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terrace gardening in delhi

आम से लेकर इलायची तक, घर में 300 से अधिक पौधों की बागवानी करता है दिल्ली का यह युवा

नई दिल्ली में रहने वाले अमित चौधरी करीब 3 साल पहले फैशन डिजाइनिंग में ग्रेजुएशन करने के बाद किसी वजह से डिप्रेशन में चले गए थे। इस वजह से वह तय नहीं कर पा रहे थे कि उन्हें जिंदगी में करना क्या है। इसके बाद उन्होंने बागवानी शुरू करने का फैसला किया, जो बचपन से ही उनका शौक था।

कई लोग शौक से बागवानी करते हैं तो कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जो इस भागमभाग जीवनशैली में शारीरिक श्रम के लिए अपने गार्डन में समय गुजारते हैं। लेकिन आज गार्डनगिरी में हम आपको एक ऐसे युवक से रू-ब-रू करवाने जा रहे हैं जिनके लिए बागवानी एक दवा की तरह है। कभी डिप्रेशन में रहने वाला यह युवा आज टैरेस गार्डनिंग में खूब प्रयोग कर रहा है। 

नई दिल्ली के करावल नगर में रहने वाले अमित चौधरी करीब 3 साल पहले फैशन डिजाइनिंग में ग्रेजुएशन करने के बाद किसी वजह से डिप्रेशन में चले गए थे। इस वजह से वह तय नहीं कर पा रहे थे कि उन्हें जिंदगी में करना क्या है। इसके बाद उन्होंने बागवानी शुरू करने का फैसला किया, जो बचपन से ही उनका शौक था।

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अमित चौधरी

24 वर्षीय अमित द बेटर इंडिया को बताते हैं, “मैं ग्रेजुएशन करने के बाद किसी वजह से काफी डिप्रेशन में था। मैं तय नहीं कर पा रहा था कि मुझे आगे क्या करना है। इसके बाद, मैंने गार्डनिंग करने का विचार किया, जिसके प्रति बचपन से ही मेरा लगाव रहा है। मैंने करीब 10 साल पहले अपने छत पर कुछ पौधे लगाए थे, लेकिन पढ़ाई की वजह से ध्यान नहीं दे पाता था। लेकिन, मैंने अपने टैरेस गार्डनिंग को एक कदम और आगे ले जाने का फैसला किया।“

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इसी विचार के साथ, अमित ने अपने घर के आस-पास उगे कुछ टमाटर के पौधों को  छत पर लाकर लगा दिया। इसके बाद उनका उत्साह बढ़ता गया और आज उनके बगीचे में आम, अनार, अमरूद जैसी फलदार पौधों के अलावा बैंगन, शिमला मिर्च, टमाटर जैसी कई सब्जियां भी लगी हैं। इसके साथ ही, अमित तुलसी, इलायची, अजवाइन, लेमनग्रास जैसी कई औषधीय पौधों की भी बागवानी करते हैं।

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अमित का टेरेस गार्डन

अमित कहते हैं, “मैं पिछले 2 साल से करीब 300 पौधों की बागवानी कर रहा हूँ, मेरे दिन की शुरूआत बागवानी से ही होती है। इससे मुझे जिंदगी में आगे बढ़ने की प्रेरणा मिली। मैंने ठान लिया कि मुझे ताउम्र बागवानी करनी है।”

घर में ही तैयार करने लगे पौधे

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अमित बताते हैं, “अनावश्यक खर्च से बचने के लिए मैं पिछले साल से गुलाब, बोगनवेलिया, अड़हुल, आदि की ग्राफ्टिंग कर घर पर ही पौधे तैयार करता हूँ।“

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इसके अलावा, वह सब्जियों के बीज भी संरक्षित करते हैं, ताकि उन्हें इसे बाजार से न खरीदना पड़े।

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अमित बताते हैं, “मैं सब्जियों के बीज को सीधे गमले में लगाने के बजाय, इसके पौधों को मिट्टी के बेड पर तैयार करता हूँ, जिससे पौधा जल्दी विकसित होता है।“

क्या है तकनीक

अमित कहते हैं, “छत पर बागवानी करने के लिए मिट्टी को तैयार करते समय सबसे अधिक सावधानी बरतनी पड़ती है। क्योंकि, इसमें थोड़ी सी चूक पौधे को नुकसान पहुँचा सकती है। मैं अपने पौधों के लिए मिट्टी को 40 प्रतिशत मिट्टी, 20 प्रतिशत गोबर, 20 प्रतिशत लकड़ी के कण और 20 प्रतिशत बालू से तैयार करता हूँ, ताकि पौधों को जरूरी पोषक तत्व मिलने के साथ ही छत पर ज्यादा भार भी न हो।“

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पौधों के लिए खाद बनाते अमित

अमित अपने पौधों की हर 15-20 दिन में कटिंग करते हैं और तभी करते हैं जब पौधे में फल-फूल लगने का मौसम न हो, इससे पौधे की उत्पादन क्षमता बढ़ती है। वहीं, अपने पौधों को कीटों से बचाने के लिए अमित अपने घर में ही नीम की पत्तियों और हल्दी से कीटनाशक तैयार कर लेते हैं।

एक और खास बात यह है कि अमित अपने परिवार के लिए मौसमी सब्जियों की पूर्ति अपने टैरेस गार्डन से ही कर लेते हैं और इसके लिए बाजार पर उनकी निर्भरता बिल्कुल खत्म हो गई है।

मोहल्ले में लगाते हैं पौधे

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अमित बताते हैं, “मैं पिछले 3 महीने में अपने मोहल्ले में तीन फलदार पौधे लगा चुका हूँ और मेरा संकल्प पूरी जिंदगी हर महीने एक पेड़ लगाने का है, ताकि मैं प्रकृति को बचाने में थोड़ा योगदान कर सकूं।“

शुरू किया अपना यूट्यूब चैनल

अपने बागवानी कार्यों से उत्साहित होकर अमित ने कुछ महीने पहले अपना यूट्यूब चैनल भी लॉन्च किया है। जहाँ वह लोगों को बागवानी से संबंधित महत्वपूर्ण सलाह देते हैं।

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अमित के बागवानी से संबंधित कुछ जरूरी टिप्स

  •   बदलते मौसम में बागवानी को शुरू करें, क्योंकि इस दौरान मौसम संतुलित होने की वजह से पौधे को ज्यादा रिस्क नहीं होता।
  •   शुरूआत सब्जियों से करें, इससे बागवानी की ओर आपका रुझान बढ़ेगा।
  •   पौधों को पर्याप्त धूप लगने दें।
  •   नए पौधों को शाम में लगाएं।
  •   ज्यादा सिंचाई न करें, मिट्टी में सिर्फ नमी बना कर रखें।

अंत में अमित कहते हैं, “एक बार जब आप बागवानी शुरू करते हैं, तो आपको इससे एक जुड़ाव हो जाता है। आप समझने लगते हैं कि पौधों की भी एक भाषा होती है और जब भी पौधे दुःख में होते हैं, आपको इसका एहसास हो जाता है।“

यह भी पढ़ें – 100+ पौधों की बागवानी कर, उनके ज़रिए हिन्दी व्याकरण और विज्ञान पढ़ातीं हैं यह टीचर

आप अमित से 7053223856 पर संपर्क कर सकते हैं।

अगर आपको भी है बागवानी का शौक और आपने भी अपने घर की बालकनी, किचन या फिर छत को बना रखा है पेड़-पौधों का ठिकाना, तो हमारे साथ साझा करें अपनी #गार्डनगिरी की कहानी। तस्वीरों और सम्पर्क सूत्र के साथ हमें लिख भेजिए अपनी कहानी hindi@thebetterindia.com पर!

संपादन – जी. एन झा

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