जानिए भारत के खेल-गाँव के बारे में, जहाँ हर घर में मिलेंगें खिलाड़ी!

छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में स्थित पुरई गाँव भारत के खेल-गाँव के नाम से मशहूर है। इस गाँव में हर एक घर में आपको खिलाड़ी मिल जायेंगें। पिछले साल ही भारतीय खेल प्राधिकरण ने गाँव के 12 बच्चों को तैराकी के लिए चुना है। इन बच्चों को ओलिम्पिक के लिए तैयार किया जायेगा।

क्सर हम किसी न किसी को कहते सुनते हैं कि अगर आप ध्यान से देखें, तो आपको भारत के हर गली-मोहल्ले में एक से एक बेहतर खिलाड़ी मिल जाए। हमारे देश में खेल-प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है और ये बात समय-समय पर हर एक खेल में हमारे खिलाड़ी साबित करते आ रहे हैं।

पिछले साल, सितंबर में एक ही गाँव से भारतीय खेल प्राधिकरण ने 12 बच्चों को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर तैराकी के लिए चुना था। ये सभी बच्चे 10 से 13 साल तक की उम्र के हैं और छत्तीसगढ़ के गाँव पुरई से ताल्लुक रखते हैं। इससे भी ज्यादा दिलचस्प बात यह है कि इन 12 बच्चों में से 10 बच्चे एक ही खानदान से हैं।

एक ही गाँव से इतने बच्चों का तैराकी के लिए चयनित होना; देश के अन्य भागों के लोगों के लिए भले ही नई बात है। पर इस गाँव के लोगों को इस बात की कोई हैरानी नहीं है। क्योंकि छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में स्थित यह गाँव, पहले से ही भारत के खेल-गाँव के नाम से मशहूर है।

तैराकी का ट्रायल देते पुरई गाँव के बच्चे

इस गाँव के हर एक घर में आपको कम से कम एक खिलाड़ी तो मिल ही जायेगा और इन खिलाड़ियों ने जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर अपने गाँव का नाम रौशन किया है। गाँव का एक खिलाड़ी तो इंटरनेशनल खो-खो मैच में भारत का प्रतिनिधित्व भी कर चुका है।

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गाँव की इस प्रतिभा के बारे में साल 2017 में ‘हमर छत्तीसगढ़ योजना’ के दौरान पता चला था। दरअसल, इस योजना के तहत राज्य भर की सभी ग्राम पंचायतों के मुखिया व सरपंचो को रायपुर भ्रमण पर बुलाया गया था। उस समय पुरई गाँव के सरपंच सुखित यादव ने गाँव की इस ख़ासियत के बारे में लोगों को बताया।

उन्होंने बताया कि गाँव के हर घर में कम से कम एक खिलाड़ी है। खेलों की बदौलत ही आज गाँव के 40 से भी ज्यादा युवा पुलिस, सेना और व्यायाम शिक्षक की नौकरियों में हैं। इन खिलाड़ियों को अभ्यास में कोई समस्या न हो इसलिए गाँव में एक मिनी स्टेडियम भी बनवाया गया है।

पहले गाँव में खुला मैदान तो था, लेकिन अभ्यास के दौरान वहाँ आने-जाने वालों की वजह से असुविधा होती थी और खेल में व्यवधान भी पड़ता था। मिनी स्टेडियम बन जाने से खिलाड़ी अब अपना पूरा ध्यान खेल पर लगा सकते हैं। खिलाड़ियों को बेहतर सुविधा मुहैया कराने और उनका हुनर निखारने के लिए ही ‘ग्राम समग्र विकास योजना’ के तहत 31 लाख रुपए की लागत से यह मिनी स्टेडियम बनावाया गया।

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यादव ने बताया कि खेलों के कारण गाँव में लोग स्वास्थ्य और स्वच्छता के प्रति भी जागरूक हैं। इससे यहाँ स्वच्छ भारत मिशन के कार्यो को भी अच्छी गति मिली है। खेलों के साथ-साथ गाँव वाले शिक्षा और बच्चों के कौशल विकास को लेकर भी सजग रहते हैं।

गाँव के 12 बच्चों का एक साथ तैराकी के लिए चयन; किसी उपलब्धि से कम नहीं है। इन बच्चों को गुजरात के गाँधीनगर में स्थित भारतीय खेल प्राधिकरण द्वारा ओलिम्पिक के लिए ट्रेनिंग दी जाएगी। बच्चों की प्रतिभा को निखारने का श्रेय उनके कोच और गाँव के ही एक निवासी ओम ओझा को जाता है, जिन्होंने बच्चों को एक छोटे-से तालाब में तैराकी के गुर सिखाकर उन्हें इस काबिल बनाया है।

उम्मीद है कि देश के इस खेल-गाँव से लगातार ऐसी प्रतिभाएँ आगे आती रहेंगी और राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भारत का नाम रौशन होता रहेगा।


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