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देहरादून: सात दोस्तों ने मिलकर लगाया जनता फ्रिज, मिटाते हैं गरीबों की भूख, प्यास!

फ्रिज की कीमत चुकाने के लिए ये सातों दोस्त अपनी तनख्वाह से प्रति माह दो हजार रुपये कटा रहे हैं।

भूखों को भोजन खिलाना सबसे बड़ा पुण्य है। यह बात केवल कहावत में लोग कहते हैं, लेकिन देहरादून के कौशिक भैसोरा और उनके छह दोस्तों ने इस कहावत को सच कर दिखाया है। और वह भी बगैर किसी पुण्य की आकांक्षा के। देहरादून विधानसभा में रिपोर्टर के रूप में काम करने वाले कौशिक ने अपने छह दोस्तों प्रदीप सिंह कुंजवाल, राहुल पांडेय, अमित रावल, तुषांत बिष्ट, देवेश मैठाणी और नंदकिशोर के साथ मिलकर गरीबों के भोजन के प्रबंध के लिए उत्तराखंड की राजधानी देहरादून के रिस्पना पुल के पास सिटी मार्केट में एक जनता फ्रिज रखवाया है। इसके पीछे सद्कामना यह है कि कोई भी इंसान भूखे पेट न सोए। इस जनता फ्रिज से कोई भी जरूरतमंद खाना निकालकर खा सकता है।

फ्रिज की कीमत चुकाने के लिए ये सातों दोस्त अपनी तनख्वाह से प्रति माह दो हजार रुपये कटा रहे हैं।

कौशिक कहते हैं, “इस पहल का मकसद केवल यह था कि किसी को भी बगैर रोटी अपनी रात न बितानी पड़े। जब दोस्त साथ में पार्टी कर सकते हैं, तो ज़रूरतमंदों की मदद के लिए भी साथ आ सकते हैं।”

 

बच्चों को खाने के लिए पैसे मांगते देख आया ख्याल

जनता फ्रिज से खाद्य सामग्री पा खुश बच्चे।

 

कौशिक के मुताबिक ऐसा किसी प्लान के तहत नहीं हुआ। बस एक दिन दफ्तर जाते हुए विधानसभा के पास बच्चों को खाने के लिए भीख मांगते देखा तो दिल को बहुत बुरा लगा। सोचा कि अगर कोई ऐसी व्यवस्था हो जाए कि बच्चों को सर्दी, बरसात जैसे मौसम में भोजन के लिए भीख न मांगनी पड़े तो अच्छा हो। बस यह सोचते ही इस तरह के जनता फ्रिज का ख्याल आया। बकौल कौशिक वह इससे पहले किसी जगह किसी के लगाए इस तरह के फ्रिज की बाबत पढ़ चुके थे। विचार दिल में आ तो गया, लेकिन अकेले उनके लिए यह पहल बहुत मुश्किल थी। उन्होंने अपने इस विचार को दोस्तों के साथ साझा किया। दोस्तों का इस जनता फ्रिज को लगाने में साथ चाहिए था तो इसके लिए दोस्तों की भी सहमति ज़रूरी थी। अगले ही दिन उन्होंने इस फ्रिज की योजना पर अपने दोस्तों के साथ बात की, जो सहर्ष इस पहल के साथ जुड़ने को तैयार हो गए। अब समस्या यह थी कि फ्रिज के लिए धनराशि कैसे जुटाई जाए तो उसके लिए अपनी तनख्वाह से पैसे कटाने का निर्णय लिया। सभी दोस्तों ने इस पर हामी भर दी। आखिरकार अक्टूबर माह के अंतिम सप्ताह में विधानसभा के पास रिस्पना पुल के नजदीक सिटी मार्केट में यह फ्रिज लगा दिया गया। नाम दिया गया जनता फ्रिज, क्योंकि यह शहर की समस्त जनता के लिए सर्व सुलभ था।

 

जनता फ्रिज के लिए गार्ड को किया गया है तैनात

जनता फ्रिज अपने स्थान पर कायम रहे, इसमें रखी गई सामग्री सुरक्षित रहे, इसके लिए एक गार्ड की जरूरत महसूस की गई। इसलिए फ्रिज लगाने के साथ ही एक गार्ड को भी यहां तैनात कर दिया गया। बकौल कौशिक गार्ड के वेतन का खर्च भी सभी दोस्त मिलकर ही उठाते हैं। गार्ड का काम यह है कि वह फ्रिज की सुरक्षा करे और खास तौर पर खाने की निगाहबानी करे। अगर कोई इसके लिए खाद्य सामग्री देकर जाता है तो उसकी क्वालिटी पर नजर रखे।

जनता फ्रिज के साथ तैनात गार्ड के पास एक रजिस्टर भी रखवाया गया है। इस रजिस्टर में हर खाना देने वाले की एंट्री की जाती है ताकि कोई भी खराब खाना इसमें रखवाए तो इसके खिलाफ कदम उठाना भी सुनिश्चित किया जा सके। उसे अपना आधार नंबर या अन्य कोई पहचान पत्र की डिटेल के साथ ही इसमें मोबाइल नंबर भी लिखना होता है। जरूरत पड़ने पर इसका इस्तेमाल किया जाता है। इसका बेहतर फल भी सामने आया हे।

 

लोग भी समझने लगे हैं इस पहल की अहमियत 

डोनर से सामग्री लेते तुषांत बिष्ट

कौशिक और उनके दोस्तों की यह पहल रंग लाई है। लोग अपने बर्थडे या किसी फंक्शन पर इस फ्रिज में खाद्य सामग्री भी जमा कराकर जाते हैं। कौशिक के अनुसार आप इसे ‘गिव एंट टेक कांसेप्ट’ भी कह सकते हैं। कई लोग ऐसे होते हैं, जो खुद गरीबों के लिए कुछ न कुछ देना चाहते हैं, लेकिन उन्हें पता नहीं होता कि कहां दें। ऐसे में वह इस जनता फ्रिज का उपयोग करते हैं। क्योंकि उन्हें मालूम है कि उनकी दी गई सामग्री का यहां सदुपयोग होगा। इसमें फल, सब्जी, पानी, सॉफ्ट ड्रिंक, बेकरी प्रॉडक्ट्स के साथ ही तमाम ऐसी खाद्य सामग्री भरकर रखी जाती है, जो रेडी टू ईट होती हैं, यानी कि जिसे कभी भी खाने के इस्तेमाल में लिया जा सकता है। ऐसी सामग्री होती है, जिनके जल्द खराब होने की संभावना कम होती है।
यदि कोई पका हुआ खाना देना चाहता हो तो उसके लिए एक शर्त है। और वो ये कि यहां दिया जाने वाला भोजन 12 घंटे से पहले का पका न हो। कौशिक के अनुसार ऐसे भोजन के खराब होने की संभावना रहती है।

वह कहते हैं,”हमारा उद्देश्य लोगों तक केवल भोजन पहुंचाना ही नहीं, अच्छा भोजन पहुंचाना है। ईश्वर का आशीर्वाद है कि अभी तक हम इस कार्य में सफल हुए हैं।”

 

आसान नहीं था काम

लोगों को भोजन कराते सातों दोस्त

कौशिक के अनुसार, “जितना आसान काम दिखता है, उतना आसान होता नहीं है। हमने जब फ्रिज रखने की सोची तो पहली जरूरत स्थानीय निकाय से इजाजत की थी, दूसरे इसके लिए बिजली का कनेक्शन खिंचवाना था। इस काम में कुछ दिन लगे, लेकिन कार्य संपन्न होने के बाद इच्छाशक्ति में और इजाफा हुआ।”

अब इन दोस्तों की कोशिश है कि अन्य चौराहों पर भी जनता फ्रिज रखवाया जाए। इसके लिए वे बाकायदा अपने दोस्तों के साथ योजना बना रहे हैं। इसमें जरूरत पड़ने पर अन्य लोगों का भी सहयोग लिया जाएगा। इन दोस्तों के मुताबिक उनकी इस पहल को शहरवासियों का पूरा सहयोग मिल रहा है। यही वजह है कि इस पहल को आगे बढ़ाने का ख्याल उनके दिमाग में आया है। अब जल्द ही कुछ और जगहों पर भी इस तरह के ‘जनता फ्रिज’ लोगों की क्षुधा को मिटाते नजर आएंगे।

जनता फ्रिज में मुहैया खाद्य सामग्री

इन दोस्तों में से एक प्रदीप सिंह कुंजवाल के अनुसार अगर सब साथ मिलकर प्रयास करें तो तस्वीर बदल सकती है। उनके मुताबिक हर बात के लिए सरकार का मुंह देखने की बजाये यह अधिक बेहतर है कि खुद भी स्थिति को बदलने के लिए प्रयास किए जाएं। उनके मुताबिक अगर वह जनता फ्रिज के जरिये बच्चों की भिक्षावृत्ति पर रोक लगाने में थोड़ा भी कामयाब रहे तो खुद को कामयाब समझेंगे।

अंत में कौशिक कहते हैं, “बूंद-बूंद से घट भरता है, इसी बात को ध्यान में रखते हुए हर कोई अगर अपनी ओर से प्रयास करे तो निश्चित रूप से एक दिन ऐसा आ सकता है कि किसी को भूखे पेट सोने पर मजबूर नहीं होना पड़ेगा। और इससे बेहतर किसी भी दुनिया के लिए कुछ हो सकता है क्या?”

कौशिक और उनके साथियों की इस पहल का हिस्सा बनने के लिए आप उन्हें 9536123555 पर कॉल कर सकते हैं।

संपादन – मानबी कटोच 


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