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10 बेहद आसान और छोटे-छोटे कदम, जिनसे बन सकता है आपका घर पूरी तरह ज़ीरो वेस्ट

दिल्ली की प्रीति सिंह पिछले चार सालों से एक जीरो वेस्ट लाइफ स्टाइल फॉलो कर रही हैं। जानें, कैसे की थी उन्होंने शुरुआत?

तक़रीबन चार साल पहले नोएडा की रहनेवाली प्रीति सिंह, अपने सोसाइटी के कूड़े दान को देखकर इतनी परेशान रहने लगीं कि उन्होंने इस बड़ी समस्या को बहुत गंभीरता से लेना शुरू कर दिया। उन्होंने महसूस किया कि यह कचरा हमारे घर से ही तो आ रहा है, तो क्यों न कुछ ऐसा किया जाए कि घर से कचरा ही कम निकले। 

उनका घर फर्स्ट फ्लोर पर ही था, इसलिए जब नीचे कचरा ज्यादा भर जाता था, तो गंदगी से बदबू आने लगती थी। इससे तंग आकर उन्होंने सोसाइटी वालों से भी बात की, लेकिन किसी के पास इसका कोई समाधान नहीं था। फिर प्रीति ने इंटरनेट पर कचरा प्रबंधन के बारे में जानकारी इकट्ठा करना शुरू किया।

उस समय उन्हें न गीले कचरे से कम्पोस्ट बनाना आता था और न ही यह पता था कि प्लास्टिक वेस्ट को कम कैसे करना है? प्रीति को गार्डनिंग का भी बहुत शौक है, इसलिए वह हमेशा ऑनलाइन गार्डनिंग के वीडियोज़ देखती रहती थीं। तभी उन्हें एक गार्डनिंग एक्सपर्ट से पता चला कि घर के गीले कचरे से हम अच्छी खाद बना सकते हैं। उन्हें लगा इससे अच्छा और क्या हो सकता है? कचरा भी कम हो जाएगा और पौधों को पोषण भी मिल जाएगा।  

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बस फिर क्या था, घर पर पड़े एक घड़े में ही उन्होंने गीले कचरे से कम्पोस्ट बनाना शुरू कर दिया। हालांकि, पहली कोशिश में उन्हें सफलता नहीं मिली, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी।

वह बताती हैं, “कम्पोस्टिंग करने से मेरे पौधों की संख्या भी बढ़ने लगी। आख़िरकार मैंने एक अच्छा और बड़ा कम्पोस्ट बिन भी खरीद लिया और मेरे घर से गीला कचरा बाहर जाना बिल्कुल बंद हो गया।”

गीले कचरे के बाद, जीरो वेस्ट की ओर बढ़ाया दूसरा कदम 

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Priti is living zero waste lifestyle  she is using compost bin for wet waste
Priti Singh With Her Compost Bin

धीरे-धीरे उन्होंने केमिकल फ्री टूथ पाउडर, होम क्लीनिंग प्रोडक्ट्स, औषधीय चीजों से शैम्पू और साबुन आदि बनाना भी शुरू कर दिया।  प्रीति कहती हैं, “घर पर खुद के प्राकृतिक प्रोडक्ट्स बनाने के दो फायदे हुए, एक तो प्लास्टिक वेस्ट कम हुआ और दूसरा, केमिकल का इस्तेमाल कम होने से हम जलस्रोतों को भी कम प्रदूषित कर रहे हैं।”

प्रीति ने अपने घर में प्लास्टिक पैकेजिंग में आने वाले स्नैक्स का सेवन करना भी बंद कर दिया। उनका पांच साल का बेटा भी कभी बाहर के प्लास्टिक पैकेट वाले स्नैक्स लेने की जिद नहीं करता। वह घर में ही होममेड नाश्ता बनाकर खाती हैं और कहीं बाहर जाते समय वह हमेशा अपने साथ कपड़े की थैली रखती हैं, जिससे प्लास्टिक गलती से भी घर में न आ सके।  

इसके अलावा, स्टील का एक कटलरी सेट भी उनके पास हमेशा रहता है। 

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उन्होंने बताया कि कुछ प्रोडक्ट्स अगर प्लास्टिक कंटेनर में आ भी रहे हैं, तो हम कोशिश करते हैं कि छोटे-छोटे बोतल या डिब्बे लेने के बजाय बड़े डिब्बे ख़रीदें, ताकि उसे रीसायकल किया जा सके। इसके बावजूद, अगर प्लास्टिक घर में आता है, तो प्रीति उसे रीसाइक्लिंग के लिए भेज देती हैं। 

प्रीति का मानना है कि पूरी तरह से जीरो वेस्ट लाइफ जीना किसी भी इंसान के लिए लगभग असंभव है, लेकिन हम अपने प्रयासों से वेस्ट को कम तो कर ही सकते हैं। 

पिछले कुछ सालों के अपने अनुभव से प्रीति ने कुछ आसान तरीके बताए हैं, जिससे हम जीरो वेस्ट के लिए पहला कदम बढ़ा सकते हैं।  

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1. बड़े कंटेनर ख़रीदें 

buying big and collecting plastic waste
Buying Big And Collecting Plastic Waste

थोक में सामान ख़रीदना एक अच्छी आदत है, जो कचरे को काफी हद तक कम करने में मदद कर सकती है। एक उत्पाद जिसे हम जानते हैं कि हम 6 महीने या एक साल से अधिक समय तक उपयोग करेंगे, तो उसे बाजार में उपलब्ध सबसे बड़ी पैकेजिंग में खरीदा जा सकता है, ताकि छोटे पैकेट और बोतलों के रूप में कचरा कम हो सके। बड़ी बोतल/बैग को बाद में घर में अन्य चीजों को स्टोर करने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। आप अगर घर पर शैम्पू नहीं बना रहे, तो इसकी बड़ी बोतल तो खरीद ही सकते हैं। 

2. प्लास्टिक पैकेट को छोटे टुकड़ों में न काटें

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हमारी आदत है कि प्लास्टिक के पैकेट को कोने से काटकर, उस छोटे टुकड़े को अपने कूड़ेदान में फेंक देते हैं। अगर हम पैकेट को इस तरह से खोलते हैं, तो पैकेट का वह छोटा हिस्सा रीसायकल नहीं हो सकता। ऐसे में ये हजारों करोड़ों प्लास्टिक के टुकड़े लैंडफिल में जाते हैं और बड़े पैमाने पर प्रदूषण का कारण बन जाते हैं। 

3. खरीदने से पहले सोचना

प्रीति का मानना है कि किसी भी जीरो वेस्ट लाइफ का पहला कदम यही होना चाहिए कि कोई भी प्रोडक्ट खरीदने से पहले, हम सोचें कि क्या मुझे सच में इसकी जरूरत है। क्या कोई प्लास्टिक का खिलौना वास्तव में मेरे बच्चे के विकास में मदद करता है? क्या मुझे सच में उस ड्रेस या कपड़े की ज़रूरत है या यह सिर्फ मेरी आलमारी की शोभा बनेगा और आगे चलकर कूड़े में जाएगा। एक स्मार्ट ग्राहक बनकर भी हम वेस्ट कम कर सकते हैं।  

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4. कचरे को अलग करना

हम सभी को कचरा कूड़ेदान में डालने की आदत हो गई है। ऐसे में इस आदत को बदलना सबसे कठिन काम है। हमारे घर से कौनसा कचरा बाहर जा रहा है और कहां जा रहा है? इन सारे सवालों के जवाब शायद आपके पास हैं, इसलिए अपने सूखे कचरे और गीले कचरे को अलग करना और जितना हो सके, कम करना एक बड़ा ही जरूरी कदम है। अगर हर घर से कचरा कम होगा, तो लैंडफिल में कचरा अपने-आप ही कम हो जाएगा। 

घर में आए हर एक प्लास्टिक बोतल को जमा करें, जो आप घर में फिर उपयोग कर सकते हैं, उसे घर में इस्तेमाल करें। कुछ प्लास्टिक वेस्ट आप रीसायकल के लिए भी दे सकते हैं।  

segregate waste at home

इसी तरह गीला कचरा भी आप अच्छे से रीसायकल या उपयोग में ला सकते हैं। फलों के छिलकों से घर के लिए नेचुरल क्लीनर बना सकते हैं। सर्दियों में मटर के छिलके और हरी सब्जियों का कचरा आप आस-पास गाय को खिला सकते हैं। इसके लिए आपको थोड़ा समय जरूर निकालना होगा, लेकिन सड़क पर घूमने वाले जानवरों को अच्छा भोजन मिल जाएगा।  

5 . सिंगल यूज प्लास्टिक को कहें ना 

सिंगल यूज प्लास्टिक और डिस्पोजल पूरी दुनिया के लिए आसान विकल्प बन गए हैं। सब्जियों की दुकान पर छोटे प्लास्टिक बेग्स मांगने से बेहतर है, आप अपना एक कपड़े का थैला हमेशा साथ रखें। बाहर खाना खाते समय प्लास्टिक की चम्मच और प्लेट्स के बजाय हम खुद के बर्तन, चम्मच आदि इस्तेमाल कर सकते हैं। यह सिर्फ आदत की बात है, प्रीति कहती हैं कि उन्हें स्टारबग्स में कॉफी पीना पसंद है, लेकिन वह वहां भी अपना खुद का मग ले जाती हैं, ताकि प्लास्टिक कचरा कम हो सके। बाहर से खाना ऑर्डर करते समय वह एक बार चेक करती हैं कि खाना प्लास्टिक पैकेट में तो नहीं आ रहा। 

6. प्लास्टिक फ्री पीरियड्स

यह कदम खास कर महिलाओं के लिए है, जिन पैड्स का इस्तेमाल हम हाइजीन के लिए करते हैं, उसपर जहरीले प्लास्टिक की एक परत होती है। ऐसे में मेंस्ट्रुअल कप या कपड़े के पैड का उपयोग करना ज्यादा बेहतर हो सकता है। इस आदत से खर्च भी कम होगा और वेस्ट भी।   

7. रीसाइक्लिंग 

हमारे घर से किस तरह के वेस्ट बाहर जाते हैं, सब का हिसाब लगाएं। जैसे प्लास्टिक वेस्ट, इलेक्ट्रॉनिक वेस्ट, बायो वेस्ट आदि को अलग करने के साथ-साथ, जरूरी है कि इसे सही जगह पर रीसायकल के लिए दिया जाए।

क्या आपको याद है कि पहले हमारे घरों में हम कई डिब्बे, कपड़े और बाकि वेस्ट जमा करके कबाड़ी वाले को देते थे? लेकिन डिस्पोजेबल लाइफ और ग्राहकों की खरीदने की शक्ति ने हमें सबकुछ फेंकना सीखा दिया है।  इसलिए हमें जरूरत है, थोड़ा पीछे जाने की और कबाड़ी वाले भैया को फिर से याद करने की।  

avoid single use plastic by using own bag and cutlery
Avoid Single Use Plastic By Using Own Bag And Cutlery

8. ईको-फ्रेंडली प्रोडक्ट्स के उपयोग पर ध्यान देना 

भारत में कई ऐसी कई कंपनियां हैं, जो हमारी रोजमर्रा की जरूरत को ध्यान में रखते हुए प्राकृतिक प्रोडक्ट्स बना रही हैं। शैंपू से लेकर फेस पैक तक, बांस के टूथ ब्रश से लेकर प्राकृतिक डिटर्जेंट तक, प्राकृतिक हेयर वॉश से लेकर केमिकल फ्री ऑर्गेनिक फ्लोर क्लीनर तक सबकुछ बाजार में मिल जाता है। बस जरूरत है थोड़ा ढूंढने की, लेकिन एक बार अगर आप मन बनाकर कोशिश करें, तो आपको हर चीज़ का प्राकृतिक विकल्प जरूर मिल जाएगा। 

बच्चों के लिए भी आप प्लास्टिक के खिलौनों की जगह हमारे पारम्परिक लकड़ी या मिट्टी के खिलौने खरीद सकते हैं। इससे हमारे देसी हस्त कलाकारों को भी रोजगार मिल पाएगा।  

9  कम्पोस्ट बनाना:

यह शुरुआत में थोड़ा मुश्किल लग सकता है, लेकिन यकीन मानिए समय के साथ यह आपके जीवन का हिस्सा बना जाएगा। इसके लिए आपको एक बड़ा कंटेनर , कुछ सूखे पत्ते या बाहर से कम्पोस्ट मिक्स, थोड़ा दही (कम्पोस्टिंग प्रक्रिया को तेज  करने लिए) चाहिए होगा। आपको बस हर दिन अपने कचरे को इसमें फेंकना है और समय-समय पर ढेर को घुमाते रहना है। आप इस खाद को अपने गार्डन या अपनी सोसाइटी के गार्डन में इस्तेमाल कर सकते हैं।  

10 . DIY Life/Home-made is best:

पहले शाम का नाश्ता हमारी माताएं घर पर ही बनाती थीं। आज भी आपकी दादी या माँ जरूर यह कहती होंगी कि  “बाहर से क्यों मंगवाना रहै, मैं इसे घर पर ही बना दूंगी। प्रीति कहती हैं कि  DIY का मतलब  प्लास्टिक की बोतलों को काटने और सुंदर प्लांटर्स बनाना बिल्कुल नहीं है। वह प्लाटिक के  किसी भी कंटनेर को काटना गलत बताती हैं।  क्योंकि कटे हुए टुकड़े ज्यादा नुकसान पहुंचाते हैं।  

 DIYs का इस्तेमाल आप अपनी ज़ीरोवेस्ट लाइफ को अच्छा बनाने के लिए करें। घर पर  प्राकृतिक क्लीनर बायो-एंजाइम बनाएं। बाहर से प्लास्टिक पैकेट के जगह, घर पर बने स्नैक्स खाएं। इस तरह से कई चीजें हैं, जो आप घर पर कर सकते हैं। यह आपके खुद के स्वास्थ्य के लिए भी अच्छे होंगे। 

प्रीति ने खुद के साथ-साथ अपने ससुराल वालों को भी कचरा प्रबंधन और कम्पोस्टिंग की आदत दिला दी है। उनके मायके में भी अब एक कम्पोस्ट बीन का उपयोग किया जाता है। बड़ी ख़ुशी के साथ वह कहती हैं कि मेरे थोड़े से प्रयास से तीन घर का कचरा बिल्कुल कम हो गया है,  इससे अच्छी बात और क्या हो सकती है। मैं सोशल मीडिया के जरिए कई और लोगों को भी इस तरह के बदलाव अपनाने के लिए प्रेरित करती रहती हूँ।”

ऊपर बताए 10 बदलावों में से आप किसी एक आदत के साथ शुरुआत ज़रूर करें और हमें भी बताएं कि कौन सी आदत को आपने सबसे पहले अपनाया।  

आप भी जीरो वेस्ट लाइफस्टाइल के नुस्खों के लिए उन्हें सोशल मीडिया पर फॉलो कर सकते हैं। 

संपादन- अर्चना दुबे

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