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सरकारी योजनाओं का लाभ उठाकर, लखपति बना ओडिशा का यह किसान

ओडिशा के कालाहांडी जिले में संचरगाओं के रहने वाले किसान, कृष्ण चंद्र नाग अपने खेत में आम, केला और मौसमी सब्जियां उगाने के साथ-साथ मछली पालन और मुर्गी पालन भी कर रहे हैं, जिससे उनकी कमाई लाखों में हो रही है।

ओडिशा के कालाहांडी जिले में संचरगाओं के रहने वाले 48 वर्षीय कृष्ण चंद्र नाग एक प्रगतिशील किसान हैं। कृष्ण चंद्र साल 2006 से खेती में लगातार अभिनव प्रयोग करते आ रहे हैं। इसकी शुरुआत उन्होंने पारंपरिक तरीकों से होने वाली धान की खेती की जगह फल-सब्जियों की खेती शुरू करके की। वह बताते हैं कि उन्होंने एक-एक करके खेती के तरीकों में बदलाव किए। आज वह ‘एकीकृत खेती’ (इंटीग्रेटेड फार्मिंग) कर रहे हैं, जिसमें वह मौसमी सब्जियों, फलों के साथ-साथ मुर्गी पालन और मछली पालन भी कर रहे हैं।

कृष्ण चंद्र ने द बेटर इंडिया को बताया कि उनके पास लगभग सात एकड़ पैतृक जमीन थी। इसके अलावा उन्होंने चार एकड़ जमीन और खरीदी। 12वीं कक्षा तक पढ़े कृष्ण चंद्र एक संयुक्त परिवार में रहते हैं। स्कूल की पढ़ाई के बाद से ही उन्होंने खेती की जिम्मेदारी उठा ली थी। पहले वह भी अपने पिता और दादा की तरह सामान्य तरीकों से खेती करते थे लेकिन इससे कुछ ख़ास कमाई नहीं हो पाती थी। कृष्ण चंद्र हमेशा यही सोचते कि कैसे वह खेती में अपनी कमाई को बढ़ा सकते हैं और इसके लिए उन्होंने एक अलग राह चुनी। 

वह कहते हैं, “मैंने सही समय पर खेती के सही तरीके, सरकारी योजनाओं, पानी और जैविक खाद का इस्तेमाल किया और यही मेरी सफलता के कारण बने।” 

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Odisha Farmer Success Story
कृष्ण चंद्र

शुरू की फल-सब्जियों की खेती: 

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कृष्ण चंद्र को जिले के कृषि विभाग से काफी मदद मिली। विभाग की सलाह से उन्होंने 2006 में अपनी कुछ जमीन पर 100 आम के पेड़ लगा दिए और इसके अगले साल, उन्होंने अपने खेतों के लिए ड्रिप इरीगेशन सिस्टम लगवाया ताकि कम पानी में वह ज्यादा मुनाफा ले सकें। उन्होंने बताया, “आम के पेड़ों से फल मिलने में समय था। इसलिए मैंने आम के बागान में ही मिश्रित तरीकों से करेला, लौकी, मिर्च, टमाटर जैसी सब्जियों की खेती शुरू कर दी। सब्जियों से आपको जल्दी आय मिलती है। 2008 में केवल 1000 स्क्वायर मीटर जमीन पर सब्जियों की खेती से ढाई लाख रुपए की कमाई हुई थी।”

इस सफलता के बाद, कृष्ण चंद्र ने अपनी खेती करने के तरीकों में बदलाव पर और ध्यान दिया। उन्होंने और सब्जियां लगानी शुरू कर दी और साथ ही, अपने खेतों में दो तालाब भी खुदवाये। इन तालाबों में वह मछली पालन करते हैं। उन्होंने चार एकड़ में 2400 केले के पेड़ भी लगाए हैं। वह कहते हैं, “अब आम के पेड़ घने हो गए हैं और उनके नीचे धूप नहीं आती है इसलिए मैं सब्जियां नहीं उगा सकता। लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि मैं इस जमीन को खाली छोड़ दूँ। मैंने आम के बागान में मुर्गियों के रहने का इंतजाम किया है। मेरे पास 300 से भी ज्यादा मुर्गियां हैं, जिनसे अच्छी आमदनी हो रही है।” 

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लगाए केले के पेड़

कृष्ण चंद्र ने कृषि विभाग की योजनाओं की मदद से अपने खेतों को हाई-टेक बनाया है। उनके फार्म में आपको इनक्यूबेटर, कूलिंग चैम्बर, ग्रेडिंग मशीन और सोलर प्लांट जैसी सुविधाएं भी मिलेंगी। वह कहते हैं कि इन सभी सुविधाओं के लिए उन्हें ‘हॉर्टिकल्चर विभाग‘ से मदद मिली है। “किसानों के लिए प्रशासन के पास बहुत-सी सुविधाएँ हैं, जो उन्हें आगे बढ़ने में मदद कर सकती है। लेकिन इन सुविधाओं का सही लाभ उठाने के लिए किसानों को खुद आगे बढ़ना होगा,” उन्होंने बताया। 

कालाहांडी जिले के असिस्टेंट डायरेक्टर ऑफ़ हॉर्टिकल्चर, टंकधर कालो ने बताया, “हमारे विभाग द्वारा किसानों को बागवानी और इससे संबंधित तकनीकों के लिए मदद दी जा रही है। विभाग किसानों को फलों के पौधों से लेकर सोलर प्लांट, कूलिंग चैम्बर, ड्रिप इरीगेशन और पॉलीप्रोपेलाइन शीट जैसी तकनीकों के लिए भी सब्सिडी दे रहा है। हमने कृष्ण चंद्र की भी मदद की है और आज उनका नाम राज्य के सफल किसानों में शामिल होता है। कृषि विश्वविद्यालयों में पढ़ रहे छात्रों के अलावा, ओडिशा के दूसरे जिलों से भी किसान उनके फार्म को देखने और उनके सीखने आते हैं।” 

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अपनी फसलों के लिए जैविक खाद भी वह खुद ही बनाते हैं। जैविक खाद बनाने के लिए वह लगभग 60 ट्रॉली गोबर इकट्ठा करते हैं। इस गोबर को सामान्य खाद, केंचुआ खाद और वर्मीवॉश जैसी चीजें बनाने में इस्तेमाल किया जाता है। वह बताते हैं कि गोबर के अलावा, उनके खेतों से जो भी जैविक कचरा निकलता है, सभी कुछ से वह खाद तैयार करते हैं। अपने खेतों पर तैयार वर्मीवॉश को वह ड्रिप इरीगेशन के माध्यम से फसलों को देते हैं। उनका कहना है कि पौधों को खाद या पानी जरूरत के हिसाब से देना चाहिए ताकि आपको उपज अच्छी मिले। वह अपनी उपज को कुछ दुकानों के देने के अलावा सीधा ग्राहकों तक भी पहुँचाते हैं। 

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ग्रेडिंग मशीन

दूसरे किसानों की भी कर रहे हैं मदद: 

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कृष्ण चंद्र बताते हैं कि उनके खेतों को देखने के लिए किसान न सिर्फ ओडिशा बल्कि छत्तीसगढ़, तेलंगाना, राजस्थान से भी आते हैं। बहुत से किसानों ने उनसे प्रेरित होकर खेती के साथ-साथ मछली पालन जैसी चीजें भी शुरू की है और आज अच्छा मुनाफा कमा रहे हैं। कृषि विभाग द्वारा भी उन्हें किसानों को ट्रेनिंग देने के लिए बुलाया जाता है। 

उनसे ट्रेनिंग लेने वाले एक किसान, ध्रुब चंद्र जेना ने बताया, “कृष्ण चंद्र जी मेरे लिए गुरु की तरह हैं। उन्होंने मुझे खेती की बारीकियां सिखाई हैं। पौधे तैयार करने से लेकर मुर्गी पालन तक, सभी कुछ उनसे सीखा है। मैं लगातार उनसे जुड़ा रहता हूँ और कुछ न कुछ नया सीखने की कोशिश करता हूँ। मेरे जैसे बहुत से किसानों का मार्गदर्शन करके उन्होंने हमें सफलता की राह दी है।”

वह कहते हैं, “मुझे ख़ुशी है कि मेरे ज्ञान और अनुभव से दूसरे किसानों को फायदा मिल रहा है है। व्हाट्सएप के माध्यम से मैं बहुत से किसानों को जुड़ा हुआ हूँ और जो भी मदद के लिए संपर्क करता है, मैं उनकी मदद करने की कोशिश करता हूँ। साथ ही, लोगों को अपने इलाकों के कृषि विज्ञान केंद्र या बागवानी विभाग से जुड़ने की सलाह देता हूँ क्योंकि ये विभाग किसानों के लिए काफी मददगार साबित होते हैं। प्रशासन द्वारा किसानों के लिए कई तरह की योजनाएं चलाई जा रही हैं, सभी किसानों को इन योजनाओं के बारे में जानने और समझने की कोशिश करनी चाहिए।” 

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किसानों को ट्रेनिंग

कृष्ण चंद्र को उनके अभिनव तरीकों के लिए जिला स्तर पर सम्मानित भी किया गया है। अपनी 11 एकड़ की ‘एकीकृत खेती’ से वह सालाना लगभग 18 लाख रुपए कमा रहे हैं। वह कहते हैं कि यह उनकी लगभग 15 सालों की मेहनत है, जिससे आज वह लाखों का मुनाफा कमा रहे हैं। दूसरे किसानों को भी वह हताश होने की बजाय बदलाव की तरफ बढ़ने की प्रेरणा देते हैं। उनके मुताबिक, जब तक किसान सामान्य खेती के तरीकों में बदलाव नहीं करेंगे, तब तक खेती से अच्छी कमाई नहीं कर सकेंगे। 

खेती के क्षेत्र में नए-नए प्रयोग करने वाले प्रगतिशील किसान कृष्ण चंद्र के जज्बे को द बेटर इंडिया सलाम करता है। अगर आप उनसे संपर्क करना चाहते हैं तो उन्हें 9937777495 पर व्हाट्सऐप मैसेज कर सकते हैं।

संपादन- जी एन झा

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