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चंद्रयान-3 के ज़रिए देश चांद पर बड़ी उपलब्धि हासिल करने की दहलीज़ पर खड़ा है। 

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भारत की अंतरिक्ष एजेंसी ISRO जल्द ही चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर पहुंचने की तैयारी कर रही है।  

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इसरो ने 14 जुलाई को आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा से चंद्रयान-3 की लॉन्चिंग की थी। इसके बाद पांच अगस्त को इसने चंद्रमा की कक्षा में प्रवेश किया था।

चंद्रयान-3 के लैंडर मॉड्यूल और प्रणोदन(propulsion)मॉड्यूल मिशन की शुरुआत होने के 35 दिन बाद अलग हो गए थे।  जिसके बाद लैंडर मॉड्यूल की मदद से इसरो ने चंद्रमा के कई तस्वीरें भी जारी की हैं।

हाल में चंद्रयान-3 मिशन का लैंडर मॉड्यूल चांद की कक्षा में चक्कर लगा रहा है और जल्द ही इसकी सॉफ्ट लैंडिंग चाँद की सतह पर की जाएगी।  

 चांद के इसी दक्षिणी ध्रुव पर चंद्रयान-3 के लैंडर मॉड्यूल को उतरकर खोजबीन करनी है, लैंडिंग के बाद यह इस जगह पर मौजूद खनिजों के बारे में पता लगाएगा और डेटा इसरो के पास भेजेगा।

चांद की ओर बढ़ रहे चंद्रयान-3 के लैंडर मॉड्यूल का चंद्रयान-2 के ऑर्बिटर से भी संपर्क हो गया है। इसरो ने इस बात की जानकारी देते हुए कहा-  चंद्रयान-2 ऑर्बिटर ने औपचारिक रूप से चंद्रयान-3 के लैंडर मॉड्यूल का स्वागत किया।

इसरो ने इससे पहले चंद्रयान-2 के ज़रिए चांद के दक्षिणी ध्रुव पर पहुंचने की कोशिश की थी, लेकिन तब चंद्रयान-2 का लैंडर चांद पर सॉफ्ट लैंडिंग करते वक्त क्रैश हो गया था।

ऐसे में अब सबकी नजरें भारत के चंद्रयान-3 पर टिकी हुई हैं। चंद्रयान-3 की सॉफ्ट लैंडिंग न सिर्फ इसरो बल्कि देश के हर एक नागरिक के जीवन का ऐतिहासिक क्षण होगा।