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देशप्रेम के चलते आँगनबाड़ी में काम करने वाली माँ के इस लाल ने छोड़ी TCS कि मोटी तनख्वाह वाली नौकरी, सेना में हुआ भर्ती।

बढ़िया वेतन और सुख सुविधाओं से युक्त जीवन जी रहे भारत दरबार सिंह जाधव टीसीएस में सिस्टम इंजीनियर के रूप मे कार्यरत थे। पर महाराष्ट्र के बुलढाना जिले के एक छोटे से गाँव में आंगनबाड़ी सहायिका के इस बेटे के भीतर कुछ और हासिल करने का जज़्बा पनप रहा था, उनका मुक़ाम था सेना मे शामिल होकर अपने देश कि सेवा करना।

ढ़िया वेतन और सुख सुविधाओं से युक्त जीवन जी रहे भारत दरबार सिंह जाधव टीसीएस में सिस्टम इंजीनियर के रूप मे कार्यरत थे। वह सब कुछ होते हुये भी जिसकी आज एक आम युवा कल्पना करता है, भारत दरबार सिंह जाधव संतुष्ट नहीं थे। महाराष्ट्र के बुलढाना जिले के एक छोटे से गाँव में आंगनबाड़ी सहायिका के इस बेटे के भीतर कुछ और हासिल करने का जज़्बा पनप रहा था, उनका मुक़ाम था सेना मे शामिल होकर अपने देश कि सेवा करना।

वे 2010 मे एनडीए की परीक्षा में असफल रहे थे परंतु उन्होंने हार नहीं मानी और अपने दृढ़ निश्चय व कठिन परिश्रम से उन्होंने ‘कंबाइंड डिफ़ेन्स सर्विसेस'(CDS) की परीक्षा उत्तीर्ण कर ली।

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“जब मैं सिस्टम इंजीनियर के रूप में कार्यरत था तब ही मुझे कहीं न कहीं लगता था कि यह वह नहीं है जो मैं जीवन भर करना चाहता हूँ,” जैसा उन्होने टाइम्स ऑफ इंडिया को दिये साक्षात्कार में बताया।

सबसे बढ़ी आईटी कंपनियों में इंजीनियर के रूप में कार्यरत भारत ने अपने इस सपने को पूरा करने की तब शुरुआत की जब उन्होंने ‘सर्विस सलेक्शन इंटरव्यू’ में सफलता अर्जित कि जिसकी तैयारी उन्होंने अपने व्यस्त दिनचर्या में समय निकाल कर की थी। उन्होंने सीडीएस की तैयारी पिछले साल ही शुरू की और साथ ही शारीरिक व्यायाम भी करना शुरू किया क्योंकि इस परीक्षा में अभ्यर्थी की मानसिक व शारीरिक दोनों ही दक्षताओं का परीक्षण होता है।

महाराष्ट्र के बुलढाना जिले के खामगाँव के सुतला बुड़रक गाँव के रहने वाले भारत बताते हैं कि इतने व्यस्त कार्यक्रम के बाद तैयारी के लिए समय निकाल पाना आसान नहीं था यह कुछ ऐसा ही था जैसे ताश के खेल में ट्रम्प निकल आए।

पढ़ाई में अच्छे प्रदर्शन के चलते भारत को टीसीएस हिंजेवाड़ी पुणे में 2014 में नौकरी मिल गयी पर उनके दिल में तो हमेशा आर्मी में भर्ती हो कर देश सेवा करने के सपने पल रहे थे। इसमें उनकी मदद की सेना से सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट कर्नल प्रदीप भ्रमांकर जो शहर में सेना में जाने की चाह रखने वाले युवाओं की मदद के लिए प्रशिक्षण अकादमी चलाते हैं। कर्नल प्रदीप ने भारत की प्रतिभा पहचानते हुये उन्हें उनकी कमजोरियाँ दूर करने मे मदद कि।

भारत जो कि सेना की पैदल टुकड़ी में शामिल होने की चाह रखते हैं, ने 153 अभ्यर्थियों में से 108 वा स्थान प्राप्त किया। भारत, अप्रैल में ओफिसर्स ट्रेनिंग अकादमी जॉइन करेंगे, जहां 48 हफ़्तों की कठिन प्रशिक्षण प्रक्रिया के पश्चात वे आर्मी मे ‘शॉर्ट सर्विस कमीशंड ऑफिसर’ के रूप में शामिल होंगे।

मूल लेख : श्वेता शर्मा


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