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बिना मिट्टी, कुछ बाल्टियों और मछलियों की मदद से छत पर उगायें जैविक सब्जियां, जानिये कैसे!

पुणे के रहने वाले इंजीनियर और अब एक ‘अर्बन किसान’ समीर, पिछले 5 सालों से अपनी छत पर ‘एक्वापोनिक्स’ तरीके से 63 किस्म की सब्ज़ियां उगा रहे हैं। जिनमें टमाटर, पालक, पुदीना, खीरा, मक्का, स्टीविया और कद्दू शामिल हैं।

पुणे (Pune) में रहने वाले समीर ए. आईटी प्रोफेशनल होने के साथ-साथ एक ‘अर्बन किसान’ भी हैं। लगभग एक दशक से वह सॉफ्टवेयर इंडस्ट्री में काम कर रहे हैं और अब अपना खाना (फल/सब्जियां आदि) खुद उगाते हैं। समीर को किताबें पढ़ने का बहुत शौक है। अपने इस शौक के कारण ही उन्होंने एक बार ‘एक्वापोनिक्स’ विषय पर एक किताब पढ़ी। 38 वर्षीय समीर को यह तकनीक बहुत पसंद आई और उन्होंने खुद इसे ट्राई करने के बारे में सोचा। 

वह कहते हैं कि इस तकनीक के बारे में जानकर उन्हें काफी हैरानी हुई। ‘एक्वापोनिक्स’ दो विधियों का मेल है, जिसका एक भाग एक्वाकल्चर (जलीय कृषि) जैसे मछली पालन तथा दूसरा भाग हाइड्रोपोनिक्स है, जिसके तहत मिट्टी की बजाय पानी में पौधे उगाये जाते हैं। उन्होंने इस तकनीक को ट्राई करने का मन बनाया। 

किताब में दिये गए तरीके का एक्सपेरिमेंट करने के लिए, उन्होंने अपने घर की छत पर बेकार पड़ी दो बाल्टियां ली। एक वाटर पंप लगाया तथा कुछ मछलियां और पाइप खरीदकर लाये। उन्होंने सेट अप किया और नर्सरी से पुदीना लाकर लगाया। लगभग एक हफ्ते बाद, उनके पुदीने में नये पत्ते आने लगे। समीर का एक्सपेरिमेंट सफल रहा और वहीं से उनके ‘बकेटपोनिक्स’ (बाल्टी में एक्वापोनिक्स) तरीके की शुरुआत हुई। 

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समीर कहते हैं, “पुदीने की बड़ी हरी पत्तियाँ और ताजा खुशबू आदि सब काफी अच्छा था। किताब में लिखा था कि ‘मछलियों का अपशिष्ट’, पानी में अमोनिया तथा नाइट्रेट के अच्छे स्त्रोत का काम करता है। जो पौधों के विकास के लिए जरूरी पोषण हैं। यह बात मेरे एक्सपेरिमेंट में बिल्कुल सही साबित हुई।” 

मात्र पुदीना से शुरुआत करने वाले समीर, आज अपनी छत पर इस विधि से 63 किस्म की सब्जियां उगा रहे हैं। इनमें पालक, टमाटर, खीरा, मक्का, स्टीविया, और कद्दू आदि शामिल हैं। 

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Pune
समीर के टेरस फार्म सेट अप का एक दृश्य

शुरुआत में उन्होंने बाल्टियों का ही प्रयोग किया। लेकिन फिर वह अलग-अलग आकार के ड्रम में एक्सपेरिमेंट करने लगे। लगभग एक साल तक मछलियों के लिए विभिन्न आवासों का एक्सपेरिमेंट करने के बाद, आखिरकार उन्होंने ‘फाइबर रिइंफोर्स्ड प्लास्टिक’ (FRP) से बने डबल-डैकर टब का डिजाइन फाइनल किया। यह सेट अप ‘कस्टमाइज़्ड’ है और धूप में लगभग 25 साल तक चल सकता है। 

अपनी तकनीक को निखारा:

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उन्होंने आगे बताया कि ऊपर वाले टब में वह सब्ज़ियां लगाते हैं और नीचे वाले टब में मछलियों को रखा जाता है। नीचे वाले टब से पानी, पंप की मदद से ऊपर पौधों में पहुँचाया जाता है और रीसाइक्लिंग के लिए नीचे वाले टब में भेजा जाता है। अपनी तकनीक को बेहतर करने के लिए समीर ने अलग-अलग किस्म की मछलियों के साथ एक्सपेरिमेंट किये हैं। इनमें कैटफिश, गपी, रोहू, कतला, और कवई शामिल हैं। वह कहते हैं, “कवई मछली की मदद से उत्पादन सबसे ज्यादा होता है, लेकिन यह बहुत महंगी है।”

मछलियों के अलावा, उन्होंने पौधों के लिए पानी और पोषक तत्वों की मात्रा को भी संतुलित रखने के तरीकों पर काम किया है। 

वह कहते हैं, “मेरी मदद करने के लिए और कोई नहीं है। इसलिए इस सिस्टम को अच्छे से सेट अप करने में मुझे कई साल लग गये। छत पर पौधों की देखभाल के बाद अपने खाली समय में, मैं इस तकनीक के बारे में किताबों, वीडियोज, और ऑनलाइन कोर्सेज के माध्यम से और अधिक सीखने की कोशिश करता रहता हूँ।”

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इस ‘अर्बन किसान’ का मानना है कि ज्यादा से ज्यादा लोगों को अपना खाना (फल/सब्जियां आदि) खुद उगाना चाहिए। वह कहते हैं, “अब समय है कि शहरों में ही ज्यादा से ज्यादा खाना उगाया जाए और स्थानीय तौर पर बेचा जाए। इससे हम खाने की बर्बादी को रोक पाएंगे और ज्यादा से ज्यादा ताजा सब्जियां लोगों तक पहुंचेंगी।”

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फार्म में सब्जियों को देखते बच्चे

वह बताते हैं कि पिछले साल एक 10 साल का लड़का उनके ‘टेरेस गार्डन’ को देखने आया था। उसने उनके टब से कच्ची पालक तोड़ी और खा ली। वह कहते हैं, “उसने मुझसे तुरंत कहा कि यह कड़वी नहीं है। मैंने उसे बताया कि यह हरी सब्जी प्राकृतिक पर्यावरण में बिना किसी रसायन के प्रयोग से उगी है, इसलिए कड़वी नहीं है।”

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स्थानीय बाजारों की ज़रूरत:

समीर ने अपना एक ‘सब्सक्रिप्शन मॉडल’ शुरू किया है, जिसके तहत शहरवासी उनसे जैविक सब्जियां खरीद सकते हैं। उनका यह मॉडल छह लोगों के साथ शुरू हुआ। वह कहते हैं, “वे मुझे 250 ग्राम चेरी टमाटर या अन्य किसी भी सब्जी के लिए प्रतिमाह 600 रुपये देते हैं।”

इस तरह के स्थानीय बाजार के आइडिया को आगे बढ़ाने के लिए, वह नियमित रूप से ‘ऑनलाइन वर्कशॉप’ भी करते हैं। साथ ही, हर दिन सुबह साढ़े नौ बजे वह अपने इंस्टाग्राम पर लोगों के गार्डनिंग से जुड़े सवालों का जवाब भी देते हैं। वह कहते हैं, “रत्नागिरी और मुंबई के कुछ गार्डनर, मुझसे लगातार सम्पर्क में रहते हैं और देश के दूसरे हिस्सों से भी लोग गार्डनिंग से जुड़ी कई चीजें पूछते रहते हैं। मेरा बिजनेस मॉडल तैयार है। मुंबई का एक शख्स अपनी छत पर इस तरह का एक फार्म बनवाना चाहता है। लेकिन ऐसे अर्बन किसान और बाजार तैयार करने के लिए मुझे अभी एक इन्वेस्टर की जरूरत है।”

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समीर से इस बारे में अधिक जानकारी लेने के लिए या उनसे जुड़ने के लिए आप उनका इंस्टाग्राम अकाउंट, ‘प्लकइट’ (Pluckit) फॉलो कर सकते हैं। 

मूल लेख: हिमांशु नित्नावरे

संपादन – प्रीति महावर

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