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20 घंटे की नौकरी, गर्भावस्था और उस पर BPSC जैसी कठिन परीक्षा, लेकिन DSP बनकर रहीं बबली

संघर्ष की जीती जागती मिसाल हैं बिहार की रहनेवाली बबली सिंह, जिन्होंने तमाम रुकावटों के बावजूद, पूरे जज़्बे के साथ प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी की और BPSC के रिज़ल्ट ने उनकी ज़िंदगी बदल दी। कभी जिन अफ़सरों को वह सैल्यूट किया करती थीं, आज उनकी बॉस बन चुकी हैं। पढ़ें कांस्टेबल से सीधे DSP बनीं बबली कहानी।

इरादा मज़बूत हो तो रुकावटें भी सफल होने से नहीं रोक सकतीं। संघर्ष की जीती जागती मिसाल, DSP बबली सिंह ने यह साबित कर दिया है। कांस्टेबल की 20-20 घंटे की नौकरी, उस पर गर्भावस्था की मुश्किलें और बिहार लोक सेवा आयोग यानी बीपीएससी जैसी कठिन परीक्षा; कोई भी रुकावट बबली को उनके लक्ष्य से डिगा नहीं सकी। 

अगस्त में निकले बीपीएससी के रिज़ल्ट ने बबली को कांस्टेबल से सीधे डीएसपी की पोस्ट तक पहुंचा दिया है। कल तक बबली जिन अफ़सरों को सैल्यूट करती थीं, अब वे बबली के अंडर काम करेंगे। वह बिहार की लड़कियों के लिए रोल मॉडल बन गई हैं।

सरकारी नौकरी को ही क्यों दी प्राथमिकता?

बबली सिंह ने द बेटर इंडिया को बताया कि घर की ख़राब आर्थिक स्थिति की वजह से वह हमेशा से सरकारी नौकरी करना चाहती थीं। इसमें कम से कम जॉब के सुरक्षित रहने की गारंटी होती है। दरअसल, बबली के पिता तुलसी प्रसाद, गया के एक छोटे से किसान हैं और एक स्कूल बस भी चलाते हैं। घर में बबली की चार बहनें और एक भाई हैं। 

वह बताती हैं कि आज से क़रीब सात साल पहले, 2015 में उन्हें पुलिस विभाग में कांस्टेबल की नौकरी मिली। उन्होंने पहले से ही सोच रखा था कि जो भी पहली नौकरी मिलेगी वह कर लेंगी। इसलिए खगड़िया में कांस्टेबल के पद पर ज्वाइन कर लिया। लेकिन यह उनकी मंज़िल नहीं थी। वह आगे भी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करके कुछ बड़ा करना चाहती थीं।

DSP बबली को कैसे आया BPSC की परीक्षा देने का ख़्याल?

बबली बताती हैं कि 2013 में उनकी शादी हुई और बोध गया शहर में उनका ससुराल है। पति रोहित सिंह का वहीं एक छोटा सा बिज़नेस है। वह कहती हैं, “मेरे पति जानते थे कि मैं आगे पढ़कर कुछ बड़ा करना चाहती हूँ। उन्होंने ही मुझे विभाग में आगे बढ़ने और बीपीएससी का एग्ज़ाम देने के लिए प्रोत्साहित किया।” 

ससुराल में बबली को उनकी दोनों जेठानियों से भी पढ़ने और आगे बढ़ने का हौसला मिला। उन्होंने बबली पर घर के कामों का ज़्यादा बोझ नहीं डाला, और परिवार के लिए खाना बनाने से लेकर बाकी सभी ज़िम्मेदारियां खुद उठाईं। बबली भावुक होकर बताती हैं कि जिस तरह का माहौल ससुराल में मिला, वह बहुत अच्छा था। अगर वह मायके में होतीं तो शायद यह सफलता ना मिल पाती।

एग्ज़ाम क्लियर करने के रास्ते में काफ़ी मुश्किलें आईं 

बबली बताती हैं, “ससुराल का पूरा सपोर्ट मिलने के बाद भी बीपीएससी निकालना बहुत आसान नहीं था। हर कोई जानता है कि पुलिस की नौकरी 24×7 होती है। कई बार 20-20 घंटे ड्यूटी करनी पड़ती थी। ऐसे में इतनी थकान होती थी कि उसके बाद पढ़ने का बिलकुल मन नहीं करता था। इसके अलावा, जब मेंस एग्ज़ाम के लिए बुलावा आया, उस दौरान मैं गर्भवती थी। नौकरी, ऐसी अवस्था और पढ़ाई, तीनों चीज़ों को बैलेंस कर पाना बहुत मुश्किल था। लेकिन मैं बीपीएससी में पहले दो अटेम्प्ट कर चुकी थी और ये तीसरा अटेम्प्ट था, मैं इसे बेकार नहीं जाने देना चाहती थी। आख़िर मैंने छह महीनों की छुट्टी ली, और पटना जाकर पूरी तरह अपनी पढ़ाई पर फ़ोकस किया।” 

DSP बबली को मिली 208वीं रैंक

बिहार लोक सेवा आयोग यानी बीपीएससी ने 689 पदों पर भर्ती के लिए लिखित परीक्षा का आयोजन किया था, जिसमें से 685 को सफल घोषित किया गया। 13 अप्रैल, 2022 को मुख्य परीक्षा का नतीजा आने के बाद कुल 1838 उम्मीदवारों को इंटरव्यू के लिए बुलाया गया था। एग्ज़ाम में कुल 1768 उम्मीदवार शामिल हुए थे। अगस्त में बिहार लोक सेवा आयोग की इस परीक्षा का रिज़ल्ट घोषित किया गया था। 

साल 1995 में जन्मीं 27 साल की बबली इसमें पास हुईं और उन्हें 208वीं रैंक मिली। बबली की कामयाबी को हर किसी ने सराहा है। आईएएस अवनीश शरण ने भी ट्वीट कर बबली की संघर्ष की कहानी को सबसे शेयर किया और उनके कठिन परिश्रम और चुनौतियों को दूसरों के लिए प्रेरणा बताया।

बचपन में DSP बबली को पढ़ाई से करना पड़ा समझौता 

बचपन में अपने कठिन पारिवारिक हालातों के बारे में बताते हुए बबली कहती हैं, “मुझे हाईस्कूल में विज्ञान विषय लेना था, लेकिन वह विषय बहुत पढ़ाई मांगता है। दूसरे, मुझे पढ़ाई के लिए बाहर भी जाना पड़ता। ऐसे में मां सुनीला देवी ने कहा- मेरे और भी चार बच्चे हैं। मुझे सबको देखना है। आख़िर मैंने मन मारकर आर्ट्स से पढ़ाई की। सच तो यह है कि वहां केवल डिग्री के लिए पढ़ाई हो रही थी, ताकि छात्रों को कोई ठीक-ठाक नौकरी मिल सके।” 

बबली ने मगध यूनिवर्सिटी के अंतर्गत पड़ने वाले गया कॉलेज से ग्रेजुएशन की डिग्री ली है। इससे पहले गया कॉलेज से ही उन्होंने 12वीं भी पास की। 

Babli with her daughter Aarvi

अब उनकी एक सात महीने की बेटी आरवी भी है।

मुश्किल घड़ी में भाई ने किया सबसे ज़्यादा सपोर्ट 

बबली के मुताबिक़, उनके बड़े भाई का उनकी सफलता में बहुत योगदान रहा है। वह गया में ही एक टीचर हैं। 

बबली बताती हैं, “जब पहले और दूसरे अटेम्प्ट में मेरा बीपीएससी क्लियर नहीं हो सका; तब वे ही थे जिन्होंने मुझे एक और कोशिश करने के लिए प्रोत्साहित किया। वह कहते- जो भी एक-दो नंबर की कमी रह गई है, उसे इस बार पूरा करो। इसके अलावा भी मेरी हर परेशानी में बड़े भाई मेरे साथ हमेशा खड़े रहे।” 

खगड़िया से इसी साल, यानी 2022 के जुलाई महीने में ही बबली का ट्रांसफर बेगूसराय पुलिस लाइन में हुआ है। फिलहाल उन्हें डीएसपी पद की ट्रेनिंग के लिए राजगीर, बिहार स्थित पुलिस ट्रेनिंग एकेडमी भेजा गया है। 

एसपी बेगूसराय योगेंद्र कुमार ने उनको इस सफलता के लिए सम्मानित भी किया। अपने सपनों का पीछा कर रहीं बाकी लड़कियों के लिए भी बबली का यही संदेश है कि- कड़ी मेहनत करके मंज़िल ज़रूर मिलती है।

संपादन: भावना श्रीवास्तव

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