3000 के निवेश से गांव के लड़के ने बनाया करोड़ों का घी बिज़नेस

गांव में रहने वाले वो युवा जो मानते हैं कि तरक्की और कामयाबी की कहानी सिर्फ शहर में जाकर, बड़ी नौकरी करके ही हासिल की जा सकती है। उन्हें गांव के भावेश चौधरी की सफलता की कहानी जरूर जाननी चाहिए।

अगर ज्यादातर युवाओं की तरह आपको भी लगता है कि बड़े शहर में जाकर ही बड़ा बिज़नेस या बड़ा नाम बनाया जा सकता है तो इस बात को गलत साबित करती है, भावेश चौधरी की कहानी। जिन्होंने 3000 के निवेश से गांव में रहकर बनाया है करोड़ों का घी बिज़नेस।
राजस्थान के भावेश चौधरी को एक समय पर फ़ौज में न जाने, पढ़ाई छोड़ने और पैसे बर्बाद करने के ताने मिला करते थे। ऐसा इसलिए क्योकि उनके परिवार से ज्यादातर लोग फ़ौज में ही हैं। लेकिन भावेश को बचपन से कुछ हटकर करना था।

हालांकि उन्होंने B.sc. की पढ़ाई करने के लिए एडमिशन भी लिया लेकिन मन न लगने के कारण वह उसे भी अधूरा छोड़कर वापस आ गए।
इस दौरान उनका परिवार उनके भविष्य की लेकर काफी चिंता में था। सभी को लग रहा था कि अब बेटा पढ़ाई नहीं कर रहा तो इसका मतलब यह है कि वह आगे मजदूरी या खेती वगैरह ही करेगा। लेकिन भावेश ऑनलाइन कोई बिज़नेस करना चाहते थे लेकिन क्या बिज़नेस करें यह समझ नहीं आ रहा था। तभी उन्हें B.Sc. की पढ़ाई के दौरान हॉस्टल में बिताए दिन याद आए, तब उनके रूममेट्स उन्हें गांव से शुद्ध घी लाने की डिमांड करते थे।


गांव के शुद्ध घी की डिमांड शहरों में बहुत ज्यादा थी। लोग हमेशा देसी गाय के बिना मिलावट वाले प्रोडक्ट्स की तलाश में रहते थे। यहीं से भावेश को बिज़नेस का इस शानदार आईडिया आया। लेकिन उन्हें न तो पैकेजिंग की जानकारी थी, न मार्केटिंग और न ही बिज़नेस शुरू करने के पैसे थे।
ऐसे में भावेश ने Youtube का सहारा लिया और अपनी माँ के घी बनाते हुए वीडियो सोशल मीडिया पर अपलोड करना शुरू किया। इतना ही नहीं वह सोशल मीडिया में दूसरों की पोस्ट पर जाकर भी अपना नंबर देकर कहते- यहां मिलेगा शुद्ध घी।

आख़िरकार उनकी मेहनत तब रंग लाई, जब उन्हें बिहार के एक ऑर्गनिक स्टोर से घी का बल्क आर्डर मिला। भावेश ने महज 3000 रुपये खर्च करके अपने उस आर्डर को पूरा किया और फिर पीछे मुड़कर कभी नहीं देखा। आज भावेश गांव में रहकर ‘कसुतम’ ब्रांड नाम से अपना बिज़नेस चला रहे हैं। Youtube और गूगल ऐड की मदद से उन्हें महीने के 3000 से ज्यादा आर्डर आराम से मिल जाते हैं।
इन ढ़ेरों ऑर्डर्स को पूरा करने के लिए उन्होंने 150 दूसरे किसानों का समूह बनाया है। भावेश की सफलता ने एक बात तो साबित कर दी कि अगर इरादा पक्का हो तो शहर या गांव मायने नहीं रखता बस जूनून और मेहनत से बात बन जाती है।

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