गोबर से लकड़ी बनाने की 9000 मशीनें बेचने के बाद, अब बनायी गोबर सुखाने की मशीन

तीन साल पहले गोबर से लकड़ी बनाने की मशीन से मिली सफलता के बाद, पटियाला के 31 वर्षीय कार्तिक पाल ने अब गोबर सुखाने की मशीन (cow dung dryer machine) बनाई है। पढ़ें कैसे इस मशीन से किसान और डेयरी बिज़नेस वाले कमा सकते हैं मुनाफा।

cow dung dryer machine made by Patiyala Man

आमतौर पर लोग दूध के लिए, मवेशी पालन करते हैं। इसके अलावा, मवेशियों का गोबर का भी,कई कामों में उपयोग होता है। लेकिन गोबर का ठीक से प्रबंधन करना, मवेशी पालकों की सबसे बड़ी चुनौती होती है। अक्सर आपने देखा होगा कि गौशाला में गोबर का ढेर बन जाता है और लोग समझ नहीं पाते कि इसका करें क्या?

यदि गोबर को अच्छे से इस्तेमाल में लिया जाए, तो यह खेतों में खाद बनाने से लेकर, बायो गैस बनाने तक में काम आ सकता है। गोबर की इसी खूबी को पहचानकर, पंजाब के 31 वर्षीय कार्तिक पाल ने इससे जुड़े एक नहीं, बल्कि तीन आविष्कार किए हैं। 

उन्होंने सबसे पहले 2017 में गोबर से लकड़ी बनाने की मशीन बनाई थी। जो फेसबुक और सोशल मीडिया के जरिए देशभर में इतनी हिट हुई कि अब तक वह 9000 मशीनें बेच चुके हैं। इसके बाद, इसी साल उन्होंने गोबर सुखाने की मशीन (Cow Dung Dryer Machine) बनाई है, जो कुछ ही मिनटों में गीले गोबर से पानी अलग करके पाउडर बना देती है। 

उनका तीसरा आविष्कार है, गोबर उठाने की ऑटोमैटिक मशीन, जिस पर फ़िलहाल वह काम कर रहे हैं। लेकिन बाकी की दोनों मशीनों को बेचकर, उन्होंने अपने कंपनी के टर्नओवर को करोड़ों रुपये तक पहुंचा दिया है। 

Kartik With His Machine

कनाडा जाने के बजाय, कर रहे किसानों के लिए काम 

कार्तिक ने इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की है।  पटियाला में उनकी ‘गुरुदेव शक्ति’ नाम की कंपनी है, जहां वह चारा काटने का चाफ कटर और खेतों में इस्तेमाल होने वाले जनरेटर बनाते हैं। सालों से उनके पिता यह कम्पनी चला रहे हैं, इसलिए वह किसान न होते हुए भी किसानों के सम्पर्क में थे। लेकिन कर्तिक को शुरुआत में इस काम में बिल्कुल रूचि नहीं थी। 

वह कहते हैं, “2014 में इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने के बाद, मुझे कनाडा जाना था। लेकिन मेरे पिता चाहते थे कि मैं भारत में रहकर ही कुछ करूं। इसलिए मैं अपने पिता के साथ काम करने लगा।”

कार्तिक हमेशा अपनी मशीनों की डिलीवरी के लिए गौशाला और किसानों के पास जाते रहते थे। इसी दौरान, एक दिन उन्हें गोबर से लकड़ी बनाने की मशीन (Cow Dung Dryer Machine) का ख्याल आया। उन्होंने बताया कि एक बार वह पटियाला स्थित गौशाला में चाफ कटर की डिलीवरी के लिए गए थे। उन्होंने वहां गोबर का ढेर देखा। गौशाला के लोग भी इस समस्या से परेशान थे। 

उस दिन को याद करते हुए कार्तिक कहते हैं, “मुझे आज भी याद है कि उस दिन गौशाला से निकलते ही, मुझे एक आटे की सेवइयां बनाने वाला मिला था। अक्सर पंजाब में लोग घर पर ही आटे से सेवइयां बनवाते हैं। सेवइयां बनाने वाले की मशीन को देखकर ही, मुझे गोबर से लकड़ी बनाने की मशीन का ख्याल आया था।”

उन्होंने अपनी फैक्ट्री में ही सेवइयां बनाने की मशीन का एक बड़ा रूप तैयार किया। यह आटा चक्की की मशीन की तरह काम करती है। इसमें वह दो से चार दिन पुराना गोबर इस्तेमाल करते हैं, जिसमें नमी थोड़ी कम हो। उसके बाद मशीन के आगे की तरफ अलग-अलग आकार के एक्सक्लूडर्स लगे हैं, जिसकी मदद से गोबर मनचाहे आकर में बदल जाता है। बाद में, इसे सुखाकर इस्तेमाल में लिया जाता है।

ये लकड़ियां हवन, पूजा और अंतिम संस्कार के लिए इस्तेमाल की जा रही हैं। साथ ही, गौशाला और किसानों को कमाई का एक नया जरिया भी मिला है। 

गोबर की लकड़ी

गोबर से कमाई 

कार्तिक कहते हैं, “इस मशीन (Cow Dung Dryer Machine) से लोग अच्छा बिज़नेस भी कर सकते हैं। जिसके पास गोबर नहीं है, वह अगर गौशाला से एक रुपये प्रतिकिलो के हिसाब से गोबर खरीदता है, जिसके बाद 1.5 रुपये प्रतिकिलो बिजली का खर्च मिलाकर यदि वह गोबर से लकड़ी बनाता है, तो बाजार में यह आराम से पांच रुपये किलो के भाव में बिक सकती है।”

यह लकड़ी सिर्फ गोबर से भी बन सकती है। वहीं इसमें लकड़ी की भूसी या कोयले का चूरा भी मिलाया जा सकता है। कार्तिक इस मशीन को 65 हजार रुपये में बेच रहे हैं।  

पहली मशीन की सफलता के बाद, उन्होंने आठ महीने पहले गोबर ड्रायर मशीन (Cow Dung Dryer Machine) बनाई है। कार्तिक ने कहा कि वह अब तक 500 गोबर ड्रायर मशीन बेच चुके हैं। यह मशीन गौशाला के साथ, बायोगैस प्लांट्स में भी इस्तेमाल की जा रही है।  

गोबर ड्रायर मशीन के इस्तेमाल करने के तरीके के बारे में बात करते हुए उन्होंने बताया, “डेयरी फार्म वाले एक बड़ा गड्ढ़ा करके रोज का गोबर जमा करते हैं। इसमें पानी और गौमूत्र मिलाकर गोबर का तरल रूप तैयार किया जाता है, बाद में इसे पंप की मदद से मशीन में डाला जाता है। मशीन, पानी और गोबर को अलग करके गोबर का ड्राई पाउडर तैयार कर देती है।” 

यह 5 एचपी पावर वाला ऑटोमैटिक मशीन (Cow Dung Dryer Machine) है, जिसकी कीमत दो लाख 40 हजार रुपये है। वहीं कार्तिक ने छोटे किसानों के लिए एक छोटी मशीन भी बनाई है, जो 3 एचपी पावर के साथ एक लाख 40 हजार रुपये में बिक रही है। 

गोबर का पाउडर खाद, सैपलिंग पॉट, दीये आदि बनाने के लिए काम में आता है। वहीं इसका पानी भी खेतों में कीटनाशक का काम करता है। 

कार्तिक के इन आविष्कारों के कारण पिछले साल में उनकी कंपनी ने 10 करोड़ का मुनाफा कमाया।

कर्नाटक के दोडबल्लापुर के एक किसान शिवानंद सिंह ने कुछ महीनों पहले ही कार्तिक से गोबर ड्रायर (Cow Dung Dryer Machine) और लकड़ी बनाने की मशीन खरीदी है। उन्होंने बताया, “यह मशीन काफी फायदेमंद है। हम पहले सिर्फ खेती का काम करते थे। लेकिन हमारे पास 25 गायें भी हैं, जिनके गोबर का उपयोग हम कर नहीं पाते थे। लेकिन अब ड्रायर मशीन से हम खाद बनाकर बेच रहे हैं, जबकि इसका पानी खेतों में छिड़क रहे हैं। अभी लकड़ी बनाने वाली मशीन का इस्तेमाल शुरू नहीं किया है, लेकिन जल्द ही मैं वह काम भी करूंगा।”

गोबर से लकड़ी बनाने की मशीन

कार्तिक अब गोबर उठाने के लिए भी एक बैटरी ऑपरेटेड मशीन बना रहे हैं। यह मशीन गोबर उठाकर डिब्बे में भरने का काम आसान बना देगी। 

अंत में कार्तिक कहते हैं “मेरी मशीन (Cow Dung Dryer Machine) की वजह से गोबर की कीमत बढ़ गई है। जो लोग पहले गोबर की परेशानी के कारण पशु नहीं पालते थे, आज वह गोबर की वजह से ही गाय पालने लगे हैं।”

आप कार्तिक से 98780 72154 पर संपर्क कर सकते हैं। मशीन के बारे में विस्तार से जानने के लिए आप उनकी वेबसाइट पर भी जा सकते हैं।   

संपादन- जी एन झा

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