस्तान में होता था। 

लेकिन दस्तावेजों से यह पता चलता है कि हींग मुग़लों के आने से पहले से ही भारत में इस्तेमाल होता रहा है। संस्कृत में इसे हींगू के नाम से जाना जाता है।