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जॉब, बिज़नेस के साथ भी खेती करना है आसान, इनसे सिखिए!

हर्षिका एक सेल्फ-लर्न्ड किसान हैं। उन्होंने कहीं से भी खेती का प्रशिक्षण नहीं लिया है, बल्कि सब कुछ अपने अनुभव से सीखा है!

गुजरात के अहमदाबाद में पली-बढ़ी 32 वर्षीया हर्षिका पटेल हमेशा से ही स्वास्थ्य और सेहत के प्रति काफी जागरूक रही हैं। अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद, उन्होंने रियल एस्टेट के अपने फैमिली बिज़नेस को ज्वाइन किया। लेकिन एक फिट और हेल्दी लाइफस्टाइल जीने में भरोसा रखने वाली हर्षिका ने बिज़नेस से अलग अपना फिटनेस क्लब- द पिलेट्स स्टूडियो भी शुरू किया।

द बेटर इंडिया से बात करते हुए हर्षिका कहती हैं, “एक हेल्दी लाइफस्टाइल के लिए अपने खाने-पीने की चीजों पर ध्यान देना भी बेहद ज़रूरी है। और कौन नहीं चाहेगा कि उनका खाना पेस्टिसाइड और केमिकल से फ्री हो।”

और इसलिए उन्होंने खुद अपने घर में खाने के लिए इस्तेमाल होने वाली साग-सब्ज़ियाँ उगाना शुरू किया। हर्षिका बताती हैं कि तीन साल पहले, साल 2016 में उनके जन्मदिन पर उनके परिवार ने उन्हें शहर के शिलज इलाके में एक 5 बीघा की ज़मीन तोहफे में दी।

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Harshika Patel

शुरुआत:

“मैं अक्सर सोचती तो थी कि मुझे खुद पेड़-पौधे लगाने का ट्राई करना चाहिए पर जब ये ज़मीन मुझे मिली तो मैंने सोचा कि चलो इस पर फार्मिंग ही की जाए। बस वहीं से शुरुआत हुई मेरी किसानी की,” उन्होंने आगे कहा।

हर्षिका का खेती-बाड़ी के साथ इससे पहले कोई अनुभव नहीं था। पर फिर उन्होंने बिना किसी हिचकिचाहट के यहाँ पर पेड़-पौधे लगाना शुरू किया। उन्होंने आधा बीघा ज़मीन पर एक बाग़ लगाया और बाकी साढ़े चार बीघे को अपनी साग-सब्ज़ी और फल आदि उगाने के लिए रखा।

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“खेती के मामले में, मैं सेल्फ-लर्नड हूँ क्योंकि मैंने कहीं से कोई ट्रेनिंग नहीं की। मैंने खुद से सारे एक्सपीरियंस किये, उनसे सीखा और अब मैं बहुत अच्छे से अपना फार्म मैनेज कर रही हूँ।”

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हर्षिका के अपने फार्म- ‘ग्रीन ग्रिड्स‘ में मौसमी फल और सब्जियां उगाती हैं। गर्मियों में उनके यहाँ आपको लौकी, तोरी, टमाटर, आलू जैसी सब्ज़ियाँ मिलेंगी तो सर्दियों में सभी हरी पत्तेदार साग-सब्ज़ियाँ, जैसे कि पालक, मेथी, धनिया, मूली, गोभी, बंद गोभी, भिन्डी आदि। अपने फार्म में वे जो कुछ भी उगाती हैं, वह सब अपने परिवार, रिश्तेदारों और दोस्तों में बाँट देती हैं।

उनका कहना है कि वे इस तरह से रोटेशन में सब्ज़ियाँ लगाती हैं कि उनके परिवार को पूरे मौसम बाहर से कोई साग-सब्ज़ी न खरीदनी पड़े।

खुद बनाती हैं जैविक खाद:

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हर्षिका अपने फार्म में सभी कुछ जैविक तरीकों से उगाती हैं। वह बताती हैं, “फार्म में जो भी एग्रो-वेस्ट निकलता है, उसे न तो हम कभी फेंकते हैं और न ही जलाते हैं। फार्म में ही एक गड्ढा बनाया हुआ है तो उसी में हम सारा वेस्ट डालते रहते हैं। फिर उससे जब खाद बन जाती है तो इसी खाद को फार्मिंग के लिए इस्तेमाल करते हैं।”

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इसके अलावा, वे गोबर और गोमूत्र का इस्तेमाल भी कृषि के जैविक उत्पाद बनाने के लिए करती हैं। उनके सभी जानने वाले, जिनके भी यहाँ उनके खेत से कोई सब्ज़ी या फल जाते हैं, दोबारा उन्हें फ़ोन करके फिर से भेजने के लिए कहते हैं। जैविक सब्जियों का स्वाद तो एकदम अलग होता ही है, साथ ही ये केमिकल वाली सब्जियों से कम समय में पककर तैयार भी हो जाती हैं।

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इसलिए हर्षिका, कितना भी बिजी शेड्यूल हो, पर अपने फार्म के लिए ज़रूर वक़्त निकालती हैं। वह कहती हैं, “अगर आप गार्डनिंग को अपनी हॉबी की तरह लेते हैं तो आप आराम से अपना टाइम मैनेज कर सकते हैं। आपको बस इसे अपने रूटीन का हिस्सा बनाना है, जैसे बाकी चीजें ज़रूरी हैं वैसे यह भी हो।”

घर से मिला साथ:

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“शुरू में, पहले साल बहुत-सी समस्याएं हुईं, क्योंकि मुझे कुछ पता नहीं था खेती-किसानी के बारे में। पर पहले साल के अनुभवों ने मुझे काफी कुछ सिखा दिया और फिर दूसरे साल से हमारा फार्म स्टेबल हो गया,” उन्होंने आगे बताया।

इसके अलावा, उन्हें उनके परिवार ने काफी सपोर्ट किया। हर्षिका हंसते हुए कहती हैं कि उनकी शादी पटेल परिवार में हुई है और गुजरात में पटेल लोगों को किसानी के लिए जाना जाता है। इसलिए उनके घर में तो लोग चाहते थे कि कोई तो खेती से जुड़ा हुआ कुछ करे। इसलिए जब उन्होंने शुरुआत की तो सबने उन्हें काफी सराहा और हौसला दिया।

टाइम-मैनेजमेंट के बारे में वे कहती हैं कि एक बार लगता है कि आप नहीं कर पाएंगे। लेकिन आपको ट्राई करना चाहिए। अगर 10 में से 5 बार आप फेल हुए हैं तो अगली पांच बार आपकी सफलता के चांस भी तो हैं। इसलिए हारना नहीं हैं। बस एक बार स्टार्ट करें क्योंकि फिर ज़िम्मेदारी के साथ आप सब कुछ सम्भाल लेते हैं।

“शुरू में, थोड़ा ज्यादा ध्यान मुझे देना होता था, लेकिन अब मैं हफ्ते में एक-दो दिन निकालती हूँ फार्म के लिए। पिछले साल हमने विंटर गार्डनिंग वर्कशॉप भी की थी 12 हफ्तों तक। हर रविवार फार्म में लोग आते थे और हम कुछ न कुछ नया करते थे। काफी अच्छा अनुभव था वह भी। इस साल, कहीं और फोकस होने से हम वर्कशॉप नहीं कर पाए। लेकिन उम्मीद है कि आगे आने वाले वक़्त में हम ऐसा कुछ करते रहेंगे,” उन्होंने अंत में कहा।

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द बेटर इंडिया, हर्षिका पटेल की सराहना करता है और उम्मीद है कि देश के लोग किचन गार्डन और टेरेस गार्डन का महत्व समझेंगे।

यदि आपको इस कहानी ने प्रभावित किया है तो हर्षिका पटेल से सम्पर्क करने के लिए उनके फेसबुक पेज पर जाएं।

Summary: Harshika Patel, a business woman from Ahmedabad in Gujarat is growing organic vegetables for her family. She is a fitness enthusiast and three years ago, she started her own fitness club- The Pilates Studio. To complement this, she started growing her own food, so that her family get healthy food and lifestyle.


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