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लॉकडाउन में सुबह-शाम किया बगीचे में काम, कटहल, आम, केला सहित लगा दिए 300+ पेड़-पौधे

केरल के त्रिशूर में रहने वाले 60 वर्षीय केवी बाबूराज पेशे से फोटोग्राफर हैं और पिछले 12 सालों से अपने घर में बागवानी भी कर रहे हैं।

कोरोना महामारी की वजह ,से पिछले एक साल से हम सभी की जिंदगी थम सी गई है। संक्रमण से बचने के लिए हम सभी लगभग अपने-अपने घरों में ही बंद रहे। इस दौरान कई लोगों ने बागवानी में हाथ आजमाया। आज हम आपको केरल के एक ऐसे फोटोग्राफर की कहानी सुनाने जा रहे हैं, जो वैसे तो पिछले कई सालों से बागवानी कर रहे हैं, लेकिन लॉकडाउन के दौरान उन्होंने अपने बगीचे में जो कुछ भी उगाया, उसे एक एल्बम का रूप देकर अपनी यादों को सहेजने का काम किया है। 

केरल के त्रिशूर में इरिंजलाकूडा (Irinjalakuda) के रहनेवाले, 60 वर्षीय केवी बाबूराज पेशे से फोटोग्राफर हैं। 25 साल की उम्र से मीडिया फोटोग्राफी कर रहे बाबूराज को प्रकृति से भी ख़ास लगाव रहा है। बचपन से ही पेड़-पौधे लगाने के शौकीन रहे बाबूराज, पिछले 12 सालों से अपने घर में बागवानी भी कर रहे हैं। उन्होंने अपने घर की लगभग 20 सेंट (लगभग 8700 स्क्वायर फ़ीट) जमीन पर बगीचा तैयार किया है, जिसमें वह सब्जी से लेकर फल तक उगा रहे हैं। द बेटर इंडिया से बात करते हुए, उन्होंने अपने सफर के बारे में बताया। 

नहीं पड़ती बाहर से सब्जियां खरीदने की जरूरत 

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बाबूराज बताते हैं, “मैंने बागवानी की शुरुआत अपने शौक को पूरा करने के लिए किया था। जब अपने कुछ दोस्तों-रिश्तेदारों को बागवानी करते हुए देखा, तो मैंने भी अपने घर में पेड़-पौधे लगाना शुरू कर दिया। शुरुआत से ही, मैं किचन गार्डन पर जोर देने लगा था।”

Kerala Photographer Turned Gardener
Home Gardening

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वह कहते हैं, “मैं मौसम के हिसाब से सभी तरह की साग-सब्जियां उगाता हूँ, जैसे हरी मिर्च, टमाटर, बैंगन, खीरा, गोभी, अरबी, टैपिओका, कद्दू, पेठा आदि। मेरे यहां नौ तरह की हरी मिर्च हैं।” सब्जियों के अलावा, उन्होंने अपने बगीचे में फलों के पेड़ भी लगाए हैं। उनके यहां कटहल, आम, पपीता, चीकू, केला आदि के पेड़ भी हैं। 

बाबूराज की दिलचस्पी खेती करने में भी है। लेकिन अपने प्रोफेशन की वजह से उन्होंने खेती की शुरुआत नहीं की। इसलिए वह अपने घर के बगीचे में ही तरह-तरह की सब्जियां उगा रहे हैं। उन्होंने बताया कि वह जैविक तरीकों से बागवानी करते हैं। 

कैसे बनाते हैं जैविक खाद

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उन्होंने बगीचे में ही एक गड्ढा बनाया है, जिसमें सभी तरह का जैविक कचरा, जैसे बगीचे में गिरनेवाले सूखे पत्ते, टहनियां और किचन से निकलनेवाले फल-सब्जियों के छिलकों को डाला जाता है। इसी में कुछ दिनों में अच्छी जैविक खाद तैयार हो जाती है। वह कहते हैं, “जैविक खाद की लगभग पूरी जरूरत, घर से ही पूरी हो जाती है। इससे उपज भी बहुत अच्छी होती है। मेरे बगीचे से इतनी उपज हो जाती है कि मुझे बाजार से सब्जी खरीदनी नहीं पड़ती है।” 

तैयार की लॉकडाउन गार्डनिंग एल्बम 

बाबूराज ने लॉकडाउन के दौरान बगीचे में सबसे अधिक समय बिताया। इस समय का सदुपयोग, उन्होंने अलग-अलग तरह के पेड़-पौधे लगाने और इनकी देखभाल में किया। आज उनके बगीचे में लगभग 300 पेड़-पौधे हैं। बागवानी के अपने इस अनुभव और सफर को उन्होंने अपने कैमरे में भी कैद किया है और फिर एक एल्बम तैयार किया। 

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Kerala Photographer Turned Gardener
Lockdown Gardening Album

वह कहते हैं, “मैं चाहता था कि मेरे बगीचे की सभी यादें मेरे पास रहें। साथ ही, यह बहुत ही सुखद अनुभव है। लॉकडाउन में बगीचे को पर्याप्त समय देने के कारण, मुझे उपज भी काफी अच्छी मिल रही है। इसलिए मैंने अपनी उपज और बगीचे की तस्वीरें निकालकर ‘गार्डनिंग एल्बम- Krishi Gadha’ तैयार की।” 

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बागवानी के अपने अनुभव को बाबूराज ज्यादा से ज्यादा लोगों के साथ साझा करना चाहते हैं, ताकि और भी लोग बागवानी करने के लिए प्रेरित हों। उनका कहना है कि अगर आप एक बार पेड़-पौधे लगाने की शुरुआत कर दें, तो बाकी सभी चीजें अपने आप होती चली जाती हैं। 

बागवानी शुरू करनेवाले लोगों के लिए वह सिर्फ यही सलाह देते हैं, “आप एक कोशिश करें। कुछ आसान पौधों से शुरुआत करें और फिर धीरे-धीरे आगे बढ़ें। अगर आपके यहां जगह है और धूप भी अच्छी आती है, तो आपको फल-सब्जियां लगाने की भी कोशिश करनी चाहिए। क्योंकि, अपने घर में जैविक खाद से उगी हुई सब्जियों का पोषण और स्वाद बहुत ही अलग होता है। बाजार से लायी सब्जियों के मुकाबले घर में उगी सब्जियों की बात अलग ही होती है। इसलिए हमेशा हरियाली फैलाने की कोशिश करें।” 

संपादन- जी एन झा

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