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इस सरकारी स्कूल के प्रिंसिपल का दिन शुरू होता है शौचालय की सफाई से!

महादेश्वर स्वामी शौचालय की सफाई करते हुए (बाएं) और सरकारी प्राथमिक स्कूल के छात्रों की प्रतीकात्मक तस्वीर (दायें)

मारे देश के ज्यादातर सरकारी स्कूलों में न केवल शिक्षकों की कमी है बल्कि स्कूल के रख- रखाव के लिए सफाई कर्मचारियों की संख्या में भी भारी कमी है। ऐसे में अक्सर आपने वाकये सुने होंगे कि छात्रों का दिन स्कूल का परिसर और अपनी कक्षाओं की साफ़-सफाई से शुरू होता है।

लेकिन कर्नाटक के चामराजनगर जिले में होंगहल्ली गांव के सरकारी प्राथमिक स्कूल की कहानी कुछ और है। यहाँ पर छात्रों का नहीं बल्कि स्कूल के हेडमास्टर बी महादेश्वर स्वामी का दिन साफ़- सफाई से शुरू होता है। स्कूल के शौचालय से लेकर कक्षाओं तक की सफाई हेडमास्टर साहब खुद करते हैं।

इतना ही नहीं उन्होंने अपनी जेब से पैसा खर्च कर स्कूल की लाइब्रेरी और बगीचे की हालत भी सुधरवायी है। वे खुद भी बगीचे के रख-रखाव का ध्यान रखते हैं।

द टाइम्स ऑफ़ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार महादेश्वर बच्चों की व्यक्तिगत साफ़-सफाई पर भी ध्यान देते हैं। वे उन्हें स्कूल की हर एक गतिविधि में भाग लेने और उससे सीखने के लिए प्रेरित करते हैं। उनके प्रयासों के कारण ही आज स्कूल में बच्चों की संख्या 121 तक पहुंच गयी है।

अब गाँव के लोग बिना किसी संकोच के बच्चों को स्कूल भेजते हैं। हालांकि, यह पहली बार नहीं है कि उन्होंने स्कूल के शौचालयों को साफ करने की पहल की है। 6 फरवरी, 1988 को वे बिलीगीरिरंगाना हिल्स में डॉ एच सुदर्शन (एक सामाजिक कार्यकर्ता) द्वारा शुरू किए गए आदिवासी स्कूल से जुड़े। वहां पहले दिन से ही उन्होंने यह पहल शुरू की।

“मैंने वहां आठ सालों से भी ज्यादा वक़्त तक काम किया। उसी अनुभव ने मुझे व्यक्तिगत स्वच्छता और सामाजिक सेवा का महत्व सिखाया। साल 1994 में, मैंने सरकारी नौकरी शुरू की पर स्वच्छता के लिए अपने नजरिये को साथ रखा। हमारे द्वारा उपयोग किए जाने वाली जगहों को साफ करना हमारा कर्तव्य है। एक स्वस्थ जीवन के लिए स्वच्छ शौचालय आवश्यक हैं। इसलिए, जहां भी मैं जाता हूँ, मैं इस प्रयास को जारी रखता हूँ,” महादेश्वर ने टाइम्स ऑफ इंडिया को बताया।

गाँव वालों की माने तो इस स्कूल में महादेश्वर की वजह से काफी बदलाव आया है। हमें उम्मीद है कि और भी बहुत से लोग इनसे प्रेरणा लेंगें और अपने कर्तव्यों को समझेंगे।


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Written by निशा डागर

Blessed with a talkative nature, Nisha has done her masters with the specialization in Communication Research. Interested in Development Communication and Rural development, she loves to learn new things. She loves to write feature stories and poetry. One can visit https://kahakasha.blogspot.com/ to read her poems.

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