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महाराष्ट्र: पिछले 17 सालों से इस सरकारी अस्पताल में गरीबों को मिल रहा है मुफ़्त खाना और कपड़े!

फोटो साभार: रेशमा राठी व रूपम सिंह

सिख समुदाय के लोग कहीं भी रहें, वे अपने दस गुरुओं की सीखों का पालन करना नहीं भूलते हैं और खासकर कि ‘दसवंद’ की सीख का पालन तो ज्यादातर सभी लोग करते हैं। ‘दसवंद’ का मतलब होता है अपनी कमाई का दसवां हिस्सा, गरीबों और जरुरतमंदों की सेवा में लगाना।

ऐसे न जाने कितने ही लोग हैं जो अलग-अलग तरीकों से इस ‘दसवंद’ की सीख का पालन कर समाज का कल्याण कर रहे हैं। इस फ़ेहरिस्त में जहां सभी गुरूद्वारे और उनमें चलने वाले मुफ्त लंगर शुमार हैं तो दिल्ली के गोल्डी सिंह और पटना के गुरमीत सिंह जैसे कुछ आम लोग भी हैं जो दूसरों का भला कर अपना कर्तव्य निभा रहे हैं।

दसवंद की सीख से ही प्रेरित एक और पहल है ‘जलाराम पाणपोई राम रोटी!’ इस पहल के जरिये आज महाराष्ट्र में विदर्भ के अमरावती शहर में हर रोज सैकड़ों लोगों का पेट भरा जा रहा है।

इर्विन सरकारी अस्पताल, अमरावती

दरअसल, अमरावती में स्थित इर्विन सरकारी अस्पताल में आस-पास और दूर-दराज के गांवों से न जाने कितने ही लोग इलाज के लिए आते हैं। इनमें से ज्यादातर मरीज़ बहुत ही गरीब परिवारों से होते हैं, जो दवा तो क्या दो वक्त का खाना भी नहीं जुटा पाते हैं। जलाराम पाणपोई राम रोटी अभियान से इन सभी गरीब मरीजों व उनके साथ आने वाले रिश्तेदारों को तीन वक़्त का खाना मुफ्त में प्रदान किया जाता है।

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इस अस्पताल में इस अभियान की शुरुआत लगभग 17 साल पहले किसंचजी ने की थी। इस अभियान में कोई भी छोटा-बड़ा व्यक्ति जुड़ सकता है और लोगों की सेवा में अपना योगदान दे सकता है। किसंचजी की मृत्यु के बाद उन्हीं के पदचिन्हों पर चलकर अमरावती निवासी रूपम सिंह सूर्यवंशी और अन्य कुछ साथियों ने यह बीड़ा अपने कन्धों पर उठाया।

रूपम सिंह ने द बेटर इंडिया को बताया कि एक बार इसी अस्पताल में किसंचजी की सास बीमारी के चलते भर्ती हुई थीं। वे उनके लिए खाना आदि लेकर अस्पताल पहुंचे। यहाँ पहुंचने पर वे बहुत से ग्रामीण और खासकर कि आदिवासी इलाकों से आने वाले लोगों से मिले। उन्हें पता चला कि इनमें से बहुत से लोगों ने न जाने कितने दिनों से कुछ नहीं खाया था। उसी पल से किसंचजी ने इन लोगों के लिए कुछ करने की ठान ली।

किसंचजी उस वक़्त एक पान की दूकान चलाते थे, पर उससे जो भी कमाई होती उससे वे इन लोगों के लिए भोजन का प्रबंध करने की कोशिश करते। धीरे-धीरे उनके साथ और भी लोग जुड़ते चले गये और कारवां बन गया। यह किसंचजी की ही सोच थी कि इस अभियान को किसी भी ट्रस्ट या फिर किसी निजी संस्था में न बदला जाये। इस अभियान का उद्देश्य सिर्फ लोगों की सेवा है और वही रहना चाहिए।

रूपम सिंह कहते हैं, “अस्पताल में आने वाले मरीजों को सुबह का नाश्ता, दिन में लंच व रात को डिनर दिया जाता है। अस्पताल के एक कोने में ही ‘जलाराम पाणपोई राम रोटी’ का काम चलता है। इर्विन अस्पताल के अलावा शहर के एक और अस्पताल में मरीजों के लिए खाना भेजा जाता है। हर रोज लगभग 500-600 लोगों को यहाँ भोजन करवाया जाता है।”

‘जलाराम पाणपोई राम रोटी’ का काम लगभग 15 से 20 स्वयंसेवक मिलकर संभालते हैं। गर्मी के मौसम में ये लोग जगह-जगह प्याऊ लगाकर लोगों की प्यास बुझाते हैं, तो सर्दियों में लोगों से पुराने लेकिन इस्तेमाल करने योग्य कम्बल, गर्म कपड़े आदि इकट्ठे कर जरुरतमंदों में बाँट देते हैं।

रूपम सिंह अन्य कुछ कार्यकर्ताओं के साथ

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इस अभियान से जुड़ी एक और स्वयंसेवा कार्यकर्ता डॉ. लता भट्टड राठी ने बताया कि यहाँ पर लोग जरूरत पड़ने पर अस्पताल में मरीजों के लिए रक्तदान भी करते हैं और बहुत बार उन्हें दवाइयाँ भी खरीद कर देते हैं। कई बार जब किसी व्यक्ति की मृत्यु हो जाती है और उसे लावारिस घोषित कर दिया जाता है, तो यही लोग पूरे सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार करवाते हैं।

फंडिंग के बारे में बताते हुए रूपम सिंह ने कहा, “हमसे जुड़े हुए ऐसे बहुत से लोग हैं, जो अच्छा कमा रहे हैं और अच्छी-खासी नौकरी-पेशे पर हैं, वे गुप्त रूप से इस सेवाकार्य के लिए दान करते हैं। इसके अलावा देश के बाहर से भी कुछ लोग हैं, जिनकी जड़ें अमरावती से जुड़ी हुई हैं, वे भी इस काम में योगदान देते हैं।”

बहुत से लोग अपने जन्मदिन, सालगिरह या शादी आदि समारोह के मौके पर जलाराम पाणपोई राम रोटी के साथ मिलकर इन लोगों के लिए खाना बनवाते हैं। रूपम सिंह ने बताया कि उनकी अपनी शादी बहुत ही सादे तरीके से कि गयी और यहाँ गरीबों के लिए भोज करवाया गया था।

लोगों को खाना खिलाते हुए (फोटो साभार: रेशमा राठी)

अब धीरे-धीरे ये लोग अपना काम और आगे बढ़ाने की दिशा में काम कर रहे हैं। रूपम सिंह के ही एक और दोस्त ने बढ़नेरा में एक और समूह बनाया हैं। इस समूह का मुख्य काम गरीब और बेरोजगार लोगों को रोजगार के साधन उपलब्ध करवाना है। अब तक ये लोग बहुत से युवाओं को काम दिलवा चुके हैं।

रूपम सिंह ने पाठकों के लिए अपने सन्देश में कहा,

“मेरा मानना है कि आपको इस सेवाकार्य की शुरुआत अपने घर से ही करनी चाहिए। सिक्खों में कहावत है कि ‘घर सुख तो बाहर सुख।’ मैं बस लोगों से इतना ही कहूँगा कि ज्यादा नहीं तो कम से कम अपनी कमाई का कुछ हिस्सा आप समाज की भलाई के लिए दे सकते हैं। आप अपने जन्मदिन, सालगिरह आदि पर किसी बड़े होटल या रेस्त्रां में पैसे खर्च करने की बजाय अगर किसी गरीब का पेट भरेंगे तो आपको बहुत सारी दुआएं मिलेंगी। क्योंकि भगवान की नज़र में शायद वह इंसान बड़ा नहीं जो करोड़ों कमाता है, बल्कि वो इंसान बड़ा है जो करोड़ों का दिल जीतता है।”

जलाराम पाणपोई राम रोटी अभियान से जुड़ने के लिए रूपम सिंह सूर्यवंशी को 9404103200, 7972083791 पर कॉल करें।


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Written by निशा डागर

बातें करने और लिखने की शौक़ीन निशा डागर हरियाणा से ताल्लुक रखती हैं. निशा ने दिल्ली विश्वविद्यालय से अपनी ग्रेजुएशन और हैदराबाद विश्वविद्यालय से मास्टर्स की है. लेखन के अलावा निशा को 'डेवलपमेंट कम्युनिकेशन' और रिसर्च के क्षेत्र में दिलचस्पी है. निशा की कविताएँ आप https://kahakasha.blogspot.com/ पर पढ़ सकते हैं!

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