Placeholder canvas

गमलों में लगाए आंवला, अनार, शहतूत और इंसुलिन भी

फरीदाबाद के रहनेवाले अमित धीमान, पेशे से इंजीनियर हैं लेकिन बागवानी में भी महारथ हासिल कर चुके हैं।

बागवानी के शौकीन लोग अक्सर घरों में जगह के अनुसार छोटा-बड़ा गार्डन बनाते हैं। कोई फूल-फल के पौधों से अपने घर के बगीचे को सजाता है तो कोई किचन गार्डन तैयार करता है। गार्डनिंग एक ऐसा शौक है जो आपको प्रकृति के करीब लाता है। आज हम आपको एक ऐसे ही शख्स से मिलवा रहे हैं जो पिछले कई सालों से अपने घर को हरियाली से भरने में जुटे हुए हैं। 

हरियाणा में फरीदाबाद के रहनेवाले 30 वर्षीय अमित धीमान मैकेनिकल इंजीनियर हैं और आठ सालों से बागवानी कर रहे हैं। उन्होंने द बेटर इंडिया को बताया, “मुझे बचपन से ही पेड़-पौधे लगाने का शौक रहा है। यह शौक मुझे मेरी मम्मी से मिला है। मुझे याद है बचपन में लोग मम्मी को फूलों वाली आंटी कहते थे, क्योंकि वे तरह-तरह के फूलों के पौधे लगाती थीं। लेकिन मैं अपने बगीचे में फूलों के साथ-साथ फल और हरी सब्जी भी उगाता हूं।” 

लगाए सैकड़ों पेड़-पौधे 

अमित कहते हैं, ” लगभग आठ साल पहले मेरे मोहल्ले में पौधे बेचनेवाले एक भैया आए थे। मैंने पहली बार उन्हीं से पौधा खरीदा था। ये सभी पौधे बहुत खूबसूरत थे। लेकिन तब मुझे यह जानकारी नहीं थी कि ये सभी इंडोर प्लांट्स हैं। मैंने इन्हें धूप में रख दिया और सभी पौधे खराब हो गए। इसके बाद, मैंने पेड़-पौधों की किस्मों और उनके रख-रखाव के बारे में जानकारी जुटाना शुरू किया। मैंने शुरुआत में बाजार से 10 गमले खरीदे थे। इसके बाद तो गमलों की संख्या बढ़ने लगी।” 

Faridabad Engineer in His Terrace Garden
अमित का बगीचा

उनके बगीचे में पीपल, बरगद, रामबांस, फाईकस पांडा, मिल्कबुश, नीम, फाईकस बेंजामिन,जेड प्लांट, मेहंदी, पिलखन, सांग ऑफ़ इंडिया, गुड़हल जैसे पौधों के अलावा, आंवला, नीम्बू, अनार, चीनी संतरा, करोंदा, जामुन, शहतूत, चीकू, अंजीर, एप्पलबेर, मोसम्बी, रसभरी, ईमली जैसे फलों के पेड़ भी हैं। इसके अलावा, वह कुछ औषधीय पौधे जैसे आजवाइन, कड़ीपत्ता, मिर्च, इन्सुलिन, पुदीना, पत्थरचटा और एलोवेरा भी उगा रहे हैं।

उनके सदाबहार फूलों के कलेक्शन में, गुड़हल, बोनाकनेर, मोतिया, मोगरा, जूही, मधुकामिनी, मधुमालती, पीलाकनेर, लालकनेर, रातकीरानी, बोगेनविलिया (लाल,पीला,संतरी,सफ़ेद) और मौसमी फूलों में कोचिया, जेनिया, गेंदा, पेटोनिया शामिल हैं। लगभग 100 लीटर के 16 ड्रम में उन्होंने फलदार पौधा लगाया है, ताकि इन्हें बढ़ने के लिए पर्याप्त जगह और पोषण मिले।

अमित ने एक छोटा सा किचन गार्डन भी तैयार किया है, जिसमें बैंगन, शिमला मिर्च, गाजर, धनिया, पालक, मूली, शलगम, चकुंदर के पौधे हैं। सब्जी उगाने के लिए उन्होंने 100 लीटर की पुरानी टंकी का इस्तेमाल प्लांटर के तौर पर किया है। उन्होंने टंकी को दो भागों में बाँट कर प्लांटर तैयार किया है, जिसमें वह तरह-तरह की सब्जियां उगाते हैं। 

Growing Vegetables in Drums

अमित कहते हैं कि गार्डनिंग में सबसे अधिक जरूरत धैर्य की होती है। उन्होंने कहा, “गार्डनिंग में पौधों के सूखने और मरने का क्रम चलता रहता है क्योंकि यह प्रकृति है जो किसी के वश में नहीं। लेकिन इससे मेरा अनुभव ही बढ़ता है, जिसे मैं यूट्यूब के माध्यम से दूसरे लोगों से भी साझा करता हूँ। सबसे अलग बात है कि मुझे सभी तरह के पेड़-पौधे लगाना पसंद है। मैं फोलिएज से लेकर फल-सब्जियों तक, सभी तरह के पौधे अपने घर में लगाना चाहता हूँ।” 

कम मिट्टी और ज्यादा खाद है सफलता का नुस्खा 

अमित कहते हैं कि अक्सर बागवानी करते हुए लोग अपनी पहली असफलता से ही हार मान लेते हैं। उन्हें लगने लगता है कि वे पौधे नहीं लगा सकते हैं या फिर पूरी तरह से किसी माली पर निर्भर हो जाते हैं। ऐसे लोगों को अमित सलाह देते हैं कि बागवानी की शुरुआत अपने इलाके के स्थानीय पौधों से करें। इसके अलावा जो पेड़-पौधे आपको अपने शहर में सड़क के किनारे या सार्वजनिक स्थानों पर दिखते हैं, उन्हें आप लगा सकते हैं। हमेशा छोटे पौधों से शुरुआत करें। 

वह आगे कहते हैं कि पौधों के लिए मिट्टी बनाते समय ध्यान रखे कि यह भुरभुरी हो न कि सख्त। ताकि गमलों में पानी ठहरे नहीं और ज्यादा देर तक नमी बनी रहे। “मैं हमेशा 20% सामान्य मिट्टी में 80% गोबर की खाद या अन्य जैविक खाद मिलाता हूं जैसे केचुआ खाद, घर पर बनी खाद या नीमखली आदि। इस पॉटिंग मिक्स में न तो पानी ठहरता है और पौधों को पोषण भी पूरा मिलता है। मैं वेस्ट डिकम्पोजर, पंचगव्य, जीवामृत जैसी जैविक तरल भी घर पर ही तैयार कर लेता हूं ताकि मेरा बगीचा हमेशा हरा-भरा रहे और किसी भी तरह का कोई रसायन डालने की जरूरत न पड़े,” उन्होंने बताया। 

Flowering Plants in Pot

पिछले एक साल से अमित अपना गार्डनिंग यूट्यूब चैनल, ‘Green Terrace‘ भी चला रहे हैं। उनका कहना है कि वह बागवानी के अपने ज्ञान और जानकारी को ज्यादा से ज्यादा लोगों के साथ साझा करना चाहते हैं ताकि और भी लोगों को मदद मिल सके। “मैं बागवानी के क्षेत्र में ही आगे बढ़ना चाहता हूं और इसे व्यवसायिक स्तर पर ले जाना चाहता हूं। बहुत से लोगों को अपने घरों के बगीचे के लिए पौधों, खाद और सलाह की जरूरत होती है। क्योंकि उनके पास ज्यादा समय नहीं हो पाता है। मैं ऐसे लोगों के लिए बागवानी को आसान बनाना चाहता हूँ,” उन्होंने अंत में कहा। 

अगर आपको इस कहानी से प्रेरणा मिली है और आप अमित से संपर्क करना चाहते हैं तो उनके फेसबुक पेज से जुड़ सकते हैं।

संपादन- जी एन झा

यह भी पढ़ें: ताज़े फलों के लिए नहीं जाते बाजार, छत पर हैं अमरुद, अनार से लेकर जामुन, चीकू तक के पेड़

यदि आपको इस कहानी से प्रेरणा मिली है, या आप अपने किसी अनुभव को हमारे साथ साझा करना चाहते हो, तो हमें hindi@thebetterindia.com पर लिखें, या Facebook और Twitter पर संपर्क करें।

We at The Better India want to showcase everything that is working in this country. By using the power of constructive journalism, we want to change India – one story at a time. If you read us, like us and want this positive movement to grow, then do consider supporting us via the following buttons:

Let us know how you felt

  • love
  • like
  • inspired
  • support
  • appreciate
X