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9 साल की उम्र से बेचते थे अखबार, आज हैं IFS अधिकारी

IFS Officer P Balamurugan

चेन्नई के कीलकट्टलाई में जन्मे बालमुरुगन के पास कभी अख़बार तक पढ़ने के पैसे नहीं होते थे, तब पढ़ने के लिए उन्होंने 9 साल की उम्र में अखबार बेचना शुरू किया और मेहनत कर बने गए अधिकारी।

ज़रा सोचिए जिस घर में 8 भाई-बहन हों, पिता ने साथ छोड़ दिया हो और पढ़ाई करने के लिए 9 साल की उम्र में अखबार बेचना पड़े, ऐसे में अफसर बनने का सपना देख पाना भी बड़ी बात है! लेकिन पी बालमुरुगन ने न सिर्फ यह सपना देखा, बल्कि हर मुश्किल से लड़कर IFS ऑफिसर बन अपने सपने को पूरा भी किया।

चेन्नई के कीलकट्टलाई में जन्मे बालमुरुगन की माँ ने अपने 9 बच्चों को अकेले ही पाला। वह चाहती थीं कि उनके बच्चे पढ़-लिखकर अपने पैरों पर खड़े हों। लेकिन बालमुरुगन के पास तो अख़बार तक पढ़ने के पैसे नहीं होते थे। इसलिए सिर्फ अख़बार पढ़ने के लिए उन्होंने 9 साल की उम्र में उसे बेचना शुरू किया।

हुआ यूं कि बालमुरुगन हमेशा से ही पढ़ाई में काफी अच्छे थे। एक दिन उन्होंने तय किया कि वह अपनी पढ़ाई के साथ-साथ रोज़ अखबार भी पढ़ा करेंगे, लेकिन अखबार वेंडर ने उन्हें बताया कि रोज़ अखबार पढ़ने के लिए उन्हें 90 रुपये देकर मासिक सब्सक्रिप्शन लेना पड़ेगा।

अब उनके पास इतने पैसे तो थे नहीं, इसलिए उन्होंने खुद अखबार बांटने का काम करना शुरू कर दिया। वह स्कूल जाने से पहले, लोगों के यहां अखबार पहुंचाते थे और इसके बदले उन्हें 300 रुपये मिलते थे।

एक अधिकारी से प्रेरित होकर किया IFS ऑफिसर बनने का फैसला

बालमुरुगन ने खूब मेहनत से पढ़ाई की और आगे उन्होंने मद्रास इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से ग्रेजुएशन पूरा किया और जॉब करने लगे। उसी वक्त एक IAS अधिकारी के कारनामों से बालमुरुगन इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने भी ऑफिसर बनने का फैसला कर लिया और जॉब छोड़कर परीक्षा की तैयारी करने लगे।

अब उनके पास इतने ज्यादा पैसे तो थे नहीं, ऐसे में नौकरी करके जो पैसे बचाए थे उन पैसों को सोच समझकर उन्होंने खर्च करते हुए खूब मेहनत की और आखिरकार 2018 में UPSC क्रैक कर IFS अधिकारी बने।

सच है अगर कुछ पाने की चाहत हो और उसके लिए पूरे मन से मेहनत की जाए, तो सफलता मिलती ज़रूर है।

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