Search Icon
Nav Arrow

मिलिए भारत की 11 वर्षीय क्लाइमेट एक्टिविस्ट रिधिमा पांडे से!

रिधिमा ने अपना पहला पेटीशन भारत सरकार के खिलाफ़ 9 साल की उम्र में फाइल किया था!

हाल ही में अमेरिका में हुए यूएन क्लाइमेट एक्शन समिट में 16 साल की स्वीडिश पर्यावरण एक्टिविस्ट, ग्रेटा थनबर्ग की स्पीच ने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी तरफ खींचा है। क्लाइमेट चेंज पर दुनिया के लीडर्स का जो अनदेखा रवैया रहा है, उस पर ग्रेटा ने गुस्सा जताया। इस मुद्दे पर ग्रेटा की जंग बहुत पहले ही शुरू हो गयी थी और आज वह क्लाइमेट के लिए हो रहे सबसे बड़े प्रोटेस्ट का चेहरा बन चुकी हैं।

पर इस संघर्ष में ग्रेटा अकेली नहीं है, बल्कि पूरी दुनिया से उनके साथ और 15 युवाओं का नाम शामिल होते हैं, जिन्होंने सबसे ज़्यादा प्रदूषण फैलाने वाले पांच देशों- अर्जेंटीना, ब्राज़ील, फ्रांस, जर्मनी और टर्की, के खिलाफ़ पेटीशन फाइल किया है। 12 देशों से आने वाले इन 16 युवाओं की उम्र 8 साल से 17 साल के बीच है। ये सभी बच्चे, बेशक अलग-अलग बैकग्राउंड और संस्कृति से आते हैं, लेकिन इनकी सोच, इनका लक्ष्य एक है-अपने भविष्य को बचाना।

साभार

इस फ़ेहरिस्त में एक भारतीय नाम भी शामिल है और वह है उत्तराखंड की 11 वर्षीय रिधिमा पांडे का। यूएन समिट में अपना परिचय रिधिमा ने ‘नमस्ते’ के साथ शुरू किया। फिर उन्होंने आगे कहा,

Advertisement

“मैं यहाँ हूँ क्योंकि मैं चाहती हूँ कि विश्व के लीडर क्लाइमेट चेंज को रोकने के लिए कुछ करें। अगर यह नहीं रुका तो यह हमारे भविष्य को हानि पहुंचाएगा।”

रिधिमा ने अपना पहला पेटीशन भारत सरकार के खिलाफ़ 9 साल की उम्र में फाइल किया था। साल 2017 में उन्होंने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल को सबमिट किये अपने पेटीशन में कोर्ट से दरख्वास्त की थी कि भारत सरकार को क्लाइमेट चेंज को रोकने और कम करने के लिए प्रभावी और विज्ञान पर आधारित कदम उठाने चाहिए। साथ ही, उन्होंने लिखा कि सरकार को एक कार्बन बजट बनाना चाहिए और साथ ही, वे एक नेशनल क्लाइमेट रिकवरी प्लान भी तैयार करें।

साल 2017 में पेटीशन फाइल करने के बाद एक मीडिया साक्षात्कार के दौरान रिधिमा ने कहा,

Advertisement

“मेरी सरकार जो कि क्लाइमेट स्थिति को बिगाड़ रहे ग्रीन हाउस गैस उत्सर्जन को रेग्युलेट और कम करने के लिए कदम उठाने में असफल रही है। यह मुझे और भविष्य की पीढ़ियों को प्रभावित करेगा।”

रिधिमा पाण्डेय (साभार)

इसके बाद, उन्होंने ईंधन पर बात करते हुए कहा कि हमारे देश में पारम्परिक ईंधन की जगह जैविक ईंधन के विकल्प लाने की पूरी क्षमता है। पर किसी का भी इस पर ध्यान नहीं है। इसलिए उन्होंने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल से गुहार लगाई है।

रिधिमा की ओर से यह पेटीशन पर्यावरण वकील राहुल चौधरी ने दायर किया और इस केस में उनके साथ रितविक दत्ता और मीरा गोपाल, रिधिमा का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं।

Advertisement

क्लाइमेट चेंज पर इतनी सी उम्र से ही सोचने और कुछ कर गुजरने का हौसला और जज़्बा, रिधिमा को विरासत में मिला है। उनके पिता दिनेश पांडे खुद एक क्लाइमेट एक्टिविस्ट हैं और पिछले दो दशकों से पर्यावरण के अधिकारों के लिए चल रहे अभियान का हिस्सा हैं।

इंडिपेंडेंट को दिए एक इंटरव्यू में दिनेश पांडे ने बताया कि वे हमेशा से अपनी बेटी को पर्यावरण के मुद्दों के बारे में बताते रहे हैं।

“एक दिन, उसने मुझसे पूछा कि डैडी आप इन मुद्दों को उठाते हैं और कुछ भी नहीं हुआ, तो आप कोर्ट में इन मुद्दों पर बात क्यों नहीं कर रहे हैं? फिर उसने निश्चय किया कि वह यह करना चाहती है।”

Advertisement
अपने पिता दिनेश पाण्डेय के साथ रिधिमा (साभार)

साल 2004 में आई सुनामी के बाद, देश में सबसे बड़ी प्राकृतिक आपदा 2013 की उत्तराखंड बाढ़ थी और इसके बाद से ही, भारी बारिश, तूफ़ान और बाढ़ आदि का सिलसिला जारी है। आगे आने वाले समय में स्थिति और भी गंभीर हो जाएगी और फिर शायद तब हमारे हाथ में कुछ भी न बचे।

चिल्ड्रेन वर्सेस क्लाइमेट क्राइसिस वेबसाइट पर रिधिमा ने साफ़ शब्दों में अपने बायो में लिखा है,

“मुझे एक अच्छा भविष्य चाहिए। मैं अपने भविष्य को बचाना चाहती हूँ। मैं हमारे भविष्य को बचाना चाहती हूँ। मैं आने वाली सभी पीढ़ियों के बच्चों और लोगों के भविष्य को बचाना चाहती हूँ।”

Advertisement

हमें गर्व है कि रिधिमा पांडे जैसे बच्चे, हमारे देश का भविष्य हैं, जो न सिर्फ़ अपना बल्कि आने वाली हर एक नस्ल का भविष्य बचाने की कवायद में लगे हैं।

संपादन: भगवती लाल तेली


यदि आपको इस कहानी से प्रेरणा मिली है, या आप अपने किसी अनुभव को हमारे साथ साझा करना चाहते हो, तो हमें hindi@thebetterindia.com पर लिखें, या Facebook और Twitter पर संपर्क करें। आप हमें किसी भी प्रेरणात्मक ख़बर का वीडियो 7337854222 पर व्हाट्सएप कर सकते हैं।

Advertisement
close-icon
_tbi-social-media__share-icon