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    सत्तर-अस्सी का एलबम!

    चुपड़ी, कर्री, भाप उठती रोटी की धूप की बातें संदली शाम, महकी रात का घी पोर पोर में रवाँ रवाँ. ठुमकती भोर दिल के चोर अम्मा के राम पिताजी के सुबह के काम रेडियो पर गाने फुल्ली दीदी के फ़साने छत पर खिलती अचार की बरनियाँ साइकिल सुधारने वाले का स्वैग बनिए की दुकान की […] More