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homestay in Homestay in Bhubaneswar

शहर को बोला गुडबाय! किसी आर्किटेक्ट के बिना ही, जंगल के बीच बनाया खूबसूरत ईको स्टे

इंद्राणी चक्रवर्ती और सौम्य मुखर्जी ने दिल्ली की नौकरी छोड़कर, ओडिशा में एक होमस्टे शुरु किया है। ‘स्वानिर वाइल्डरनेस इकोस्टे’ नाम से शुरु किया गया यह होमस्टे पर्यावरण को ध्यान में रखकर बनाया गया है। हरियाली से घिरे इस होमस्टे में करीब 3,500 से ज्यादा आम, अमरूद, चीकू, अनार और शरीफा के पेड़ लगाए गए हैं।

सुबह सूरज निकलने को है और आपकी आंख ठीक से खुली भी नहीं। तभी दरवाज़े पर एक दस्तक होती है। आप सोचने लगते हैं कि इतनी सुबह कौन हो सकता है? आप दरवाजा खोलकर बाहर झांकते हैं, तो देखते हैं कि बाहर एक छोटी सी काले रंग की चिड़िया आपको देख रही है। स्वनिर वाइल्डरनेस ईको स्टे में आने वाले मेहमानों का स्वागत कुछ ऐसे ही होता है। इस Homestay को 37 वर्षीय इंद्राणी चक्रवर्ती अपने पति सौम्य मुखर्जी के साथ चलाती हैं।

चारो ओर हरियाली से घिरा यह होमस्टे ओडिशा की राजधानी, भुवनेश्वर से 40 मिनट की दूरी पर है। करीब 3500 बड़े-छोटे पेड़-पौधों वाले इस होमस्टे में आप निश्चित रूप से खुद को शहरी जीवन की सभी हलचल से दूर होने और प्रकृति के साथ फिर से जुड़ा हुआ पाएंगे। 

द बेटर इंडिया से बात करते हुए इंद्राणी कहती हैं कि यहां घुसते ही मेहमानों का स्वागत हरे रंग के कई किस्म के पेड़-पौधों से किया जाता है। वह कहती हैं, “यहां हर वह बहाना मौजूद है, जो आपको अपने फोन और दूसरे डिवाइस को दूर रखने और अपने आस-पास की चीज़ों को देखने का मौका देता है।”

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दिल्ली में नौकरी करते हुए कैसे आया Homestay का ख्याल?

Ecostay
Indrani with the support staff of Svanir.

इंद्राणी, खुद को गुवाहाटी की वह लड़की बताती हैं, जिसने दलुआ नाम के एक गांव में बसने से पहले देश की राजधानी, दिल्ली में बड़े बेमन से अपनी जिंदगी के कुछ साल गुजारे। इंद्राणी बताती हैं कि दिल्ली में रहना उनके लिए काफी मुश्किल था। वह कहती हैं, “हमारे पास एक-दूसरे के लिए समय नहीं था, हम डेडलाइन और कमिटमेंट्स की दौड़ में शामिल थे और हमेशा व्यस्त रहते थे। ”

इंद्राणी आगे बताती हैं कि हालांकि पैसे काफी अच्छे मिल रहे थे, लेकिन दिल्ली में काम करते हुए उन्हें कभी शांति का अनुभव नहीं हुआ।

उन्हें भुवनेश्वर वापस आने का विचार तब आया, जब सौम्य के पिता ने वर्षों पहले खरीदी गई ज़मीन को बेचने का फैसला किया। सौम्य कहते हैं कि उनके पिता ज़मीन बेचने का सोच रहे थे, ताकि वे दिल्ली में खुद की संपत्ति खरीद सकें। वह कहते हैं, “हम यह जानते थे कि हम दिल्ली में तो नहीं बसना चाहते। बस इसी विचार ने हमें अपने घर वापस आने का सही कारण दे दिया।”

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सौम्या एक ट्रेवल एजेंसी के लिए काम करते थे और लोगों के ट्रेवेल प्लान में एक अलग तरह का बदलाव देख रहे थे।

सौम्य बताते हैं, “ज्यादा से ज्यादा अर्बन या शहरों में रहने वाले लोग ऐसे होमस्टे और जगहों की तलाश कर रहे थे, जो थोड़े अनोखे और अलग हों। इसी बात को ध्यान में रखते हुए हमने उस प्लॉट पर एक इकोस्टे बनाने का फैसला किया।”

बार-बार आईं परेशानियां पर नहीं रुके कदम

साल 2016 में, सौम्य ने अपनी नौकरी से इस्तीफा दे दिया और भुवनेश्वर चले गए। अपने Homestay के नाम के बारे में बात करते हुए इंद्राणी कहती हैं, “’स्वनिर’ एक संस्कृत शब्द है, जिसका अर्थ है ‘हमारा अपना घोंसला’। ‘स्व’ का अर्थ है ‘अपना’ और ‘नीर’ का अर्थ है ‘घोंसला’ या ‘घर’।”

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अपने पिता, जी बी मुखर्जी की मदद से उन्होंने प्लॉट पर काम करना शुरू किया। सबसे खास बात यह है कि इन दोनों ने हर एक डिजाइन एलिमेंट पर खुद विचार किया और बनाया। इस होमस्टे को बनाने के लिए उन्होंने किसी आर्किटेक्ट की मदद भी नहीं ली। 

दो साल तक पिता-पुत्र की जोड़ी ने संपत्ति बनाने का काम किया, जबकि इंद्राणी ने नौकरी करना जारी रखा। लेकिन 2018 तक, इंद्राणी भी उनके साथ आ गईं। हांलाकि उन्हें शायद ही पता था कि रास्ते में कुछ मुश्किलें और आने वाली हैं। जब इको स्टे मेहमानों के स्वागत के लिए तैयार था, तब वहां एक चक्रवात आया।

Ecostay
Ishaan with his great grandfather.

इंद्राणी बताती हैं, “हमारे पास जो भी सॉफ्ट फर्निशिंग थी, वह नष्ट हो गई। टिन की छत भी उड़ गई। सभी पेड़ गिर गए और हमें इसे फिर से बनाने में लगभग एक साल लग गया।”

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दिसंबर 2019 तक, स्वनिर एक बार फिर मेहमानों के स्वागत के लिए तैयार था। लेकिन तभी मार्च 2020 में, COVID-19 ने दस्तक दे दी। फिर भी, इस जोड़े ने उम्मीद नहीं छोड़ी और इको स्टे को सही मायने में स्वागत योग्य बनाने के लिए जी-जान से लगे रहे।

कैसा है इस Homestay में रुकने का अनुभव?

मई 2022 में, इस होमस्टे में रुकीं गेस्ट इतिश्री सोशल मीडिया पर लिखती हैं, “चारो ओर प्राकृति से घिरे हुए होमस्टे में अच्छे लोग, स्वादिष्ट और स्वास्थ्य से भरपूर भोजन मिलता है। यह शहर से अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है, लेकिन शहरी हलचल से बहुत दूर है।”

होमस्टे एक एकड़ में फैला हुआ बागान है, जहां मेहमानों के लिए चार बड़े कॉटेज बनाए गए हैं। सौम्य कहते हैं, “हमने अपने मेहमानों को बेहतर अनुभव देने के लिए केवल स्थानीय रूप से उपलब्ध चीज़ों का उपयोग किया है और पारंपरिक ट्राइबल आर्किटेक्चर की नकल की है। हमारे सभी कॉटेज में बड़ी खिड़कियों के साथ, अलग-अलग सिट-आउट बरामदे हैं।” 

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इस होमस्टे में प्रवेश करते ही आपको हाथ से पेंट की गईं सुंदर दीवारें नजर आती हैं।

कितना आया खर्च?

इस Homestay को बनाने में 1.4 करोड़ का खर्च आया। यहां कॉटेज की निचली दीवार पर संथाल आर्ट से कलाकारी की गई है। एक एकड़ की संपत्ति पर आम, अमरूद, चीकू, अनार और शरीफा के पेड़ हैं, जिनमें काफी मात्रा में फल होते हैं। 

इंद्राणी आगे कहती हैं, “हमने पक्षियों को खिलाने के लिए सिंगापुर के कई चेरी के पेड़ भी लगाए हैं। हम उनके लिए अनाज और फल नहीं रखना चाहते थे, लेकिन पक्षियों के लिए जितना हो सके इसे प्राकृतिक बनाना चाहते थे।” इकोसिस्टम की सुंदरता वास्तव में जादुई है। इंद्राणी कहती हैं कि एक एकड़ की इस ज़मीन पर वे उस सुंदरता को बनाने में कामयाब रहे हैं।

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रेन वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम भी है यहां

इंद्राणी बताती हैं कि यहां, ग्रे वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम भी स्थापित किया गया है, जिसमें बाथरूम से पानी सीधे बगीचे में जाता है। इसके अलावा, हम ड्रिप सिंचाई तकनीक का इस्तेमाल करते हैं, जिससे पानी का उपयोग कम हो जाता है। बाथरूम में जान-बूझकर शावर नहीं लगाया गया है। वह कहती हैं, “हम अपने मेहमानों को नहाने के लिए बाल्टी और मग देते हैं।”

इसके अलावा, मेहमान जिस चीज़ का सबसे ज्यादा मजा यहां लेते हैं, वह है यहां का भोजन। इसकी पूरी बागडोर इंद्राणी के हाथों में है। वह कहती हैं, “मुझे अपने मेहमानों के लिए खाना बनाना बहुत पसंद है। यह मेरे लिए स्ट्रेस दूर करने का एक तरीका भी है।”

वह कहती हैं, “प्रत्येक भोजन जो हम परोसते हैं, उसे मैं तैयार करती हूं। बंगाली खाने के अलावा, मैं कोरियाई व्यंजनों के साथ भी प्रयोग कर रही हूं। फिलहाल जो चाइनीज़ व्यंजन मैं बनाती हूं, वे सबको काफी पसंद आते हैं।”

‘हर मेहमान हमें समृद्ध बनाता है’

Ecostay
Happy guests

कपल का कहना है कि जो भी गेस्ट उनके पास आते हैं, उन सभी का एनर्जी लेवल बढ़ जाता है। वह कहती हैं, “जब हमारे पास मेहमान आते हैं, तो हम हमेशा बहुत समृद्ध महसूस करते हैं। उनके साथ हमारी हर बातचीत से हमें कुछ नया सीखने का मौका मिलता है। सिर्फ हम ही नहीं, हमारे साढ़े तीन साल के बेटे ने भी हमारे मेहमानों के साथ बिताए समय का आनंद लेना शुरू कर दिया है।”

इंद्राणी बताती हैं कि इतनी छोटी उम्र में ही उनका बेटा संपत्ति पर मौजूद विभिन्न पेड़ों और पक्षियों की पहचान कर सकता है। लेकिन जिस चीज़ में उसे सबसे ज्यादा मज़ा आता है वह है कीचड़ में खेलना। 

अब तक स्वनिर Homestay में, उन्होंने 60 से ज्यादा परिवारों का स्वागत किया है और कई और परिवारों की प्रतीक्षा कर रहे हैं, क्योंकि राज्य में पर्यटन सीज़न अभी शुरू हो रहा है। इस होमस्टे को बनाने का श्रेय इंद्राणी अपनी 66 वर्षीया सास गौरी मुखर्जी को भी देती हैं, जिनका उन्हें बहुत समर्थन मिला है। वह कहती हैं, “मेहमान आसपास होने पर वह किचन में लगातार मेरी मदद करती हैं। वह एक मजबूत स्तंभ की तरह हैं, हर बार जब हम निराश होते हैं, तो वह हमें काफी प्रोत्साहित करती हैं। वह मेरी हीरो हैं।”

फिलहाल, पड़ोसी गांव के छह परिवार हैं, जो अलग-अलग कामों के लिए स्वानिर से जुड़े हुए हैं। इंद्राणी गर्व के साथ बताती हैं कि एक माली को छोड़कर, उनके यहां सभी महिला कर्मचारी हैं।

कैसे पहुंचे इस Homestay तक?

प्लेन सेः होमस्टे से भुवनेश्वर एयरपोर्ट 21 किमी की दूरी पर है।

रोड सेः दलुआ गांव में बना यह Homestay, भुवनेश्वर और कटक से बराबर दूरी पर है (23 किमी) और दोनों जगह से ड्राइव करके जाया जा सकता है।

किरायाः Rs. 3600 से 4800/night।

होमस्टे बुकिंग के लिए इंद्राणी को +919678076450 पर कॉल कर सकते हैं।

मूल लेखः विद्या राजा

संपादनः अर्चना दुबे

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