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Vadilal: हाथ से बनी आइसक्रीम घर-घर पहुंचाने से लेकर, 45 देशों तक पहुँचने की दिलचस्प कहानी

गुजरात के Vadilal Brand ने हाथ से चलने वाली देसी तकनीक का इस्तेमाल करके आइसक्रीम बनाने और बेचने की शुरुआत की थी। वहीं, आज इनके पास अपने ग्राहकों के लिए आइसक्रिम के 200 से ज्यादा फ्लेवर्स मौजूद हैं।

आज बाजार में आइसक्रीम की जितनी वैरायटी मौजूद हैं, तक़रीबन उतने ही आइसक्रीम ब्रांड भी मौजूद हैं। लेकिन सालों पहले जब देश आजाद हुआ, तब कुछ एक ब्रांड ही थे, जो लोगों तक आइसक्रीम का स्वाद पहुंचाते थे। ऐसा ही एक आइसक्रीम ब्रांड है, गुजरात का वाडीलाल ब्रांड (Vadilal)। चार पीढ़ियों से ज्यादा का सफर तय कर चुका यह ब्रांड, आज देश का जाना माना आइसक्रीम ब्रांड है। 

इस ब्रांड ने परंपरागत कोठी (हाथ से चलने वाली देसी आइसक्रीम मशीन) तकनीक का इस्तेमाल करके आइसक्रीम बेचने की शुरुआत की थी, वहीं आज इनके पास अपने ग्राहकों के लिए आइसक्रिम के 200 से ज्यादा फ्लेवर्स मौजूद हैं।

वाडीलाल गांधी की कड़ी मेहनत से शुरू हुआ सफर

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1907 में Vadilal की शुरुआत, अहमदाबाद के वाडीलाल गांधी ने की थी। उन दिनों वह सोडा बेचने के साथ-साथ पारंपरिक ‘कोठी तकनीक’ का इस्तेमाल करके आइसक्रीम बनाया करते थे। गौरतलब है कि शुरुआत में बर्फ, नमक और दूध को मिलाकर, हाथ से चलने वाली मशीन का उपयोग करके, आइसक्रीम बनाया जाता था। उस दौर में वाडीलाल गांधी, थर्मोकोल के डिब्बों में आइसक्रीम को पैक करके, होम डिलीवरी भी किया करते थे।  

वाडीलाल गांधी की सोडा की दुकान


धीरे-धीरे उनका दायरा बढ़ा और आगे चलकर वाडीलाल गांधी ने अपना बिज़नेस, अपने बेटे रणछोड़ लाल गांधी को सौंप दिया। रणछोड़ लाल गांधी ने 1926 में आइसक्रीम बनाने की मशीनों के साथ, Vadilal का पहला आइसक्रीम आउटलेट शुरू किया। कुछ ही दिनों में अहमदाबाद में इस कंपनी के चार और आउटलेट शुरु हो गए। 

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1950 में, Vadilal ने आइकोनिक इंटरनेशनल फ्लेवर वाले कसाटा आइसक्रीम को बाजार में उतारा, जो जल्द ही बेहद लोकप्रिय बन गया। 1970 के आस-पास रणछोड़ लाल के दोनों बेटे, रामचंद्र और लक्ष्मण गांधी भी बिज़नेस से जुड़ गए। तब तक वाडीलाल देश की एक आधुनिक कॉर्पोरेट कंपनी बन चुकी थी, जिसके अहमदाबाद में 8 से 10 आउटलेट थे। अब कंपनी का अगला कदम गुजरात के बाहर अपनी आइसक्रीम को पहुंचाना था। आइसक्रिम की लोकप्रियता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि 1985 में देश भर में कई जगह वाडीलाल आउटलेट्स खोले जाने लगे। 

1990 तक गांधी परिवार की चौथी पीढ़ी भी बिज़नेस से जुड़ गई, जिसमें रामचंद्र गांधी के तीन बेटे वीरेंद्र, राजेश और शैलेश गांधी, और लक्ष्मण गांधी के बेटे देवांशु गांधी शामिल हैं।

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स्वदेशी वाडीलाल बना इंटरनेशनल ब्रांड  

साल 1991 में कंपनी ने आइसक्रीम से आगे बढ़कर, प्रोसेस्ड फ़ूड के क्षेत्र में कदम रखा और वाडीलाल क्विक ट्रीट (Vadilal Quick Treat ) लॉन्च  किया। वाडीलाल क्विक ट्रीट में आइसक्रीम सहित फ्रोज़न स्प्राउट, सब्जियां, फ्रूट, फ्रूट पल्प और मिठाई के साथ, भारतीय व्यंजनों की Ready To Cook की कई वैरायटी शामिल हैं। 1995 में, वाडीलाल फ्रोज़न सब्जियों को अमेरिकी बाजार तक पहुंचानेवाला, पहला भारतीय ब्रांड बन गया।

कंपनी के चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर (CFO) कल्पित गांधी कहते हैं, “वाडीलाल के फ्रोज़न प्रोडक्ट्स विदेशों में काफी पसंद किये जाते हैं, वहीं Vadilal अमेरिका में सबसे ज्यादा बिकने वाला भारतीय आइसक्रीम ब्रांड है। आज हमारा ब्रांड दुनिया के 45 देशों में पहुँच चुका है।” 

vadilal quick treat

साल 2000 में, जब पूरी आइसक्रीम इंडस्ट्री बुरे दौर से गुजर रही थीं, तब वाडीलाल ने पार्टी पैक्स और एक के साथ एक आइसक्रीम फ्री जैसी बेहतरीन स्किम लॉन्च की, जो आज तक ग्राहकों के बीच लोकप्रिय है। साल 2011 में कंपनी ने Badabite, Flingo और Gourmet जैसी प्रीमियम आइसक्रीम को लॉन्च किया। जिसके बाद कपंनी ने भारतीय आइसक्रीम बाजार में अपनी अलग जगह बना ली।  

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नये दौर के साथ बदला वाडीलाल

वाडीलाल ब्रांड ने समय-समय पर अपने ग्राहकों को ध्यान में रखकर, कई बदलाव और नए प्रयोग किए हैं। फिर चाहे वह नये फ्लेवर्स की खोज करना हो, नयी तकनीक का इस्तेमाल करना हो, या फिर अपनी आइसक्रीम की पैकजिंग पर काम करना हो, वाडीलाल के पास हमेशा ग्राहकों के लिए कुछ नया रहता ही है। 

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देश में सबसे पहली कसाटा आइसक्रीम लॉन्च करने से लेकर, देश की पहली ऑटोमैटिक कैंडी लाइन और सबसे तेज़ आइसक्रीम कोन बनाने वाली मशीन लाने का श्रेय भी, इसी कंपनी के पास है। फ़िलहाल, Vadilal की बरेली (उत्तर प्रदेश) और पुंढरा (गुजरात) की फैक्ट्री में आइसक्रीम बनाने का काम होता है और गुजरात के धर्मपुर स्थित फैक्ट्री में वाडीलाल क्विक ट्रीट के फ्रोज़न फ़ूड बनाए जाते हैं।  

Vadilal ने कई विदेशी और देशी आइसक्रीम कंपनियों की चुनौतियों का सामना करते हुए, अपनी एक विशेष जगह बनाई है, जिसका एक प्रमुख कारण है, इसका 100% वेजीटेरियन होना। 

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देश का पसंदीदा स्वदेशी ब्रांड

1970 के दशक में जब मल्टीनेशनल आइसक्रिम कंपनियां भारत में आने लगीं, तब तक घरेलू मार्केट पर Vadilal का दबदबा बन चुका था। वेजीटेरियन के दावे के कारण इस कंपनी का अपना एक ग्राहक समुदाय था। शायद यही वजह थी कि वाडीलाल ब्रांड के पहले विज्ञापन की पंच लाइन थी – ‘उपवास करने वालों का आइसक्रीम’। 

कंपनी अपनी ब्रांडिंग और विज्ञापन के ऊपर भी काफी काम करती है, हाल ही में कंपनी ने अपने नए कम्पैन ‘हर दिल बोले वाह, वाडीलाल!’ को भी लॉन्च किया है। यानी यह कहना गलत नहीं होगा कि वाडीलाल, अपनी इसी निरंतर मेहनत और बिज़नेस में अपनाई नयी तकनीकों के कारण ही, आज देश का अपना पसंदीदा ब्रांड बना है।

संपादन- जी एन झा

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